कांकेर। रविवार, 21 जून 2026
छत्तीसगढ़ में जबरन और लालच देकर कराए जाने वाले मतांतरण (धर्म परिवर्तन) के खिलाफ बेहद सख्त कानून लागू होने के बावजूद जमीनी स्तर पर ऐसे मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। ताजा और बेहद संवेदनशील मामला उत्तर बस्तर के कांकेर जिले से सामने आया है, जहाँ एक 73 वर्षीय बुजुर्ग आदिवासी पिता ने अपने ही सगे बेटे और बहू के खिलाफ थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। बुजुर्ग का आरोप है कि ईसाई धर्म अपनाने के बाद उनका बेटा और बहू उन पर भी अपनी पीढ़ियों पुरानी आदिवासी परंपराओं को छोड़कर ईसाई बनने का मानसिक दबाव बना रहे हैं।
इस घटना ने एक बार फिर बस्तर संभाग के जनजातीय क्षेत्रों में सांस्कृतिक पहचान के संकट और मिशनरियों की कथित सक्रियता पर बहस छेड़ दी है।
अंतिम संस्कार तक न करने की दी जा रही है धमकी
कांकेर जिले के स्थानीय पुलिस थाने में दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, 73 वर्षीय पीड़ित बुजुर्ग का परिवार पीढ़ियों से अपनी पारंपरिक जनजातीय मान्यताओं, रूढ़ियों और स्थानीय देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना करता आ रहा है। बुजुर्ग ने पुलिस को बताया कि कुछ समय पहले उनका बेटा और बहू कुछ बाहरी पादरियों (Pastors) के संपर्क में आए थे। इसके बाद उन्होंने गुपचुप तरीके से ईसाई धर्म अपना लिया और धीरे-धीरे घर में होने वाली पारंपरिक पूजा-पद्धति से पूरी तरह दूरी बना ली।
बुजुर्ग का आरोप है कि ईसाई धर्म अपनाने के बाद से ही दोनों लगातार उन पर भी मतांतरण के लिए प्रलोभन और दबाव दे रहे हैं। जब पिता ने अपनी मूल संस्कृति और आस्था को छोड़ने से साफ इनकार कर दिया, तो उनके साथ विवाद और बदसलूकी की जाने लगी। बुजुर्ग ने अपनी शिकायत में एक बेहद दर्दनाक आरोप लगाते हुए कहा:
“मुझे धमकी दी जा रही है कि अगर मैंने ईसा मसीह को स्वीकार नहीं किया और ईसाई धर्म नहीं अपनाया, तो मेरी मृत्यु के बाद आदिवासी रीति-रिवाज से मेरा अंतिम संस्कार तक नहीं करने दिया जाएगा। लगातार मिल रही धमकियों और घरेलू विवाद के कारण मेरा जीना दूभर हो गया है।”
छत्तीसगढ़ का नया सख्त धर्मांतरण कानून (Freedom of Religion Bill)
छत्तीसगढ़ में हाल ही में लागू हुए नए ‘धर्म स्वातंत्र्य संशोधन विधेयक’ (Anti-Conversion Law) के तहत किसी भी व्यक्ति को डरा-धमकाकर, लालच देकर, प्रलोभन या अंधविश्वास फैलाकर धर्म परिवर्तन कराना एक गैर-जमानती और गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।
इस कानून के तहत यदि कोई स्वेच्छा से भी धर्म बदलना चाहता है, तो उसे जिला मजिस्ट्रेट (DM) के पास कम से कम 60 दिन पहले एक औपचारिक घोषणा-पत्र जमा करना अनिवार्य है। इसके बिना किया गया कोई भी मतांतरण अवैध माना जाता है। कांकेर पुलिस ने बुजुर्ग की शिकायत के आधार पर मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। स्थानीय पुलिस प्रशासन का कहना है कि दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कानून के मुताबिक सख्त उचित कार्रवाई की जाएगी।
बस्तर में गहराता सांस्कृतिक पहचान और जनजातीय अस्तित्व का संकट
यह पहली बार नहीं है जब छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल इलाकों से इस प्रकार के पारिवारिक और सामाजिक टकराव की खबरें आई हैं। बस्तर और कांकेर के सुदूर वनांचलों में पिछले कुछ समय से स्थानीय जनजातीय समुदाय और नव-दीक्षित ईसाई परिवारों के बीच ‘घर वापसी’ और सांस्कृतिक पहचान को लेकर तनाव देखा जा रहा है।
हाल ही में छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों जैसे महासमुंद और बस्तर के रेटावंड में भी स्थानीय ग्रामीणों और मिशनरियों के बीच झड़पें और बड़े पैमाने पर सनातन धर्म में वापसी के कार्यक्रम (Ghar Wapsi Campaign) आयोजित किए गए हैं। जनजातीय मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि बाहरी धर्म प्रचारकों द्वारा आदिवासियों को उनकी मूल संस्कृति से काटने के प्रयासों के कारण अब परिवारों के भीतर ही इस तरह के घातक टकराव देखने को मिल रहे हैं, जो सामाजिक ताने-बाने के लिए एक गंभीर चेतावनी है।
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