रायपुर । शनिवार, 8 अगस्त 2026
छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में जबरन, प्रलोभन, धोखे या अनुचित प्रभाव से कराए जाने वाले धर्मांतरण को रोकने के लिए छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम, 2026 को लागू कर दिया है। नए कानून के तहत प्रावधानों को पहले से अधिक सख्त, व्यापक और कठोर बनाया गया है।
इस कानून का मुख्य उद्देश्य लोगों की धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करना और अवैध या अनुचित तरीकों से होने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाना है।
नए कानून की मुख्य विशेषताएं और प्रावधान
1. 60 दिन पूर्व नोटिस और प्रशासनिक जांच
यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से अपना धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत कम से कम 60 दिन पहले जिला प्रशासन (जिला मजिस्ट्रेट) को आवेदन या सूचना देनी होगी।
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धर्म परिवर्तन कराने वाले धार्मिक प्रतिनिधि के लिए भी प्रशासन को पूर्व सूचना देना अनिवार्य किया गया है।
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इस अवधि के दौरान प्रशासन यह जांच करेगा कि यह धर्मांतरण बिना किसी दबाव, भय, लालच या धोखे के किया जा रहा है या नहीं।
2. किन तरीकों के धर्मांतरण पर रोक?
अधिनियम के तहत निम्नलिखित तरीकों से किए गए धर्मांतरण को पूरी तरह अवैध घोषित किया गया है:
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बल या भय: शारीरिक बल, धमकी या मानसिक दबाव का उपयोग करना।
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प्रलोभन: आर्थिक लाभ, नौकरी, मुफ्त शिक्षा या किसी अन्य प्रलोभन के जरिए।
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धोखाधड़ी: गलत जानकारी देकर या पहचान छिपाकर।
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विवाह के माध्यम से: केवल धर्मांतरण के उद्देश्य से किया गया अवैध विवाह।
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डिजिटल व इलेक्ट्रॉनिक माध्यम: इंटरनेट या सोशल मीडिया के जरिए अवैध धर्मांतरण को बढ़ावा देना।
सजा और जुर्माने का पूरा ब्योरा
अवैध धर्मांतरण के मामलों में अपराध की गंभीरता और पीड़ित वर्ग के आधार पर कठोर सजा तय की गई है:
| अपराध की श्रेणी | संभावित कारावास | न्यूनतम जुर्माना |
| सामान्य अवैध धर्मांतरण | 7 से 10 वर्ष | ₹5 लाख |
| महिला, नाबालिग व संरक्षित वर्ग | 10 से 20 वर्ष | ₹10 लाख |
| सामूहिक धर्मांतरण | 10 वर्ष से आजीवन कारावास | ₹25 लाख |
गैर-जमानती अपराध और सहयोगियों पर कार्रवाई
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संज्ञेय और गैर-जमानती: कानून के तहत निर्धारित अवैध धर्मांतरण से जुड़े सभी अपराधों को संज्ञेय (Cognizable) और गैर-जमानती (Non-Bailable) बनाया गया है। इसमें पुलिस सीधे कार्रवाई कर सकती है और जमानत का फैसला अदालत करेगी।
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सहयोगियों पर शिकंजा: अवैध धर्मांतरण में किसी भी रूप में सहायता या सहयोग करने वाले व्यक्ति भी कानूनी दायरे में आएंगे।
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विदेशी फंडिंग पर नजर: सामूहिक धर्मांतरण में विदेशी वित्तीय सहायता का इस्तेमाल पाए जाने पर संबंधित संस्थाओं और व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
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दोबारा अपराध पर कड़ा रुख: बार-बार इस तरह के मामलों में संलिप्त पाए जाने वाले दोषियों के लिए अधिक कठोर दंडात्मक प्रावधान किए गए हैं।
कानून को लेकर बहस और संवैधानिक पहलू
सरकार के अनुसार यह कानून लोगों को दबाव और प्रलोभन मुक्त वातावरण देने के उद्देश्य से लाया गया है। दूसरी ओर, विधि विशेषज्ञों और नागरिक संगठनों द्वारा इसके क्रियान्वयन तथा संविधान के अनुच्छेद 25 (धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार) के संदर्भ में बहस जारी है। आने वाले समय में इसके व्यावहारिक क्रियान्वयन और संवैधानिक पहलुओं पर विस्तृत कानूनी चर्चा देखने को मिल सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1. छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम 2026 के तहत धर्म परिवर्तन के लिए कितने दिन पहले नोटिस देना होगा?
उत्तर: स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करने की इच्छा रखने वाले व्यक्ति और धर्मांतरण कराने वाले प्रतिनिधि दोनों को कम से कम 60 दिन पहले जिला प्रशासन को लिखित सूचना देनी होगी।
Q2. क्या अवैध धर्मांतरण के मामलों में जमानत मिल सकती है?
उत्तर: इस कानून के तहत अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती हैं, इसलिए जमानत की मंजूरी पूरी तरह से संबंधित न्यायालय के क्षेत्राधिकार और निर्णय पर निर्भर करती है।
Q3. सामूहिक धर्मांतरण कराने पर अधिकतम कितनी सजा हो सकती है?
उत्तर: सामूहिक धर्मांतरण के मामले में 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा और ₹25 लाख तक के जुर्माने का प्रावधान है।
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अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारियों और समाचार रिपोर्टों के आधार पर तैयार किया गया है। किसी भी वास्तविक कानूनी मामले में लागू होने वाली धाराएं, प्रक्रियाएं और सजा कोर्ट के निर्णय एवं संबंधित केस के तथ्यों पर आधारित होगी।*
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