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हैदराबाद का पुरानापुल दरवाजा: जहाँ शिवाजी महाराज ने रखे थे कदम

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हैदराबाद का ऐतिहासिक पुरानापुल दरवाजा मंदिर जहाँ छत्रपति शिवाजी महाराज ने विश्राम किया था।

हैदराबाद. पुरानापुल दरवाजा (Puranapul Darwaza) इन दिनों अपनी ऐतिहासिक विरासत और हालिया विवादों के कारण चर्चा के केंद्र में है। 14-15 जनवरी 2026 की दरम्यानी रात को यहाँ स्थित प्राचीन मंदिर में हुई तोड़फोड़ की घटना ने न केवल तनाव पैदा किया, बल्कि इस स्थान के छत्रपति शिवाजी महाराज से जुड़े गौरवशाली इतिहास को भी पुनर्जीवित कर दिया है।

1. ऐतिहासिक तथ्य: शिवाजी महाराज और पुरानापुल का संबंध

इतिहासकारों और स्थानीय परंपराओं के अनुसार, पुरानापुल दरवाजा केवल एक प्रवेश द्वार नहीं है, बल्कि यह मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज की दक्षिण विजय यात्रा का गवाह है।

  • 1677 की ऐतिहासिक यात्रा: फरवरी 1677 में जब शिवाजी महाराज अपनी ‘दक्षिण दिग्विजय’ यात्रा पर थे, तब वे गोलकुंडा के सुल्तान कुतुब शाह से मिलने हैदराबाद आए थे।

  • विश्राम और पड़ाव: माना जाता है कि इसी पुरानापुल दरवाजे के समीप उन्होंने अपना पड़ाव डाला था। यहीं पर मां भवानी (मैसम्मा देवी) का एक प्राचीन मंदिर है, जिसे ‘पुरानापुल दरवाजा मंदिर’ के नाम से जाना जाता है।

  • सांस्कृतिक प्रतीक: यहाँ शिवाजी महाराज का एक भगवा ध्वज और चित्र हमेशा से श्रद्धा का केंद्र रहा है, जो उनकी इस ऐतिहासिक यात्रा की स्मृति दिलाता है।

2. हालिया विवाद: क्या हुआ 14-15 जनवरी की रात?

हाल ही में इस ऐतिहासिक स्थल पर सांप्रदायिक तनाव की स्थिति बनी, जिसकी मुख्य कड़ियाँ इस प्रकार हैं:

  • घटना: 14 जनवरी 2026 की रात को कुछ असामाजिक तत्वों ने मंदिर परिसर में घुसकर शिवाजी महाराज के फ्लेक्स बैनर को फाड़ दिया और मंदिर के बरामदे में रखी एक छोटी मूर्ति (POP) को क्षतिग्रस्त करने का प्रयास किया।

  • आक्रोश: घटना की खबर फैलते ही स्थानीय हिंदू संगठनों और भाजपा कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस दौरान दो पक्षों के बीच पथराव और वाहनों में आगजनी की खबरें भी आईं।

  • पुलिस कार्रवाई: पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक मुख्य संदिग्ध को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि मुख्य गर्भगृह की मूर्तियाँ सुरक्षित हैं।

3. वैचारिक विश्लेषण: विरासत पर प्रहार या साजिश?

हिंदू संगठनों और तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव का आरोप है कि यह हमला केवल एक मंदिर पर नहीं, बल्कि हिंदू गौरव के प्रतीकों पर है।

  • पैटर्न का दावा: संतों और विचारकों का मानना है कि सिकंदराबाद के मुत्यालम्मा मंदिर के बाद पुरानापुल की घटना एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है ताकि हिंदुओं की आस्था को चोट पहुँचाई जा सके।

  • मांग: मांग की जा रही है कि इस दरवाजे और मंदिर को ‘संरक्षित विरासत’ घोषित कर यहाँ शिवाजी महाराज की एक भव्य प्रतिमा स्थापित की जाए।

पुरानापुल दरवाजा केवल ईंट और पत्थर का ढांचा नहीं है, बल्कि यह मराठा शौर्य और दक्कन की संस्कृति के मिलन का बिंदु है। हालिया विवाद ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि कैसे हमारी ऐतिहासिक विरासतों को सुरक्षित रखा जाए।

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