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कर्नाटक राजनीति में बड़ा उलटफेर: हाई कोर्ट ने कांग्रेस विधायक एस.एन. सुब्बारेड्डी का निर्वाचन रद्द किया

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
2 Min Read

बेंगलुरु. कर्नाटक की राजनीति से एक बड़ी खबर सामने आई है। कर्नाटक हाई कोर्ट ने बागेपल्ली विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक एस.एन. सुब्बारेड्डी के निर्वाचन को अवैध घोषित करते हुए उनका चुनाव रद्द कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि नामांकन के दौरान हलफनामे में व्यावसायिक जानकारी छिपाना जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत एक ‘गंभीर चूक’ है।

क्या है पूरा मामला?

2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान सुब्बारेड्डी ने फॉर्म 26 (शपथपत्र) में अपनी और अपनी पत्नी की संपत्तियों का विवरण दिया था। हालांकि, उन पर आरोप लगा कि उन्होंने 5 सक्रिय GST पंजीकरण वाले व्यवसायों और कई व्यापारिक संस्थानों की जानकारी सार्वजनिक नहीं की।

जस्टिस एमजीएस कमल की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा:

“एक प्रत्याशी के लिए अपनी संपत्ति, देनदारियों और कारोबारी हितों का पूर्ण खुलासा करना अनिवार्य है। ऐसा न करना पारदर्शिता के सिद्धांत का उल्लंघन है।”

भाजपा उम्मीदवार की याचिका पर फैसला

यह कानूनी कार्रवाई भाजपा के पराजित उम्मीदवार सी. मुनिराजू द्वारा दायर याचिका पर हुई है। मुनिराजू ने दलील दी थी कि विधायक ने जानबूझकर अपने व्यापारिक हितों को छिपाया ताकि मतदाताओं को गुमराह किया जा सके।

  • कोर्ट का आदेश: अदालत ने सीट को ‘खाली’ घोषित कर दिया है।

  • भाजपा की मांग: मुनिराजू ने खुद को विजेता घोषित करने की मांग की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। अब इस सीट के भविष्य और उपचुनाव पर निर्णय निर्वाचन आयोग लेगा।

बढ़ती सख्ती: पहले भी गिली हैं ‘विजेताओं’ की विकेट

यह मामला उन नेताओं के लिए एक सख्त चेतावनी है जो शपथपत्र को मात्र एक औपचारिकता समझते हैं। इससे पहले महाराष्ट्र के किसन शंकर कठोरे का मामला नजीर बन चुका है, जिनका चुनाव भी सुप्रीम कोर्ट तक चली लंबी लड़ाई के बाद रद्द कर दिया गया था।

प्रमुख बिंदु: क्यों रद्द हुआ चुनाव?

कारणविवरण
गोपनीयता5 सक्रिय GST व्यवसायों की जानकारी छिपाई।
कानूनी आधारजन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 का उल्लंघन।
अदालती टिप्पणीसंपत्ति और देनदारी का खुलासा न करना ‘गंभीर चूक’।

 

matribhumisamachar.com/

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।