नई दिल्ली. चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व का आज चौथा दिन है। आज रविवार, 22 मार्च 2026 को देवी दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप मां कूष्माण्डा की उपासना की जा रही है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था और चारों ओर अंधकार व्याप्त था, तब मां कूष्माण्डा ने अपनी ‘मंद मुस्कान’ से ब्रह्मांड की रचना की थी। इसीलिए इन्हें आदिशक्ति और सृष्टि की जननी कहा जाता है।
📅 आज का शुभ मुहूर्त और पंचांग (22 मार्च 2026)
आज के दिन पूजा-अर्चना के लिए पंचांग के अनुसार निम्नलिखित समय विशेष शुभ हैं:
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अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:04 बजे से 12:53 बजे तक।
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चतुर्थी तिथि: आज रात 09:16 बजे तक रहेगी, इसके बाद पंचमी तिथि का आरंभ होगा।
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अमृत काल: दोपहर 02:00 बजे से 03:30 बजे तक।
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राहुकाल (वर्जित समय): शाम 05:02 बजे से 06:33 बजे तक (इस दौरान शुभ कार्य से बचें)।
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🟠 नारंगी रंग और ऊर्जा का संगम
नवरात्रि के चौथे दिन का विशेष रंग नारंगी (Orange) है।
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महत्व: यह रंग उत्साह, ऊर्जा और नई शुरुआत का प्रतीक है।
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परंपरा: भक्त आज के दिन नारंगी वस्त्र पहनकर माता की पूजा करते हैं, जो उनके भीतर सकारात्मक ऊर्जा और साहस का संचार करता है।
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🍯 मां का प्रिय भोग: मालपुआ
मां कूष्माण्डा को ‘कुम्हड़े’ (पेठा) की बलि और मालपुआ का भोग अत्यंत प्रिय है।
मान्यता: ऐसी श्रद्धा है कि आज के दिन माता को मालपुआ अर्पित करने से बुद्धि का विकास होता है और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है। पूजा के बाद इस प्रसाद को ब्राह्मणों और जरूरतमंदों में बांटने का भी विशेष महत्व है।
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🙏 मां कूष्माण्डा की पूजा विधि और शक्तिशाली मंत्र
माता की आठ भुजाएं हैं, इसलिए इन्हें अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है। इनके हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृत कलश, चक्र और गदा सुशोभित हैं।
सिद्ध मंत्र:
पूजा के दौरान इस मंत्र का जाप करना फलदायी माना जाता है:
💡 पूजा से होने वाले लाभ
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उत्तम स्वास्थ्य: माता की भक्ति से पुराने रोगों से मुक्ति मिलती है।
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यश और बल: समाज में सम्मान और मानसिक शक्ति की प्राप्ति होती है।
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ग्रह शांति: मां कूष्माण्डा सूर्य मंडल के भीतर निवास करती हैं, अतः इनकी पूजा से कुंडली में सूर्य दोष भी शांत होता है।
निष्कर्ष:
आज का दिन आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत है। श्रद्धापूर्वक मां की आराधना करने से न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि जीवन के सभी अंधकार दूर होकर प्रकाश का आगमन होता है।
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