अमरावती. आंध्र प्रदेश सरकार ने बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और डिजिटल सुरक्षा की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन करने पर गंभीरता से विचार शुरू कर दिया है। यदि यह कानून लागू होता है, तो आंध्र प्रदेश ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बन जाएगा।
1. फैसले का आधार: ऑस्ट्रेलियाई मॉडल (The Australian Connection)
आंध्र प्रदेश के आईटी मंत्री नारा लोकेश ने दावोस (World Economic Forum 2026) में स्पष्ट किया कि राज्य सरकार ऑस्ट्रेलिया के हालिया कानून का गहराई से अध्ययन कर रही है।
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ऑस्ट्रेलिया का कानून: दिसंबर 2025 में ऑस्ट्रेलिया ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए TikTok, Instagram, X (Twitter) और Facebook जैसे प्लेटफार्मों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।
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सख्ती: वहां कंपनियों पर लगभग $32 मिलियन (लगभग 270 करोड़ रुपये) तक के जुर्माने का प्रावधान है यदि वे बच्चों को अकाउंट बनाने से नहीं रोकतीं।
2. सरकार की दलील: क्यों जरूरी है यह प्रतिबंध?
सरकार ने इस विचार के पीछे तीन मुख्य तर्क दिए हैं:
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मानसिक परिपक्वता (Emotional Maturity): मंत्री नारा लोकेश के अनुसार, 16 साल से कम उम्र के बच्चे ऑनलाइन उपलब्ध ‘विषाक्त’ (Toxic) कंटेंट और नकारात्मकता को समझने के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं होते।
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साइबर सुरक्षा और दुरुपयोग: पिछली सरकारों के दौरान सोशल मीडिया पर महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हुए अपमानजनक हमलों और फेक न्यूज़ को रोकने के लिए एक “मजबूत कानूनी ढांचे” की जरूरत महसूस की गई है।
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व्यवहार संबंधी बदलाव: सरकार स्वयंसेवी संस्थाओं (NGOs) के साथ मिलकर उन मनोवैज्ञानिक पैटर्न का अध्ययन कर रही है, जो सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग से बच्चों में पैदा हो रहे हैं।
3. मंत्रियों के समूह (GoM) का गठन
इस प्रस्तावित कानून को अमलीजामा पहनाने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति बनाई गई है:
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नेतृत्व: आईटी मंत्री नारा लोकेश।
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सदस्य: गृह मंत्री वंगलापुडी अनिता और स्वास्थ्य मंत्री सत्य कुमार यादव।
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कार्य: यह समूह एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू को सौंपेगा, जिसे बाद में केंद्र सरकार के साथ भी साझा किया जाएगा।
4. क्रियान्वयन की चुनौतियाँ (Implementation Hurdles)
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कानून को लागू करना इतना आसान नहीं होगा:
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उम्र का सत्यापन (Age Verification): अधिकांश सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म केवल ‘सेल्फ-डिक्लेरेशन’ पर चलते हैं। सरकार चाहती है कि कंपनियां आधार या अन्य आधिकारिक दस्तावेजों के जरिए उम्र का सत्यापन अनिवार्य करें।
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केंद्र बनाम राज्य: चूंकि सोशल मीडिया का नियमन केंद्र सरकार (IT Act) के अधीन आता है, इसलिए आंध्र प्रदेश को इस कानून को लागू करने के लिए केंद्र से विशेष अनुमति या सहयोग की आवश्यकता होगी।
यह पहल न केवल आंध्र प्रदेश बल्कि पूरे भारत में डिजिटल पेरेंटिंग और ऑनलाइन सुरक्षा की बहस को एक नई दिशा देगी।
Matribhumisamachar


