लखनऊ. उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2026 की सुगबुगाहट अब गांवों की चौपालों से निकलकर प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर रही है। उत्तर प्रदेश में लोकतंत्र की सबसे छोटी लेकिन सबसे महत्वपूर्ण इकाई ‘पंचायत’ के चुनावों की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) ने अपनी मशीनरी को सक्रिय कर दिया है। जहाँ एक ओर प्रशासनिक अमला बूथों के पुनर्गठन और वोटर लिस्ट को अंतिम रूप देने में जुटा है, वहीं गांवों में संभावित उम्मीदवारों ने ‘राम-राम’ और मेल-मुलाकात का सिलसिला तेज कर दिया है।
1. प्रशासनिक तैयारियां: क्या है अब तक का अपडेट?
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वोटर लिस्ट का सत्यापन: वर्तमान में डुप्लीकेट मतदाताओं के सत्यापन का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। कई जिलों (जैसे महराजगंज) में लाखों की संख्या में डुप्लीकेट मतदाता मिले हैं, जिन्हें हटाया जा रहा है।
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अंतिम मतदाता सूची (Final Voter List): मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 28 मार्च 2026 को होने की उम्मीद है। ड्राफ्ट लिस्ट के अनुसार, इस बार करीब 40 लाख नए मतदाता जुड़े हैं।
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बूथों का पुनर्गठन: आयोग ने तय किया है कि अब एक पोलिंग बूथ पर अधिकतम 1200 मतदाता ही होंगे, ताकि मतदान प्रक्रिया सुचारू रूप से चले।
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परिसीमन का असर: शहरीकरण के चलते लगभग 2300 ग्राम पंचायतें आंशिक या पूर्ण रूप से नगर निकायों में शामिल हो गई हैं, जिससे पंचायतों की सीमाओं में बड़ा बदलाव आया है।
2. आरक्षण का ‘पेंच’ और राजनीतिक सुगबुगाहट
पंचायत चुनावों में सबसे बड़ा सस्पेंस आरक्षण (Reservation) को लेकर है।
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नया फॉर्मूला या पुराना? चर्चा है कि सरकार 2021 के आरक्षण चक्र को ही आधार बना सकती है क्योंकि ‘समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग’ की रिपोर्ट और जातीय जनगणना के आंकड़ों का इंतजार है।
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पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण: पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर के अनुसार, चुनाव समय पर (अप्रैल-मई-जून) कराने की कोशिश है, लेकिन आरक्षण की अंतिम सूची ही तय करेगी कि कौन सा दिग्गज मैदान में उतरेगा।
3. चुनावी खर्च और कड़े नियम
इस बार चुनाव लड़ना पहले के मुकाबले महंगा होगा। राज्य निर्वाचन आयोग ने जमानत राशि और खर्च की सीमा में इजाफा किया है:
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जिला पंचायत सदस्य: खर्च की सीमा ₹1.5 लाख से बढ़ाकर ₹5 लाख तक कर दी गई है।
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ग्राम प्रधान: जमानत राशि और नामांकन शुल्क में भी बढ़ोतरी की गई है।
4. राजनीतिक समीकरण: दिग्गजों की साख दांव पर
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सत्पत्ता पक्ष (BJP): भाजपा इन चुनावों को 2027 के विधानसभा चुनाव का ‘सेमीफाइनल’ मानकर चल रही है। संगठन के स्तर पर ‘ग्राम चौपाल’ के जरिए पैठ बनाई जा रही है।
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विपक्ष (SP & BSP): समाजवादी पार्टी ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को जमीन पर उतारने की कोशिश में है। वहीं, बसपा भी अपने कैडर को फिर से जीवित करने के लिए पंचायत स्तर पर जोर लगा रही है।
Matribhumisamachar


