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प्रयागराज: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ यौन उत्पीड़न मामले में मेडिकल रिपोर्ट ने की पुष्टि, बढ़ी मुश्किलें

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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प्रयागराज. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद के खिलाफ दर्ज यौन उत्पीड़न के मामले में पुलिस जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुँच गई है। गुरुवार को बेली अस्पताल से आई मेडिकल रिपोर्ट ने इस मामले में सनसनी फैला दी है। सूत्रों के मुताबिक, दोनों नाबालिग पीड़ितों के परीक्षण में यौन उत्पीड़न की पुष्टि हुई है।

मेडिकल जाँच और कानूनी प्रक्रिया

झूंसी पुलिस ने बुधवार को दोनों नाबालिगों को पहले सीएचसी सरायइनायत भेजा था, जहाँ से उन्हें विस्तृत जाँच के लिए बेली अस्पताल रेफर किया गया। गुरुवार को बंद लिफाफे में पुलिस को सौंपी गई रिपोर्ट अब विवेचना का मुख्य आधार बनेगी।

इससे पूर्व, पीड़ितों ने अदालत में अपने बयान दर्ज कराए थे, जिसमें उन्होंने मुकुंदानंद सहित अन्य आरोपियों द्वारा किए गए कुकृत्यों का विस्तार से विवरण दिया था।

मामले की पृष्ठभूमि

यह पूरा मामला श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट के अध्यक्ष आशुतोष ब्रह्मचारी की तहरीर पर कोर्ट के आदेश के बाद दर्ज हुआ था।

  • आरोप: महाकुंभ और माघ मेले के दौरान नाबालिगों के साथ दुष्कर्म किया गया।

  • धाराएं: पुलिस ने मुकुंदानंद, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और तीन अज्ञात के खिलाफ पॉक्सो (POCSO) एक्ट और जान से मारने की धमकी देने जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।

पुलिस की आगामी कार्रवाई

हालाँकि, पुलिस ने अभी तक इस रिपोर्ट पर कोई अधिकृत बयान (Official Statement) जारी नहीं किया है, लेकिन साक्ष्यों के संकलन और मेडिकल पुष्टि के बाद अब आरोपियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। पुलिस वैज्ञानिक साक्ष्यों को जोड़कर जल्द ही गिरफ्तारी या अगली कानूनी प्रक्रिया शुरू कर सकती है।

मुख्य बिंदु:

  • नाबालिगों के बयान कोर्ट में पहले ही दर्ज हो चुके हैं।

  • मेडिकल रिपोर्ट को विवेचना में शामिल कर लिया गया है।

  • पॉक्सो एक्ट के तहत मामले की गंभीरता बढ़ गई है।

matribhumisamachar.com/

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।