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शेख हसीना का तीखा प्रहार: मोहम्मद यूनुस को बताया ‘गद्दार’, बांग्लादेश में लोकतंत्र बहाली की अपील

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बांग्लादेश अंतरिम सरकार प्रमुख मोहम्मद यूनुस

ढाका. बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना ने शुक्रवार (23 जनवरी 2026) को अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस पर कड़ा प्रहार किया। दिल्ली के ‘फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब’ (FCC) में प्रसारित एक ऑडियो संदेश में हसीना ने यूनुस को ‘खूनी फासीवादी’, ‘गद्दार’ और ‘विदेशी ताकतों की कठपुतली’ करार दिया।

अगस्त 2024 में देश छोड़ने के बाद यह उनका सबसे आक्रामक राजनीतिक संबोधन माना जा रहा है।

प्रमुख आरोप: “बांग्लादेश अब मौत की घाटी है”

शेख हसीना ने मौजूदा बांग्लादेश की तुलना एक “विशाल जेल” और “वधशाला” से की। उन्होंने कहा:

  • लोकतंत्र निर्वासन में: हसीना के अनुसार, 5 अगस्त 2024 के बाद से बांग्लादेश में लोकतंत्र को कुचल दिया गया है और मानवाधिकारों का अस्तित्व खत्म हो गया है।

  • अराजकता का बोलबाला: उन्होंने आरोप लगाया कि यूनुस प्रशासन के तहत देश ‘मौत की घाटी’ बन गया है, जहां अल्पसंख्यकों, महिलाओं और विपक्षी नेताओं पर लगातार हमले हो रहे हैं।

  • आर्थिक बर्बादी: उन्होंने मोहम्मद यूनुस को एक ‘सूदखोर’ और ‘मनी लॉन्ड्रर’ बताते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने देश की अर्थव्यवस्था को खोखला कर दिया है।

शांति और लोकतंत्र के लिए 5 सूत्रीय फॉर्मूला

हसीना ने अपनी पार्टी ‘आवामी लीग’ की ओर से देश को संकट से निकालने के लिए पांच मुख्य मांगें रखीं:

  1. अवैध शासन की विदाई: ‘विदेशी कठपुतली’ यूनुस प्रशासन को तुरंत हटाकर लोकतंत्र बहाल किया जाए।

  2. कानून-व्यवस्था: सड़कों पर हो रही हिंसा और अराजकता को तत्काल समाप्त किया जाए।

  3. अल्पसंख्यकों की सुरक्षा: हिंदू, ईसाई और बौद्ध अल्पसंख्यकों के साथ-साथ महिलाओं की सुरक्षा की “लोहे जैसी गारंटी” दी जाए।

  4. पत्रकारों की रिहाई: राजनीतिक प्रतिशोध के तहत पत्रकारों और आवामी लीग के नेताओं पर किए जा रहे मुकदमों को बंद किया जाए।

  5. UN जांच: पिछले एक साल की घटनाओं की निष्पक्ष जांच के लिए संयुक्त राष्ट्र (UN) को आमंत्रित किया जाए।

फरवरी 2026 चुनाव पर संकट

बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को आम चुनाव होने तय हैं, लेकिन अंतरिम सरकार ने शेख हसीना की पार्टी ‘आवामी लीग’ को चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित (Ban) कर दिया है। हसीना ने इसे “नैतिक रूप से अवैध” बताते हुए कहा कि आवामी लीग के बिना होने वाला चुनाव कोई लोकतंत्र नहीं, बल्कि एक “राजतिलक” होगा जिसे दुनिया स्वीकार नहीं करेगी।

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