नई दिल्ली. हिंदू पंचांग के अनुसार, मार्च 2026 का महीना आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत पावन होने वाला है। इस महीने में भगवान विष्णु को समर्पित एकादशी और महादेव के प्रिय प्रदोष व्रत व मासिक शिवरात्रि का अद्भुत संयोग बन रहा है। विशेष रूप से उत्तर भारत और कानपुर के ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस मास में ‘सोम प्रदोष’ का दोहरा संयोग भक्तों के लिए विशेष फलदायी सिद्ध होगा।
आइए जानते हैं मार्च 2026 के प्रमुख व्रतों की विस्तृत जानकारी, शुभ मुहूर्त और उनके पौराणिक महत्व के बारे में।
🪔 एकादशी व्रत: श्री हरि विष्णु की विशेष कृपा
हिंदू धर्म में एकादशी को सभी व्रतों में श्रेष्ठ माना गया है। मार्च 2026 में दो महत्वपूर्ण एकादशी तिथियां आएंगी:
1. पापमोचनी एकादशी (15 मार्च 2026, रविवार)
चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को ‘पापमोचनी एकादशी’ कहा जाता है। जैसा कि नाम से स्पष्ट है, यह व्रत अनजाने में किए गए पापों के शमन और मानसिक शुद्धि के लिए किया जाता है।
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महत्व: पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस व्रत के प्रभाव से ब्रह्महत्या जैसे घोर पापों से भी मुक्ति मिल सकती है।
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पूजा विधि: इस दिन भगवान विष्णु के ‘चतुर्भुज’ रूप की पूजा की जाती है। पीले वस्त्र धारण करना और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना अत्यंत शुभ होता है।
2. कामदा एकादशी (29 मार्च 2026, रविवार)
चैत्र शुक्ल पक्ष की एकादशी को ‘कामदा एकादशी’ के रूप में मनाया जाता है। यह हिंदू नववर्ष की पहली एकादशी भी होती है।
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महत्व: ‘कामदा’ का अर्थ है इच्छाओं को पूरा करने वाली। मान्यता है कि यह व्रत वैवाहिक जीवन के कष्टों को दूर कर सुख-समृद्धि प्रदान करता है।
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विशेष: इस दिन भगवान कृष्ण या वासुदेव रूप की पूजा का विधान है।
🔱 प्रदोष व्रत 2026: शिव साधना का महापर्व
प्रदोष व्रत भगवान शिव को प्रसन्न करने का सबसे उत्तम मार्ग माना जाता है। मार्च 2026 में तीन प्रदोष व्रत का संयोग है, जिनमें से दो ‘सोम प्रदोष’ हैं।
| प्रदोष का प्रकार | तिथि | दिन | धार्मिक महत्व |
| रवि प्रदोष | 1 मार्च 2026 | रविवार | आरोग्य और यश की प्राप्ति के लिए। |
| सोम प्रदोष | 16 मार्च 2026 | सोमवार | मानसिक शांति और चंद्र दोष निवारण हेतु। |
| सोम प्रदोष | 30 मार्च 2026 | सोमवार | मनोकामना पूर्ति और ऋण मुक्ति के लिए। |
विशेष नोट: शास्त्र कहते हैं कि सोमवार के दिन जब त्रयोदशी तिथि (प्रदोष) पड़ती है, तो वह शिव और शक्ति के मिलन का विशेष समय होता है। कानपुर के बाबा आनंदेश्वर मंदिर (परमट) और बाबा सिद्धनाथ मंदिर में इन तिथियों पर विशेष अभिषेक का आयोजन होता है।
🌙 मासिक शिवरात्रि (17 मार्च 2026, मंगलवार)
महाशिवरात्रि के ठीक एक महीने बाद चैत्र मास की मासिक शिवरात्रि मनाई जाएगी।
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तिथि: 17 मार्च 2026 (चैत्र कृष्ण चतुर्दशी)।
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महत्व: हालांकि महाशिवरात्रि 15 फरवरी 2026 को मनाई जा चुकी है, लेकिन मासिक शिवरात्रि का अपना विशेष महत्व है। इस दिन मध्यरात्रि (निशिता काल) में शिव पूजन करने से शत्रुओं पर विजय और कार्यों में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।
📅 मार्च 2026 व्रत तालिका (At a Glance)
| दिनांक | व्रत/त्योहार | पक्ष/तिथि |
| 01 मार्च | रवि प्रदोष व्रत | फाल्गुन शुक्ल त्रयोदशी |
| 15 मार्च | पापमोचनी एकादशी | चैत्र कृष्ण एकादशी |
| 16 मार्च | सोम प्रदोष व्रत | चैत्र कृष्ण त्रयोदशी |
| 17 मार्च | मासिक शिवरात्रि | चैत्र कृष्ण चतुर्दशी |
| 29 मार्च | कामदा एकादशी | चैत्र शुक्ल एकादशी |
| 30 मार्च | सोम प्रदोष व्रत | चैत्र शुक्ल त्रयोदशी |
📝 श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश
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पारण का समय: एकादशी व्रत का पूर्ण लाभ तभी मिलता है जब उसका पारण (व्रत खोलना) अगले दिन सूर्योदय के बाद और हरि वासर समाप्त होने पर किया जाए।
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पूजा सामग्री: भगवान विष्णु को तुलसी दल अवश्य अर्पित करें, लेकिन ध्यान रहे कि रविवार और एकादशी के दिन तुलसी नहीं तोड़ी जाती, अतः इसे एक दिन पूर्व ही तोड़कर रख लें।
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शिव पूजा: प्रदोष काल (सूर्यास्त के समय) में शिव चालीसा और ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप विशेष लाभकारी रहता है।
🚩 कानपुर के चार स्तंभ: मार्च 2026 के ‘प्रदोष’ पर उमड़ेगा आस्था का सैलाब
मार्च 2026 का महीना कानपुर के शिव भक्तों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं होने वाला है। इस माह पड़ने वाले दो ‘सोम प्रदोष’ और ‘मासिक शिवरात्रि’ के पावन अवसर पर शहर के चार पौराणिक मंदिरों—आनंदेश्वर, सिद्धनाथ, वनखंडेश्वर और जागेश्वर—में विशेष सुरक्षा और पूजन की व्यवस्था की जा रही है। ये सभी स्वयंभू शिवलिंग हैं।आइए जानते हैं इन मंदिरों की महिमा:
🔱 1. बाबा आनंदेश्वर मंदिर (परमट): कानपुर के अधिपति
गंगा के तट पर स्थित बाबा आनंदेश्वर मंदिर को कानपुर का ‘काशी’ माना जाता है।
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पौराणिक महत्व: कहा जाता है कि महाभारत काल में ‘दानवीर कर्ण’ यहाँ पूजन करने आते थे। मंदिर का नाम ‘आनंदी’ नामक गाय के नाम पर पड़ा, जो स्वयं शिवलिंग का दुग्धाभिषेक करती थी।
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मार्च 2026 विशेष: सोम प्रदोष (16 और 30 मार्च) पर यहाँ गंगा जल से महा-अभिषेक होगा। भक्तों के लिए यहाँ की ‘भस्म आरती’ आकर्षण का मुख्य केंद्र रहेगी।
🕉️ 2. बाबा सिद्धनाथ मंदिर (जाजमऊ): द्वितीय काशी की संज्ञा
जाजमऊ के टीले पर स्थित सिद्धनाथ मंदिर अपनी प्राचीनता और भव्यता के लिए प्रसिद्ध है।
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पौराणिक महत्व: इसे ‘दूसरी काशी’ कहा जाता है। मान्यता है कि राजा ययाति ने यहाँ 100 यज्ञ करने का संकल्प लिया था। इस मंदिर का शिवलिंग अत्यंत प्राचीन और सिद्ध माना जाता है।
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मार्च 2026 विशेष: मासिक शिवरात्रि (17 मार्च) पर यहाँ ‘निशिता काल’ पूजा का विशेष आयोजन होगा, जिसमें शत्रुओं के दमन और कार्य सिद्धि के लिए अनुष्ठान किए जाएंगे।
🌿 3. बाबा वनखंडेश्वर मंदिर (मंधना): वन से प्रकट हुए महादेव
शहर के मंधना क्षेत्र में स्थित वनखंडेश्वर मंदिर भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करने के लिए विख्यात है।
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पौराणिक महत्व: माना जाता है कि सैकड़ों वर्ष पूर्व यहाँ घना जंगल था और खुदाई के दौरान यह शिवलिंग प्राप्त हुआ था। बाबा वनखंडेश्वर को आनंदेश्वर बाबा का ‘भाई’ भी कहा जाता है।
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मार्च 2026 विशेष: रविवार को पड़ने वाले ‘रवि प्रदोष’ (1 मार्च) पर यहाँ विशेष श्रृंगार किया जाएगा, जो आरोग्य और यश की प्राप्ति के लिए उत्तम माना जाता है।
✨ 4. बाबा जागेश्वर मंदिर (नवाबगंज): मानसिक शांति का धाम
नवाबगंज स्थित जागेश्वर मंदिर अपनी शांतिपूर्ण ऊर्जा और अद्भुत वास्तुशिल्प के लिए जाना जाता है।
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पौराणिक महत्व: जागेश्वर महादेव को ‘जागृत देवता’ माना जाता है। यहाँ का शिवलिंग भक्तों के कष्टों को हरने वाला और मानसिक शांति प्रदान करने वाला है।
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मार्च 2026 विशेष: सोम प्रदोष के दिन यहाँ ‘रुद्राभिषेक’ का सामूहिक आयोजन होगा, जिसमें चंद्र दोष निवारण हेतु विशेष आहुतियां दी जाएंगी।
🕒 कानपुर के प्रमुख मंदिरों की दर्शन एवं आरती समय-सारणी
| मंदिर का नाम | खुलने का समय (प्रातः) | मंगल आरती (प्रातः) | संध्या/भस्म आरती | शयन आरती (रात्रि) |
| बाबा आनंदेश्वर (परमट) | 4:00 AM | 5:00 AM | 7:00 PM (महाआरती) | 11:00 PM |
| बाबा सिद्धनाथ (जाजमऊ) | 5:00 AM | 6:00 AM | 7:30 PM | 10:30 PM |
| बाबा वनखंडेश्वर (मंधना) | 5:30 AM | 6:30 AM | 7:00 PM | 10:00 PM |
| बाबा जागेश्वर (नवाबगंज) | 5:00 AM | 6:00 AM | 7:15 PM | 10:00 PM |
💡 श्रद्धालुओं के लिए विशेष सुझाव (Pro-Tips)
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गंगा जल: यदि आप आनंदेश्वर या सिद्धनाथ मंदिर जा रहे हैं, तो सीधे गंगा तट से जल भरकर अभिषेक करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।
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विशेष पूजा: सोम प्रदोष के दिन रुद्राभिषेक के लिए मंदिर कार्यालय में एक दिन पूर्व ही बुकिंग कराना उचित रहता है, क्योंकि भीड़ अधिक होती है।
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सावधानी: मोबाइल और कीमती सामान का ध्यान रखें, क्योंकि प्रमुख तिथियों पर इन मंदिरों में हजारों की संख्या में भक्त उमड़ते हैं।
अस्वीकरण (Disclaimer)
इस लेख में दी गई तिथियां, व्रत और मुहूर्त की जानकारी प्रचलित हिंदू पंचांग और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। गणना के अनुसार समय और तिथियों में स्थान (जैसे कानपुर या अन्य शहर) के आधार पर आंशिक भिन्नता हो सकती है। किसी भी व्रत या अनुष्ठान को शुरू करने से पहले अपने स्थानीय पुरोहित या ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें।
कानपुर स्थानीय समाचार: matribhumisamachar.com/category/uttar-pradesh/kanpur/
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