कानपुर. उत्तर प्रदेश के शैक्षिक परिदृश्य में एक क्रांतिकारी बदलाव की शुरुआत हो रही है। छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU), कानपुर अब अपनी परीक्षा और मूल्यांकन प्रणाली को पूरी तरह से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लैस करने जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए विश्वविद्यालय ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर के साथ हाथ मिलाया है।
शनिवार को कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक की अध्यक्षता में हुई परीक्षा समिति की बैठक में इस डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन पर मुहर लगा दी गई। CSJMU उत्तर प्रदेश का पहला ऐसा राज्य विश्वविद्यालय बनने जा रहा है, जो प्रश्न-पत्र बनाने से लेकर कॉपियों के मूल्यांकन तक में एआई मॉडल का व्यापक उपयोग करेगा।
IIT कानपुर तैयार करेगा हाई-टेक रोडमैप
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, IIT कानपुर इस पूरी प्रक्रिया के लिए एक विस्तृत प्लान और तकनीकी ढांचा तैयार करेगा। इसका उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और समयबद्ध बनाना है। एआई के समावेश से मानवीय त्रुटियों की संभावना लगभग शून्य हो जाएगी और परिणाम घोषित करने में लगने वाले समय में भी भारी कमी आएगी।
परीक्षा प्रणाली में होने वाले 5 बड़े बदलाव
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AI आधारित प्रश्न-पत्र निर्माण: ‘Chat-GPT’ जैसी एडवांस तकनीक की मदद से प्रश्न-पत्रों का एक हिस्सा तैयार किया जाएगा। इससे प्रश्न-पत्रों की गुणवत्ता सुधरेगी और डेटा लीक होने का खतरा न्यूनतम होगा।
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ई-सर्विलांस और कंट्रोल रूम: परीक्षा केंद्रों पर निगरानी के लिए एआई-युक्त ई-सर्विलांस सिस्टम बनेगा। विश्वविद्यालय परिसर में एक हाई-टेक कंट्रोल रूम स्थापित किया जाएगा, जहाँ से हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी।
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स्मार्ट मूल्यांकन (Evaluation): एमसीक्यू (MCQ) परीक्षाओं के सटीक मूल्यांकन के साथ-साथ, अब लिखित उत्तर पुस्तिकाओं की जांच में भी एआई विश्लेषणात्मक सहायता प्रदान करेगा।
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बायोमेट्रिक और डेटा मिलान: प्रवेश के समय ही छात्रों के फिंगर प्रिंट, फोटो और अन्य जानकारी का डेटाबेस तैयार किया जाएगा। परीक्षा केंद्र पर एआई के जरिए वास्तविक समय में इस डेटा का मिलान होगा ताकि “मुन्ना भाइयों” (फर्जी परीक्षार्थियों) पर लगाम कसी जा सके।
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एआई फॉर ऑल (AI for All): विश्वविद्यालय ने पहले ही वोकेशनल कोर्स के तहत ‘AI for All’ पाठ्यक्रम को अनिवार्य कर दिया है। अब इसे परीक्षा प्रशासन का भी अटूट हिस्सा बनाया जा रहा है।
कुलपति का विजन: “पारदर्शिता और शुद्धता पहली प्राथमिकता”
कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने बैठक में कहा:
“हम परीक्षा से जुड़ी हर प्रक्रिया को एआई से जोड़ने जा रहे हैं। इससे किसी को यह पता नहीं चल पाएगा कि पेपर कौन बना रहा है और मूल्यांकन की प्रक्रिया भी पूरी तरह फेसलेस होगी। परिणाम अधिक त्रुटिरहित और शीघ्र घोषित किए जाएंगे, जिससे शिक्षकों और परीक्षा अनुभाग का कार्यभार कम होगा।”
छात्रों को क्या होगा लाभ?
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समय पर परिणाम: एआई के उपयोग से कॉपियों की जांच तेज होगी, जिससे सत्र समय पर पूरा हो सकेगा।
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निष्पक्षता: मूल्यांकन में किसी भी प्रकार के भेदभाव या मानवीय गलती की गुंजाइश नहीं रहेगी।
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डिजिटल सुविधाएं: अंकपत्र (Marksheet), डिग्री सत्यापन और डुप्लीकेट मार्कशीट जैसी सुविधाएं पहले से ही ऑनलाइन हैं, जिन्हें एआई मॉड्यूल से और भी सुदृढ़ किया जाएगा।
कानपुर विश्वविद्यालय की यह पहल न केवल शिक्षा के स्तर को ऊँचा उठाएगी, बल्कि अन्य राज्य विश्वविद्यालयों के लिए एक ‘डिजिटल बेंचमार्क’ भी स्थापित करेगी। IIT कानपुर की तकनीकी विशेषज्ञता और CSJMU का प्रशासनिक अनुभव मिलकर छात्रों के भविष्य को अधिक सुरक्षित और आधुनिक बनाएंगे।
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