लखनऊ, 23 मार्च 2026। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के दौरान एक हैरान करने वाला ट्रेंड सामने आ रहा है। कानपुर सहित प्रदेश के कई जिलों—फिरोजाबाद, इटावा, मैनपुरी और आगरा—में परीक्षार्थी कॉपियों में भावनात्मक संदेश लिखकर परीक्षकों से पास करने की गुहार लगा रहे हैं।
कानपुर में भी सामने आए ऐसे मामले
कानपुर के विभिन्न मूल्यांकन केंद्रों पर जांच के दौरान कई उत्तर पुस्तिकाओं में छात्रों ने “पास कर दीजिए”, “अगली बार मेहनत करेंगे”, “घर की स्थिति ठीक नहीं है” जैसे संदेश लिखे हैं। कुछ कॉपियों में छात्रों ने अपनी पारिवारिक समस्याएं और आर्थिक तंगी का हवाला देते हुए सहानुभूति मांगी है।
फिरोजाबाद की कॉपी में शादी का जिक्र
फिरोजाबाद में हाईस्कूल गणित की एक कॉपी में छात्रा ने लिखा—“गुरुजी पास कर देना, फेल हो गई तो शादी नहीं हो पाएगी।” ऐसे भावुक संदेशों ने परीक्षकों को भी चौंका दिया है।
अन्य जिलों में भी यही हाल
इटावा और मैनपुरी में भी परीक्षकों को ऐसी कॉपियां मिल रही हैं, जिनमें छात्र-छात्राएं पास होने के लिए अलग-अलग तरह की अपील कर रहे हैं। आगरा में एक परीक्षक के अनुसार, कुछ छात्रों ने कॉपी में “भगवान के लिए पास कर दीजिए” तक लिख दिया।
हर दिन मिल रही हैं दर्जनों ऐसी कॉपियां
परीक्षकों का कहना है कि लगभग हर दिन कई उत्तर पुस्तिकाओं में इस तरह की अपीलें देखने को मिल रही हैं। हालांकि, मूल्यांकन प्रक्रिया पूरी तरह निर्धारित मानकों के अनुसार ही की जा रही है और इन अपीलों का अंक देने पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
सुरक्षा और निगरानी कड़ी
प्रदेशभर के मूल्यांकन केंद्रों पर पुलिस बल तैनात है। स्टेटिक मजिस्ट्रेटों की निगरानी में कॉपियों की जांच हो रही है। केंद्रों पर प्रवेश से पहले सख्त तलाशी और पहचान पत्र की जांच की जा रही है।
विशेषज्ञों की राय
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह ट्रेंड छात्रों में बढ़ते परीक्षा तनाव और असफलता के डर को दर्शाता है। कई छात्र अपनी मेहनत की कमी को भावनात्मक अपील से पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं।
नियमों से नहीं होगा समझौता
शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने साफ किया है कि मूल्यांकन केवल उत्तरों की गुणवत्ता के आधार पर ही किया जाएगा। भावनात्मक संदेशों के बावजूद नियमों से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
👉 कुल मिलाकर, यूपी बोर्ड मूल्यांकन के दौरान सामने आ रही ये घटनाएं न सिर्फ शिक्षा व्यवस्था की एक सच्चाई उजागर करती हैं, बल्कि छात्रों के मानसिक दबाव और सामाजिक अपेक्षाओं की ओर भी इशारा करती हैं।
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