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अयोध्या राम मंदिर दर्शन: बिना पास सभी पूरक और सप्तर्षि मंदिरों में प्रवेश की बड़ी राहत

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अयोध्या । शनिवार, 23 मई 2026

अयोध्या में प्रभु श्री रामलला के दरबार में हाजिरी लगाने वाले रामभक्तों के लिए इन दिनों एक बेहद सुखद और राहत भरी खबर सामने आई है। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर परिसर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए दर्शन व्यवस्था को बेहद सरल कर दिया है। वर्तमान में भक्तों को परिसर स्थित सभी पूरक और सप्तर्षि मंदिरों में दर्शन के लिए किसी भी तरह के विशेष पास की जरूरत नहीं पड़ रही है।

अगर आप भी इस समय अयोध्या यात्रा का मन बना रहे हैं, तो यह आपके लिए एक बेहतरीन मौका साबित हो सकता है, जहाँ आप बिना किसी कागजी या ऑनलाइन औपचारिकता के पूरे परिसर के दर्शन कर सकते हैं।

गर्मी के मौसम में श्रद्धालुओं को मिला अनूठा उपहार

आमतौर पर राम मंदिर परिसर में बने विभिन्न विशेष मंदिरों (जैसे शेषावतार मंदिर, कुबेर टीला और सप्तर्षि मंदिर) में प्रवेश के लिए अलग-अलग श्रेणियों के पास की आवश्यकता होती थी। लेकिन मई के इस महीने में भीषण गर्मी के कारण दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में थोड़ी कमी देखी जा रही है।

श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल कुमार मिश्र ने बताया:

“इस समय गर्मी के प्रभाव के कारण अधिकांश दिनों में दर्शनार्थियों की संख्या एक लाख से नीचे (लगभग 75 से 85 हजार के बीच) रह रही है। भीड़ नियंत्रण में होने के कारण ट्रस्ट ने प्रायोगिक तौर पर यह ‘ओपन एंट्री’ यानी बिना पास दर्शन की व्यवस्था शुरू की है, ताकि हर आम श्रद्धालु सुगमता से सभी 18 पूरक और सप्तर्षि मंदिरों का दीदार कर सके।”

व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए अलग मार्ग

भले ही पास की अनिवार्यता को अस्थाई रूप से हटा दिया गया है, लेकिन मंदिर प्रशासन सुरक्षा और कतार प्रबंधन को लेकर पूरी तरह मुस्तैद है। परिसर में भीड़ न जुटे और निकासी व्यवस्था सुचारु रहे, इसके लिए पासधारक (जिन्होंने पहले से सुगम या विशिष्ट पास बुक कराए हैं) और बिना पास वाले सामान्य श्रद्धालुओं के लिए प्रवेश (Entry) तथा निकासी (Exit) के अलग-अलग मार्ग तय किए गए हैं।

सावधान! यह छूट स्थायी नहीं है

यदि आप इस छूट का लाभ उठाना चाहते हैं, तो आपको अपनी यात्रा जल्द प्लान करनी चाहिए। ट्रस्ट ने साफ संकेत दिए हैं कि यह ढील केवल कम भीड़ रहने तक ही सीमित है। जैसे ही मौसम में सुधार होगा या त्योहारों के चलते श्रद्धालुओं का आंकड़ा प्रतिदिन एक लाख या उससे पार जाने लगेगा, वैसे ही पुरानी पास व्यवस्था को दोबारा सख्ती से लागू कर दिया जाएगा।

पुरानी व्यवस्था के नियम क्या थे?

  • सुगम, विशिष्ट और नित्य पासधारक: इन्हें रामलला, राम परिवार और परकोटे के भीतर स्थित छह प्रमुख मंदिरों में दर्शन मिलते थे।

  • सामान्य पासधारक/बिना पास वाले: इन्हें केवल राम परिवार के साथ शेषावतार मंदिर, सप्तर्षि मंदिर और कुबेर टीला के सीमित क्षेत्रों में ही जाने की अनुमति मिलती थी।

सप्तर्षि मंदिरों की दूरी बनी थकावट की वजह

डॉ. मिश्र ने एक व्यावहारिक बात भी साझा की। उन्होंने बताया कि इस खुली छूट के बावजूद सप्तर्षि मंदिरों की तरफ जाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या अपेक्षाकृत कम है। इसका मुख्य कारण यह है कि राम मंदिर के मुख्य परकोटे (विशाल बाहरी गलियारा) का लंबा भ्रमण करने के बाद अधिकांश श्रद्धालु, खासकर बुजुर्ग और बच्चे, काफी थक जाते हैं। चूंकि सप्तर्षि मंदिर मुख्य परिसर से थोड़ी अधिक दूरी पर स्थित हैं, इसलिए थकावट के कारण लोग वहां तक जाने से बच रहे हैं।

वर्तमान व्यवस्था के अनुसार, यदि कोई श्रद्धालु पूरे परिसर के सभी पूरक और मुख्य मंदिरों का चक्कर लगाता है, तो उसे लगभग डेढ़ से दो घंटे का समय लग रहा है। इसलिए सलाह दी जाती है कि दर्शन के लिए निकलते समय अपने साथ पानी की बोतल अवश्य रखें और आराम से दर्शन करें।

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