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अयोध्या राम मंदिर दान गबन मामला: क्या सच में हुई चढ़ावे में हेराफेरी? ट्रस्ट ने सीएम योगी से की SIT जांच की मांग

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अयोध्या । शनिवार, 13 जून 2026

अयोध्या में प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा के बाद से ही देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु लगातार रामलला के दरबार में हाजिरी लगा रहे हैं। आस्था के इस सैलाब के साथ ही मंदिर में रोजाना करोड़ों रुपये का नकद, सोना-चांदी और अन्य कीमती आभूषण दान स्वरूप चढ़ाए जा रहे हैं। लेकिन पिछले कुछ दिनों से अयोध्या राम मंदिर दान गबन मामला लगातार देश भर की सुर्खियों में बना हुआ है, जिसने राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।

शुरुआत में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी से इनकार करने वाले श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अब इस मामले में बड़ा यू-टर्न लिया है। राम भक्तों के संशय को दूर करने और दूध का दूध, पानी का पानी करने के लिए ट्रस्ट ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस पूरे प्रकरण की एक विशेष जांच दल (SIT) गठित कर निष्पक्ष जांच कराने का लिखित अनुरोध किया है।

क्या है पूरा मामला और किसने लगाए आरोप?

इस पूरे विवाद के केंद्र में मंदिर के ही पूर्व मुख्य लेखा प्रभारी (Former Chief Accounts Officer) महिपाल सिंह हैं। उनके द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद ही यह पूरा मामला मीडिया और सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया। व्हिसलब्लोअर (Whistleblower) के रूप में सामने आए महिपाल सिंह के मुख्य आरोप निम्नलिखित हैं:

  1. नकद चढ़ावे की गिनती में हेरफेर: आरोप है कि मंदिर के दान पात्रों से निकलने वाली नकदी की गिनती के दौरान बड़ी रकम इधर-उधर की जा रही थी। उन्होंने दावा किया कि एक बार उन्होंने खुद करीब 5 लाख रुपये की नकद चोरी पकड़ी थी, लेकिन जब इसकी शिकायत वरिष्ठ पदाधिकारियों से की गई, तो कार्रवाई करने के बजाय उन्हें ही पद से हटा दिया गया।

  2. CCTV फुटेज डिलीट करने का दावा: सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि कैश काउंटिंग रूम के कई महीनों के महत्वपूर्ण सीसीटीवी (CCTV) फुटेज को जानबूझकर डिलीट या नष्ट कर दिया गया है ताकि वित्तीय अनियमितताओं के सबूतों को मिटाया जा सके।

  3. डिजिटल रिकॉर्ड का अभाव: श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले सोने, चांदी और अन्य कीमती आभूषणों का कोई सुदृढ़ डिजिटल या पारदर्शी इन्वेंट्री रिकॉर्ड नहीं रखा जा रहा था, जिससे हेराफेरी की गुंजाइश बनी।

मामले पर गरमाई राजनीति और संत समाज का रुख

जैसे ही यह कथित घोटाला सामने आया, विपक्षी दलों ने सरकार और मंदिर प्रबंधन को घेरना शुरू कर दिया। समाजवादी पार्टी (SP) के अध्यक्ष अखिलेश यादव और आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद संजय सिंह ने इस मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाया। विपक्ष का दावा है कि यह विसंगति करीब ₹5 करोड़ से ₹7.5 करोड़ के बीच की हो सकती है। उन्होंने माननीय न्यायालय से इस पर स्वतः संज्ञान (Suo Motu Cognisance) लेने की मांग की है।

केवल विपक्ष ही नहीं, बल्कि संत समाज और भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं के स्तर पर भी इस मामले को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए। अयोध्या के स्थानीय भाजपा नेताओं और कुछ संतों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस मामले की CBI, ED या CAG (नियंत्रक-महालेखापरीक्षक) से जांच कराने और अब तक प्राप्त हुए दान का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की थी।

ट्रस्ट की शुरुआती सफाई और अब संभावित सुधार

शुरुआती दिनों में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और अन्य पदाधिकारियों ने इन सभी खबरों को सिरे से खारिज करते हुए इसे “मंदिर की छवि धूमिल करने का कुप्रचार” बताया था। ट्रस्ट का कहना है कि दान संग्रह, उसकी गिनती और बैंक में जमा करने की पूरी प्रक्रिया कंप्यूटरीकृत है और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के वरिष्ठ अधिकारियों की देखरेख में इसका नियमित ऑडिट किया जाता है।

हालांकि, खुफिया एजेंसियों के इनपुट और आंतरिक जांच में कैश काउंटिंग में तैनात कुछ कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई, जिसके बाद ट्रस्ट ने अपनी रणनीति बदली।

अब आगे क्या होगा?

  • SIT का गठन: ट्रस्ट के अनुरोध के बाद अब उत्तर प्रदेश सरकार के स्तर पर जल्द ही एक उच्च स्तरीय एसआईटी (SIT) का गठन किया जा सकता है, जो सुरक्षा तंत्र में चूक और सीसीटीवी फुटेज डिलीट होने के दावों की गहनता से पड़ताल करेगी।

  • तकनीकी और प्रक्रियात्मक सुधार: इस विवाद के बाद मंदिर प्रशासन चढ़ावे की गिनती की प्रक्रिया को पूरी तरह से पारदर्शी बनाने के लिए ‘हाई-टेक’ डिजिटल तकनीक अपनाने पर विचार कर रहा है, ताकि भविष्य में कोई भी उंगली न उठा सके।

करोड़ों राम भक्तों की अटूट आस्था को देखते हुए इस मामले का जल्द से जल्द निष्पक्ष समाधान होना बेहद जरूरी है, ताकि मंदिर प्रबंधन की शुचिता और पारदर्शिता पर कोई आंच न आए।

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