लखनऊ. नोएडा के सेक्टर-150 में जलमग्न गड्ढे में गिरकर सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में न्याय की घड़ी करीब आ गई है। एडीजी (मेरठ जोन) भानु भास्कर के नेतृत्व वाली SIT ने अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार कर ली है, जिसे आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपा जाना है। सूत्रों के मुताबिक, यह रिपोर्ट नोएडा अथॉरिटी और पुलिस प्रशासन की गंभीर लापरवाहियों का ‘कच्चा चिट्ठा’ है।
जांच में हुए चौंकाने वाले खुलासे
SIT की 5 दिनों की गहन जांच में कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं जो व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हैं:
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90 मिनट का संघर्ष और प्रशासनिक सुस्ती: युवराज कार की छत पर खड़े होकर करीब 90 मिनट तक मदद के लिए पुकारते रहे, लेकिन मौके पर मौजूद पुलिस और बचाव दल के पास न तो गोताखोर थे और न ही जरूरी उपकरण।
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असुरक्षित साइट: जिस 30-70 फीट गहरे गड्ढे में कार गिरी, वहां न तो बैरिकेडिंग थी, न रिफ्लेक्टर और न ही कोई चेतावनी बोर्ड। यह गड्ढा 2021-22 से खुला पड़ा था।
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समन्वय की कमी: कंट्रोल रूम, फील्ड स्टाफ और फायर ब्रिगेड के बीच तालमेल की भारी कमी पाई गई।
किन पर गिरेगी गाज?
SIT की रिपोर्ट के आधार पर शासन स्तर पर बड़ी कार्रवाई की संभावना है:
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नोएडा अथॉरिटी के अधिकारी: उन अधिकारियों की पहचान कर ली गई है जिन्होंने बार-बार शिकायतों के बावजूद साइट को सुरक्षित नहीं करवाया। तत्कालीन CEO लोकेश एम. को पहले ही हटाया जा चुका है, अब अन्य वरिष्ठ अधिकारियों पर कार्रवाई तय है।
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पुलिस प्रशासन: मौके पर मौजूद उन पुलिसकर्मियों पर गाज गिर सकती है जिन्होंने सक्रिय रूप से बचाव कार्य करने के बजाय इंतजार करना बेहतर समझा।
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बिल्डर माफिया: लोटस ग्रीन्स और विशटाउन के निदेशकों सहित अब तक 3-4 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। रिपोर्ट में इनके खिलाफ ‘गैर-इरादतन हत्या’ (धारा 105) के तहत कड़ी धाराओं में मुकदमा चलाने की संस्तुति है।
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