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ईरान संकट: अमेरिका का ‘ऑपरेशन आर्माडा’ और तेल टैंकरों पर नए प्रतिबंध, अरब सागर में युद्ध की आहट?

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अरब सागर की ओर बढ़ता हुआ अमेरिकी विमानवाहक युद्धपोत 'USS अब्राहम लिंकन'।

वॉशिंगटन. मध्य पूर्व (Middle East) में युद्ध के बादल एक बार फिर गहरे हो गए हैं। शुक्रवार, 23 जनवरी 2026 को अमेरिका ने ईरान के ‘शैडो फ्लीट’ (Shadow Fleet) यानी अवैध तेल नेटवर्क पर अब तक का सबसे बड़ा प्रहार किया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे एक “आर्माडा” (विशाल बेड़ा) की तैनाती बताते हुए ईरान को सख्त चेतावनी दी है।

1. तेल टैंकरों पर ‘आर्थिक सर्जिकल स्ट्राइक’

अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने ईरान के तेल निर्यात को पूरी तरह ठप करने के लिए 9 तेल टैंकरों और उनसे जुड़ी 8 कंपनियों पर नए कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं।

  • कारण: अमेरिका का आरोप है कि ईरान इन टैंकरों के जरिए करोड़ों डॉलर का तेल बेचकर उस पैसे का इस्तेमाल अपने देश में प्रदर्शनकारियों के दमन और क्षेत्रीय आतंकी समूहों की फंडिंग के लिए कर रहा है।

  • भारत पर असर: इन प्रतिबंधित कंपनियों में भारत, ओमान और यूएई स्थित कुछ संस्थाएं भी शामिल हैं, जिन पर ईरानी पेट्रोलियम उत्पादों की हेराफेरी का आरोप है।

2. अरब सागर में अमेरिकी ‘आर्माडा’ की दस्तक

हिंद महासागर और अरब सागर में सामरिक हलचल तेज हो गई है:

  • USS अब्राहम लिंकन: अमेरिका का विशाल विमानवाहक पोत (Aircraft Carrier) अपने स्ट्राइक ग्रुप के साथ मलक्का जलडमरूमध्य को पार कर अरब सागर की ओर बढ़ रहा है। यह पोत “डार्क मोड” (ट्रांसपोंडर बंद) में चल रहा है, जो किसी बड़े सैन्य ऑपरेशन का संकेत हो सकता है।

  • मिसाइल डिफेंस: अमेरिका ने कतर, जॉर्डन और इजरायल में अतिरिक्त THAAD और पैट्रियट मिसाइल बैटरियां तैनात कर दी हैं ताकि ईरान के संभावित मिसाइल हमले को रोका जा सके।

3. वैश्विक तेल बाजार और भारत की चिंता

अरब सागर में तनाव बढ़ने से वैश्विक तेल कीमतों में 1.2% तक का उछाल देखा गया है।

  • यदि ईरान ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को बंद करने की कोशिश करता है, तो दुनिया की 20% तेल आपूर्ति ठप हो सकती है।

  • भारत के लिए यह दोहरा संकट है: पहला, तेल की बढ़ती कीमतें और दूसरा, अरब सागर में हमारे व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा।

 

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