नई दिल्ली. भारत सरकार द्वारा विदेशों में छिपे भगोड़ों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में एक बड़ी सफलता मिली है। केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय की वर्ष 2024-25 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, जांच एजेंसियों ने एक दशक में सबसे अधिक भगोड़ों का पता लगाने में कामयाबी हासिल की है।
1. प्रमुख आंकड़े और सफलता (Key Statistics)
भारत सरकार की सक्रिय ‘स्मार्ट डिप्लोमेसी’ और सीबीआई (CBI) के ग्लोबल ऑपरेशन सेंटर के समन्वय से पिछले एक वर्ष में अभूतपूर्व नतीजे सामने आए हैं:
-
लोकेटेड भगोड़े: 2024-25 के दौरान विदेशों में 71 भारतीय भगोड़ों का सटीक स्थान (Location) पता लगा लिया गया है। यह संख्या पिछले 12 वर्षों में सबसे अधिक है।
-
वापसी: पिछले वित्तीय वर्ष में 27 भगोड़ों/वांछित व्यक्तियों को सफलतापूर्वक भारत वापस लाया गया है।
-
विदेशी भगोड़े: इसी अवधि के दौरान, भारत में अन्य देशों द्वारा वांछित 203 भगोड़ों का भी पता लगाया गया, जो अंतरराष्ट्रीय पुलिस सहयोग को दर्शाता है।
2. ‘लेटर रोगेटरी’ और कानूनी कार्रवाई
भगोड़ों को वापस लाने की प्रक्रिया को कानूनी रूप से मजबूत करने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं:
-
74 लेटर रोगेटरी (LRs): अप्रैल 2024 से मार्च 2025 के बीच विदेशों में 74 न्यायिक अनुरोध पत्र भेजे गए हैं। इसमें से 54 सीबीआई और 20 राज्य पुलिस से संबंधित थे।
-
लंबित मामले: 31 मार्च 2025 तक, विभिन्न देशों के पास भारत के 533 कानूनी नोटिस लंबित थे। इनमें से 276 मामले सीधे सीबीआई से जुड़े हैं।
3. ‘निर्मम दृष्टिकोण’ (Ruthless Approach) की नीति
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में सीबीआई के एक सम्मेलन में स्पष्ट किया कि मोदी सरकार भ्रष्टाचार और अपराध के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है।
-
संपत्ति की जब्ती: ‘भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम 2018’ के तहत अब तक 2 अरब डॉलर से अधिक की संपत्ति जब्त की जा चुकी है।
-
इंटरपोल का उपयोग: भारत की ओर से अब तक कुल 957 इंटरपोल नोटिस जारी किए जा चुके हैं। अकेले 2025 के शुरुआती महीनों में ही 189 से अधिक रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए गए।
4. चुनौतियों का समाधान: विशेष जेलें (Special Prisons)
भगोड़ों के प्रत्यर्पण (Extradition) में अक्सर मानवाधिकारों और जेल की स्थिति का हवाला देकर विदेशी अदालतें अड़चन पैदा करती हैं। सरकार ने इसका समाधान निकाला है:
-
अंतरराष्ट्रीय मानकों (नेल्सन मंडेला नियमों) के अनुरूप विशेष जेलों का निर्माण किया जा रहा है ताकि विदेशी अदालतों के पास प्रत्यर्पण रोकने का कोई बहाना न रहे।
5. मुख्य लक्ष्य
इस अभियान के तहत मुख्य रूप से उन भगोड़ों को लक्षित किया जा रहा है जो:
-
आर्थिक अपराधी हैं (जैसे विजय माल्या, नीरव मोदी, ललित मोदी)।
-
आतंकवाद और संगठित अपराध में शामिल हैं।
-
साइबर धोखाधड़ी कर देश से बाहर शरण लिए हुए हैं।
Matribhumisamachar


