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मिर्जापुर जिम धर्मांतरण: मास्टरमाइंड इमरान दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार, दुबई से जुड़े तार

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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लखनऊ. उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में ‘जिम धर्मांतरण’ रैकेट (जिसे ‘जिम जिहाद’ भी कहा जा रहा है) के खिलाफ पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। इस पूरे सिंडिकेट के मास्टरमाइंड और 25 हजार के इनामी आरोपी इमरान को दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर लिया गया है। इमरान विदेश भागने की फिराक में था।

1. गिरफ्तारी का विवरण (The Arrest)

पुलिस जांच के अनुसार, आरोपी इमरान खान लंबे समय से फरार चल रहा था और पुलिस ने उस पर 25,000 रुपये का इनाम घोषित किया था। इमरान के खिलाफ ‘लुकआउट नोटिस’ भी जारी किया गया था। वह शनिवार (24 जनवरी 2026) को दिल्ली एयरपोर्ट के जरिए देश छोड़कर भागने की कोशिश कर रहा था, तभी सुरक्षा एजेंसियों और मिर्जापुर पुलिस की संयुक्त निगरानी में उसे दबोच लिया गया।

2. अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन (International Links)

जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं:

  • विदेश यात्राएं: इमरान का पासपोर्ट रिकॉर्ड बताता है कि वह 2024 में दुबई गया था और उसके मलेशिया जाने के भी साक्ष्य मिले हैं।

  • फंडिंग का शक: सूत्रों के मुताबिक, दुबई में उसने धर्मांतरण के संगठित नेटवर्क और संदिग्ध लोगों से मुलाकात की थी। उसकी जीवनशैली और विदेश यात्राओं पर लाखों का खर्च जांच एजेंसियों के लिए मुख्य सवाल बना हुआ है।

3. ‘जिम सिंडिकेट’ का मोडस ऑपेरंडी (Modus Operandi)

यह रैकेट मिर्जापुर में जिम की एक चेन के माध्यम से चलाया जा रहा था (मुख्य रूप से KGN 1, 2, 3, आयरन फायर और फिटनेस क्लब)।

  • निशाना: जिम आने वाली संपन्न और शिक्षित महिलाओं (लगभग 30 से अधिक) को टारगेट किया जाता था।

  • ट्रैप: पहले दोस्ती की जाती थी, फिर उनके निजी फोटो और वीडियो हासिल किए जाते थे।

  • AI का दुरुपयोग: सबसे खतरनाक पहलू यह सामने आया कि आरोपी AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) टूल्स का उपयोग कर महिलाओं के आपत्तिजनक वीडियो और तस्वीरें तैयार करते थे।

  • ब्लैकमेलिंग और धर्मांतरण: इन अश्लील वीडियो के जरिए महिलाओं को ब्लैकमेल कर उनसे पैसे वसूले जाते थे और फिर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाया जाता था।

4. सिंडिकेट के अन्य सदस्य और गिरफ्तारियां

पुलिस ने इस मामले में अब तक 6 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है:

  • फरीद अहमद: गिरोह का मुख्य किरदार, जिसे पहले ही पुलिस मुठभेड़ के दौरान पकड़ा जा चुका है।

  • इरशाद खान: उत्तर प्रदेश पुलिस का एक हेड कॉन्स्टेबल (जीआरपी में तैनात), जो इस रैकेट को संरक्षण और आर्थिक मदद दे रहा था।

  • लकी अली: एक अन्य आरोपी जिस पर इनाम घोषित है और वह फरार बताया जा रहा है।

5. पुलिस की कार्रवाई और बरामदगी

  • डिजिटल सबूत: आरोपियों के मोबाइल से एक पासवर्ड-प्रोटेक्टेड फोल्डर मिला है, जिसमें 50 से अधिक महिलाओं की तस्वीरें, वीडियो और निकाह से जुड़े दस्तावेज बरामद हुए हैं।

  • संपत्ति की जांच: पुलिस आरोपियों के बैंक खातों को सीज कर रही है और करोड़ों रुपये की लागत से बने इन जिमों की फंडिंग की जांच कर रही है।

यह मामला केवल एक जिला स्तर का अपराध नहीं, बल्कि तकनीक (AI) और विदेशी फंडिंग के जरिए चलाया जा रहा एक सुनियोजित नेटवर्क प्रतीत होता है। इमरान की गिरफ्तारी के बाद अब इस सिंडिकेट के गहरे राज खुलने की उम्मीद है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।