लखनऊ. उत्तर प्रदेश के प्रयागराज स्थित झूंसी थाने में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्यों के विरुद्ध नाबालिग बच्चों के साथ कुकर्म के गंभीर आरोपों में मुकदमा दर्ज किया गया है। पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत दर्ज इस मामले ने धार्मिक और कानूनी गलियारों में हलचल तेज कर दी है। एफआईआर दर्ज होने के तुरंत बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने गिरफ्तारी से बचने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
पॉक्सो कोर्ट के आदेश पर हुई कार्रवाई
यह मामला तब प्रकाश में आया जब विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो कोर्ट) ने झूंसी पुलिस को तत्काल अभियोग पंजीकृत करने का निर्देश दिया। अदालत ने पुलिस कमिश्नर द्वारा प्रस्तुत जांच रिपोर्ट और पीड़ित बच्चों के बयानों का संज्ञान लेते हुए कहा कि “आरोप प्रथम दृष्टया गंभीर और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आते हैं।” कोर्ट ने विवेचना को पूरी तरह निष्पक्ष और शीघ्रता से संपन्न करने पर जोर दिया है।
क्या हैं आरोप?
शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी द्वारा अदालत में दी गई अर्जी के अनुसार:
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यह घटना महाकुंभ के दौरान की बताई जा रही है।
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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद और दो अन्य पर नाबालिग लड़कों के साथ लैंगिक उत्पीड़न के आरोप लगाए गए हैं।
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पीड़ितों के बयान दर्ज होने के बाद कोर्ट ने इसे गंभीर माना है।
हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका
मुकदमा दर्ज होने के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के अधिवक्ता राजर्षि गुप्ता ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) की याचिका दाखिल की है।
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स्वामी जी की ओर से सभी आरोपों को निराधार, झूठा और छवि खराब करने वाला बताया गया है।
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उनके वकील ने राज्य सरकार को इस संबंध में नोटिस भेज दिया है।
फिलहाल पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है। अब सबकी निगाहें इलाहाबाद हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को गिरफ्तारी से राहत मिलेगी या उनकी मुश्किलें और बढ़ेंगी।
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