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कानपुर: डीएवी कॉलेज में ‘भारतीय ज्ञान परंपरा’ पर महामंथन; IIT निदेशक और CSJMU कुलपति ने बताया सुनहरे भविष्य का मार्ग

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कानपुर | मंगलवार, 24 मार्च 2026

शहर के ऐतिहासिक डीएवी कॉलेज में आज ‘भारतीय ज्ञान परंपरा: महत्व एवं विस्तार’ विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में देश के जाने-माने शिक्षाविदों और वैज्ञानिकों ने शिरकत की, जहाँ प्राचीन भारतीय ज्ञान को आधुनिक विज्ञान और शिक्षा नीति से जोड़ने पर विस्तृत चर्चा हुई।

मुख्य अतिथि: “प्राचीन ज्ञान ही आधुनिक चुनौतियों का समाधान”

संगोष्ठी के मुख्य अतिथि आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रोफेसर मणींद्र अग्रवाल ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल इतिहास नहीं, बल्कि एक जीवंत विज्ञान है। उन्होंने गणित, खगोल विज्ञान और आयुर्वेद के उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे भारतीय मेधा ने सदियों पहले उन सिद्धांतों को प्रतिपादित किया था, जिन्हें आज दुनिया स्वीकार कर रही है। उन्होंने छात्रों को अपनी जड़ों से जुड़कर नवाचार (Innovation) करने के लिए प्रेरित किया।

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विशिष्ट अतिथि: “शिक्षा में भारतीयता का समावेश जरूरी”

विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) के कुलपति प्रोफेसर विनय कुमार पाठक ने कहा कि नई शिक्षा नीति (NEP) के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा को मुख्यधारा के पाठ्यक्रम में शामिल करना एक क्रांतिकारी कदम है। उन्होंने विश्वविद्यालय स्तर पर शोध और विस्तार की संभावनाओं पर बल दिया।

विद्वानों का जमावड़ा: मंच पर दिखी बौद्धिक गरिमा

उद्घाटन सत्र में कई वरिष्ठ शिक्षाविदों ने भारतीय ज्ञान की व्यापकता पर अपने विचार रखे:

  • प्रोफेसर देवेंद्र मिश्रा ने ज्ञान की निरंतरता पर प्रकाश डाला।

  • वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय (VBSPU) के वरिष्ठ प्रोफेसर देवराज सिंह ने प्राचीन सामग्रियों और उनके वैज्ञानिक पहलुओं पर बात की।

  • लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मनोज शर्मा ने साहित्य और दर्शन में निहित भारतीय ज्ञान के महत्व को साझा किया।

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सफल आयोजन और आभार

कार्यक्रम का कुशल संचालन आयोजन सचिव डॉ. अभय सक्सेना ने किया, जिन्होंने संगोष्ठी के उद्देश्यों को रेखांकित किया। कार्यक्रम के अंत में प्रोफेसर राजीव कुमार ने सभी अतिथियों, वक्ताओं और आगंतुकों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।

प्रमुख बिंदु: एक नजर में

विवरण विवरण जानकारी
आयोजक डीएवी कॉलेज, कानपुर
विषय भारतीय ज्ञान परंपरा (IKS)
प्रमुख उपस्थिति प्रो. मणींद्र अग्रवाल, प्रो. विनय पाठक
मुख्य संदेश भारतीय ज्ञान को आधुनिक शोध से जोड़ना

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