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उज्जैन साइबर क्राइम: नाबालिग की फोटो एडिट कर अश्लील वीडियो वायरल करने वाला गिरोह बेनकाब; सरकारी BLO समेत 4 गिरफ्तार

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उज्जैन । बुधवार, 24 जून 2026

डिजिटल दुनिया में कदम-कदम पर बढ़ते साइबर खतरों के बीच मध्य प्रदेश के उज्जैन से एक बेहद संवेदनशील और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। उज्जैन की पंवासा थाना पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने एक ऐसी घिनौनी साजिश का भंडाफोड़ किया है, जिसने सरकारी गोपनीयता और महिला सुरक्षा दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस ने एक नाबालिग छात्रा की पहचान और उसकी फोटो का दुरुपयोग कर उसे अश्लील वीडियो में जोड़कर (Morphing) सोशल मीडिया पर वायरल करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है।

इस पूरे आपराधिक कृत्य में सबसे हैरान करने वाला मोड़ तब आया जब पुलिस ने सरकारी पद पर बैठी एक महिला बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) को भी सह-आरोपी के रूप में गिरफ्तार किया। मामले में अब तक बीएलओ समेत चार आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है, जबकि एक अन्य मुख्य कड़ी की तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है।

21 जून को पिता की शिकायत से शुरू हुई जांच

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब पीड़िता के लाचार और परेशान पिता ने 21 जून 2026 (रविवार) को पंवासा थाने में अपनी शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के मुताबिक, उनके ही गांव और समाज के विभिन्न व्हाट्सएप ग्रुपों में उनकी नाबालिग बेटी के नाम से तीन अत्यंत आपत्तिजनक और अश्लील वीडियो तेजी से फॉरवर्ड किए जा रहे थे।

इस घटना के कारण पूरे गांव में अफवाहों का बाजार गर्म हो गया और समाज में नाबालिग व उसके परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा को अपूरणीय क्षति पहुंची। मानसिक प्रताड़ना झेल रहे परिवार की गुहार पर पुलिस ने बिना वक्त गंवाए मामले को गंभीरता से लिया और तुरंत जांच के लिए साइबर सेल की मदद ली।

फॉरेंसिक और साइबर जांच में बड़ा खुलासा: वीडियो था फर्जी

साइबर सेल की तकनीकी और फॉरेंसिक जांच में सबसे बड़ी राहत और सच्चाई यह सामने आई कि वीडियो में दिखाई दे रही युवती वास्तव में पीड़िता नहीं थी।

जांच अधिकारियों के अनुसार, यह पूरी तरह से एक सोची-समझी साजिश (Conspiracy) का हिस्सा था। शातिर अपराधियों ने किसी अन्य लड़की के मूल अश्लील वीडियो का स्क्रीनशॉट (Screenshot) लिया। इसके बाद आधुनिक तकनीकी संपादन और एडिटिंग टूल्स का गलत इस्तेमाल करते हुए उस स्क्रीनशॉट पर नाबालिग छात्रा की पासपोर्ट साइज फोटो को हुबहू एडिट करके लगा दिया, जिससे पहली नजर में वह पीड़िता जैसी दिखाई दे।

सरकारी सिस्टम में सेंध: BLO ने व्हाट्सएप पर लीक की थी फोटो

जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, पुलिस के सामने सरकारी सिस्टम की सुरक्षा में लगी एक बड़ी सेंध उजागर हुई। साइबर सेल ने जब यह पता लगाने की कोशिश की कि आरोपियों के पास नाबालिग की वह विशिष्ट पासपोर्ट साइज फोटो कहां से आई, तो तार सीधे सरकारी अभिलेखों से जुड़े।

  • नवंबर 2025 की घटना: नवंबर 2025 में चुनाव आयोग और प्रशासनिक स्तर पर विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) का काम चल रहा था। इसी दौरान पीड़िता के परिवार ने एक सरकारी फॉर्म जमा किया था जिसमें उसकी वह पासपोर्ट साइज फोटो लगी थी।

  • पद का दुरुपयोग: इस कार्य के लिए तैनात संबंधित महिला बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) फखरुनिशा उर्फ बेबी ने अपने पद की गोपनीयता और मर्यादा को ताक पर रख दिया। आरोप है कि उसने सरकारी दस्तावेज से उस फोटो को निकाला और अपने मोबाइल से मुख्य आरोपी एहसान पटेल को व्हाट्सएप पर भेज दिया।

साजिश का ताना-बाना और आरोपियों की भूमिका

फोटो हाथ में आते ही आरोपियों ने इसे अपनी घिनौनी साजिश को अंजाम देने का जरिया बना लिया:

  1. एहसान पटेल, आबिद पटेल और मुजफ्फर पटेल ने उस फोटो को आपस में कई बार साझा किया।

  2. पुलिस की कड़ी पूछताछ में सामने आया कि मुजफ्फर पटेल इस गिरोह का मुख्य तकनीकी दिमाग था। मुजफ्फर ने ही एडिटिंग टूल्स और तकनीक का दुरुपयोग कर फोटो को आपत्तिजनक वीडियो फ्रेम के साथ जोड़ा और इसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल करने के लिए तैयार किया।

  3. पुलिस अब इस बात की भी गहराई से तफ्तीश कर रही है कि इन आरोपियों के पास वह ‘मूल अश्लील वीडियो’ कहां से आया था, जिसमें एडिटिंग की गई थी।

कड़ी धाराओं में केस दर्ज, चार सलाखों के पीछे

पंवासा थाना पुलिस ने इस मामले में कठोर कानूनी रुख अपनाते हुए आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 79 (महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाना), धारा 49 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 67(A) (इलेक्ट्रॉनिक रूप में अश्लील सामग्री को प्रकाशित या प्रसारित करना) के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज किया है। चूंकि पीड़िता नाबालिग है, इसलिए पुलिस अन्य कानूनी पहलुओं की भी समीक्षा कर रही है।

गिरफ्तार आरोपी का नाम निवासी/क्षेत्र मुख्य आरोप/भूमिका
फखरुनिशा उर्फ बेबी (BLO) उज्जैन सरकारी दस्तावेज से नाबालिग की फोटो चोरी कर लीक करना
मुजफ्फर पटेल उज्जैन तकनीक का गलत इस्तेमाल कर वीडियो एडिट करने वाला मुख्य आरोपी
एहसान पटेल उज्जैन फोटो प्राप्त करने और साजिश में शामिल होने का आरोप
आबिद पटेल देवास वीडियो और फोटो को आगे प्रसारित/साझा करने का आरोप

कार्रवाई की स्थिति: पुलिस ने घटना में इस्तेमाल किए गए चार मोबाइल फोन और ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) से जुड़े संबंधित सरकारी दस्तावेज को अपने कब्जे में लेकर जब्त कर लिया है। फरार पांचवें आरोपी यूसुफ पटेल की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें लगातार संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं।

सामाजिक रंजिश या नीचा दिखाने की मंशा

प्रारंभिक पुलिस पूछताछ और स्थानीय स्तर पर की गई जांच से यह स्पष्ट हुआ है कि पीड़िता नाबालिग का इन आरोपियों से कोई पूर्व या विशेष संबंध नहीं था। सभी आरोपी और पीड़िता एक ही ग्रामीण परिवेश से ताल्लुक रखते हैं और मुख्य रूप से खेती-बाड़ी के काम से जुड़े हैं। पुलिस का मानना है कि यह किसी पुरानी रंजिश, आपसी विवाद या परिवार को समाज में नीचा दिखाने और बदनाम करने की नीयत से रची गई एक बेहद क्रूर और सोची-समझी साजिश थी।

प्रशासन ने इस मामले के बाद सरकारी कर्मचारियों को डेटा और दस्तावेजों की गोपनीयता बनाए रखने की सख्त हिदायत दी है।

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