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विदेश मंत्री एस. जयशंकर का रूस दौरा: रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी संबंधों को मिली नई दिशा

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
4 Min Read
मॉस्को | सोमवार, 24 अगस्त 2026
भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर रूस की दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर हैं। बदलते वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य के बीच यह उच्चस्तरीय कूटनीतिक दौरा भारत और रूस के बीच सदियों पुरानी साझेदारी को नया आयाम देने के लिए आयोजित किया जा रहा है। इस यात्रा के दौरान 27वें भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग (IRIGC-TEC) की बैठक में व्यापार, तकनीक, कनेक्टिविटी, ऊर्जा और निवेश से जुड़े प्रमुख द्विपक्षीय मुद्दों पर विस्तृत बातचीत हुई है।

व्यापार वृद्धि और असंतुलन दूर करने की चुनौती

पिछले कुछ वर्षों में भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय व्यापार में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि, आयात की तुलना में भारत से होने वाला निर्यात कम होने के कारण व्यापार संतुलन (Trade Balance) की चुनौती बनी हुई है।
  • निर्यात विस्तार: भारत फार्मास्यूटिकल्स, कृषि उत्पाद, प्रसंस्कृत खाद्य सामग्री, कपड़ा (Textiles) और इंजीनियरिंग सामानों के रूसी बाजार में निर्यात को बढ़ावा दे रहा है।
  • बाधाओं का निवारण: गैर-टैरिफ बाधाओं (Non-tariff barriers) को समाप्त करने और सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को सुगम बनाने पर विशेष जोर दिया गया है।

प्रौद्योगिकी, विज्ञान एवं कनेक्टिविटी में सहयोग

भारत-रूस साझेदारी अब केवल पारंपरिक रक्षा और ऊर्जा क्षेत्रों तक सीमित न रहकर तकनीकी क्रांति की ओर बढ़ रही है:
  • तकनीकी एवं औद्योगिक साझेदारी: दोनों देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, वैज्ञानिक अनुसंधान और संयुक्त विनिर्माण परियोजनाओं को आगे बढ़ा रहे हैं।
  • ऊर्जा एवं कनेक्टिविटी: अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) और चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री गलियारे जैसे नए लॉजिस्टिक्स मार्गों को मजबूत किया जा रहा है ताकि व्यापार सुरक्षित, तेज़ और कम लागत वाला बन सके।

सर्गेई लावरोव के साथ रणनीतिक संवाद

रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, बहुपक्षीय मंचों (BRICS, SCO, UN) और वैश्विक आर्थिक नीतियों पर विचार साझा किए गए। भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) को बनाए रखते हुए रूस के साथ बहुआयामी संबंधों को मजबूत कर रहा है।

 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1. विदेश मंत्री एस. जयशंकर का रूस दौरा क्यों महत्वपूर्ण है?
यह दौरा भारत-रूस के पारंपरिक संबंधों को व्यापार, उच्च तकनीक, विज्ञान और लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी जैसे नए क्षेत्रों में विस्तारित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
Q2. भारत और रूस के बीच व्यापार संतुलन की क्या स्थिति है?
ऊर्जा आयात के कारण द्विपक्षीय व्यापार बढ़ा है, लेकिन भारत से निर्यात बढ़ाने और गैर-टैरिफ बाधाओं को हटाकर व्यापार असंतुलन कम करने पर चर्चा की जा रही है।
Q3. इस यात्रा के दौरान किन मुख्य गलियारों पर ध्यान दिया गया?
व्यापार को तीव्र और किफायती बनाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) और चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री मार्ग पर मुख्य ध्यान दिया जा रहा है।

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह लेख उपलब्ध आधिकारिक समाचारों और प्रेस वक्तव्यों के आधार पर सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए तैयार किया गया है। इसमें व्यक्त किए गए विचार एवं आंकड़े अद्यतन कूटनीतिक वार्ताओं पर आधारित हैं।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।