मुंबई. नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने हवाई यात्रा करने वाले करोड़ों यात्रियों को बड़ी राहत देते हुए ‘सिविल एविएशन रिक्वायरमेंट’ (CAR) के नियमों में ऐतिहासिक संशोधन किया है। नए नियमों का मुख्य केंद्र यात्रियों के अधिकारों को सुरक्षित करना और रिफंड की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना है। अक्सर एयरलाइनों द्वारा वसूले जाने वाले भारी कैंसिलेशन चार्ज और रिफंड में होने वाली देरी को देखते हुए यह सख्त कदम उठाया गया है।
1. 48 घंटे की ‘फ्री कैंसिलेशन’ विंडो
संशोधित नियमों के तहत, अब यात्रियों को टिकट बुकिंग के बाद 48 घंटे का एक ‘लॉक-इन पीरियड’ मिलेगा। यदि आप इस दौरान अपना टिकट कैंसिल करते हैं या उसमें कोई बदलाव (संशोधन) करते हैं, तो एयरलाइन आपसे कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं ले सकेगी।
नोट: यह सुविधा उन यात्रियों के लिए वरदान है जो यात्रा की अनिश्चितता के बावजूद जल्दी टिकट बुक कर लेते हैं। हालांकि, यह नियम आमतौर पर उन टिकटों पर लागू होता है जो यात्रा की तारीख से कम से कम 7 दिन पहले बुक किए गए हों।
2. नाम की गलती सुधारना अब बिल्कुल मुफ्त
अक्सर यात्रियों से बुकिंग के समय नाम की स्पेलिंग में गलती हो जाती है, जिसे सुधारने के लिए एयरलाइन्स पहले मोटा शुल्क वसूलती थीं। नए नियमों के अनुसार:
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यदि टिकट सीधे एयरलाइन की वेबसाइट से खरीदा गया है।
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और बुकिंग के 24 घंटे के भीतर नाम सुधार की सूचना दी जाती है।
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तो एयरलाइन इसके लिए कोई शुल्क नहीं ले सकेगी।
3. रिफंड प्रक्रिया में एयरलाइन की सीधी जवाबदेही
यात्रियों की सबसे बड़ी शिकायत यह रहती थी कि ट्रैवल एजेंट और एयरलाइन रिफंड के लिए एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टालते थे। DGCA ने इसे अब पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है:
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जिम्मेदारी: भले ही टिकट किसी ऑनलाइन पोर्टल (जैसे MakeMyTrip, EaseMyTrip आदि) या ऑफलाइन एजेंट से लिया गया हो, रिफंड वापस करने की मूल जिम्मेदारी एयरलाइन की ही होगी।
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समयसीमा: सभी एयरलाइनों को 14 कार्य दिवसों (Working Days) के भीतर रिफंड की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
4. मेडिकल इमरजेंसी में विशेष छूट
24 फरवरी को जारी किए गए संशोधित CAR में मानवीय दृष्टिकोण को भी प्राथमिकता दी गई है। यदि कोई यात्री किसी गंभीर बीमारी या मेडिकल इमरजेंसी के कारण यात्रा नहीं कर पाता है, तो कैंसिलेशन नियमों को लचीला बनाया गया है। अब उचित मेडिकल प्रमाण प्रस्तुत करने पर यात्रियों को भारी वित्तीय नुकसान से बचाया जा सकेगा।
क्यों पड़ी इन सख्त नियमों की जरूरत?
दिसंबर 2025 में इंडिगो (IndiGo) की उड़ानों में आई तकनीकी बाधा और उसके बाद रिफंड को लेकर हुए विवाद ने सरकार का ध्यान इस ओर खींचा था। सोशल मीडिया पर हजारों यात्रियों ने रिफंड न मिलने की शिकायतें की थीं, जिसके बाद नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एयरलाइनों को चेतावनी दी थी। वर्तमान में बढ़ते हवाई यातायात को देखते हुए सरकार यात्रियों के अनुभवों को बेहतर और तनावमुक्त बनाना चाहती है।
इन नए नियमों से न केवल यात्रियों का पैसा बचेगा, बल्कि एयरलाइनों की मनमानी पर भी लगाम लगेगी। DGCA का यह फैसला भारतीय विमानन क्षेत्र में “कस्टमर फर्स्ट” की नीति को मजबूत करता है।
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