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सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: ‘खजाने पर बोझ’ का बहाना बनाकर नहीं रोक सकते किसानों का मुआवजा; NHAI को तगड़ा झटका

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नई दिल्ली | 26 मार्च, 2026 कानूनी डेस्क

देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) ने भूमि अधिग्रहण के मामलों में किसानों के पक्ष में एक युगांतकारी निर्णय सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) या कोई भी सरकारी एजेंसी ‘वित्तीय घाटे’ या ‘भारी आर्थिक बोझ’ का हवाला देकर किसानों के उचित मुआवजे और ब्याज के हक को दबा नहीं सकती।

न्याय का तराजू: ₹29,000 करोड़ से बड़ा है किसान का अधिकार

प्रधान न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्जल भुइयां की खंडपीठ ने NHAI द्वारा दायर उस पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें 4 फरवरी 2025 के फैसले को बदलने की मांग की गई थी। NHAI का तर्क था कि अतिरिक्त मुआवजे और ब्याज से सरकारी खजाने पर लगभग ₹29,000 करोड़ का अतिरिक्त भार पड़ेगा।

इस पर तल्ख टिप्पणी करते हुए पीठ ने कहा:

“न्यायसंगत मुआवजा देना केवल एक वैधानिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक संवैधानिक गारंटी है। किसी भी एजेंसी की वित्तीय अक्षमता या बजटीय सीमाएं नागरिकों के संपत्ति के अधिकार का हनन करने का आधार नहीं बन सकतीं।”

ब्याज दर पर बड़ी राहत: अब 5% नहीं, मिलेगा 9% ब्याज

इस फैसले का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा ब्याज दरों को लेकर है। सुप्रीम कोर्ट ने कानून की व्याख्या करते हुए किसानों के लिए आर्थिक लाभ का मार्ग प्रशस्त किया:

  • NHAI की दलील: प्राधिकरण ने ‘एनएचएआई एक्ट’ के तहत केवल 5% ब्याज देने की वकालत की थी।

  • सुप्रीम कोर्ट का आदेश: कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए ‘भूमि अधिग्रहण कानून’ (Land Acquisition Act) के प्रावधानों को प्राथमिकता दी और 9% ब्याज देने का आदेश बरकरार रखा।

प्रमुख निष्कर्ष: 1. भूमि अधिग्रहण के समय से ही किसान उचित ब्याज पाने के पात्र हैं।

2. विशेष कानूनों (जैसे NHAI Act) के तकनीकी पेच, सामान्य भूमि अधिग्रहण कानून के ‘कल्याणकारी’ प्रावधानों को खत्म नहीं कर सकते।

किसे मिलेगा लाभ और कहाँ लगी है लगाम?

सुप्रीम कोर्ट ने न्याय और स्थिरता के बीच संतुलन बनाने के लिए कुछ शर्तें भी स्पष्ट की हैं:

  • नए और लंबित मामले: जिन किसानों के मुआवजे के मामले अभी प्रक्रिया में हैं या कोर्ट में लंबित हैं, उन्हें इस बढ़ी हुई ब्याज दर और मुआवजे का सीधा लाभ मिलेगा।

  • बंद हो चुके मामले (Finalized Cases): कोर्ट ने साफ किया कि जिन मामलों में सालों पहले अंतिम निर्णय हो चुका है और भुगतान स्वीकार किया जा चुका है, उन्हें इस फैसले के आधार पर दोबारा नहीं खोला जा सकता। यह ‘कानूनी स्थिरता’ (Legal Stability) बनाए रखने के लिए जरूरी है।

क्यों खास है यह फैसला? (Expert View)

यह निर्णय देशभर में चल रहे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स (जैसे एक्सप्रेसवे और इकोनॉमिक कॉरिडोर) के लिए एक नजीर बनेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अब सरकार और एजेंसियां अधिग्रहण से पहले बजट का अधिक सटीक आकलन करेंगी, जिससे भविष्य में मुआवजे को लेकर होने वाली कानूनी लड़ाई कम होगी।

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