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केंद्रीय बजट 2026-27: अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की रणनीति, निवेश योजनाएं और वित्तीय चुनौतियाँ

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MSME उद्योग और छोटे व्यापार का प्रतीकात्मक चित्र

नई दिल्ली. आगामी केंद्रीय बजट 2026-27 देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है। सरकार के सामने दोहरी चुनौती है—एक ओर आर्थिक विकास को गति देना, दूसरी ओर वित्तीय अनुशासन (फिस्कल डिसिप्लिन) बनाए रखना। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, घरेलू मांग में उतार-चढ़ाव और सीमित राजकोषीय संसाधनों के बीच यह बजट संतुलन की राजनीति का उदाहरण बनने की ओर बढ़ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार बजट का मुख्य फोकस संरचनात्मक सुधारों (Structural Reforms) और लक्षित निवेश (Targeted Investment) पर रहेगा, न कि बड़े पैमाने पर सब्सिडी या लोकलुभावन घोषणाओं पर।

फिस्कल नीति: अनुशासन बनाम विकास

सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती फिस्कल घाटे को नियंत्रित रखना है। पिछले वर्षों में बढ़े सरकारी खर्च और वैश्विक आर्थिक दबावों के कारण अब बड़े वित्तीय पैकेज की गुंजाइश सीमित है। ऐसे में 2026-27 के बजट में राजस्व बढ़ाने और खर्च को प्राथमिकता आधारित बनाने की रणनीति देखने को मिल सकती है।
फिस्कल अनुशासन बनाए रखते हुए विकास को गति देना सरकार की प्रमुख नीति-दिशा होगी।

पूंजीगत व्यय (Capex): विकास की रीढ़

इस बजट में कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) को फिर से अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जा रहा है।
संभावित प्राथमिकता क्षेत्र:

  • सड़क और परिवहन इंफ्रास्ट्रक्चर
  • रेलवे और लॉजिस्टिक्स
  • ऊर्जा सेक्टर (ग्रीन एनर्जी + पारंपरिक ऊर्जा)
  • शहरी विकास परियोजनाएं

सरकार का उद्देश्य यह होगा कि सरकारी निवेश के जरिए निजी निवेश को आकर्षित किया जाए ताकि रोजगार सृजन और उत्पादन क्षमता दोनों बढ़ें।

कर नीति: स्थिरता और भरोसा

बड़े टैक्स कट की संभावना कम मानी जा रही है। सरकार का झुकाव कर स्थिरता (Tax Stability) की ओर होगा ताकि निवेशकों का भरोसा बना रहे।
हालांकि कुछ सेक्टर-स्पेसिफिक राहत संभव है:

  • ग्रीन एनर्जी
  • इलेक्ट्रिक वाहन (EV)
  • मैन्युफैक्चरिंग
  • निर्यात आधारित उद्योग

सरकार का लक्ष्य कर प्रणाली को सरल बनाकर ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को मजबूत करना होगा।

MSME, कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था

देश की आर्थिक संरचना में MSME और कृषि की भूमिका आधार स्तंभ जैसी है।
बजट में इन क्षेत्रों के लिए संभावित कदम:

  • MSME के लिए सस्ता क्रेडिट और गारंटी योजनाएं
  • कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर (स्टोरेज, कोल्ड चेन, लॉजिस्टिक्स)
  • ग्रामीण रोजगार और स्किल डेवलपमेंट योजनाएं
  • डिजिटल एग्रीकल्चर प्लेटफॉर्म को बढ़ावा

यह रणनीति रोजगार सृजन + मांग वृद्धि दोनों को साधने का प्रयास होगी।

रक्षा, मैन्युफैक्चरिंग और आत्मनिर्भर भारत

रक्षा क्षेत्र में निवेश बढ़ाने की संभावना है, खासकर:

  • रक्षा मैन्युफैक्चरिंग
  • स्वदेशी तकनीक
  • मेक इन इंडिया प्रोजेक्ट्स

इससे न केवल सुरक्षा क्षेत्र मजबूत होगा बल्कि घरेलू उद्योग और रोजगार को भी समर्थन मिलेगा।

हरित ऊर्जा और डिजिटल अर्थव्यवस्था

2026-27 का बजट ग्रीन इकोनॉमी और डिजिटल इंडिया को नई गति दे सकता है:

  • सोलर और विंड एनर्जी प्रोजेक्ट्स
  • इलेक्ट्रिक वाहन इंफ्रास्ट्रक्चर
  • बैटरी स्टोरेज टेक्नोलॉजी
  • डिजिटल पेमेंट, फिनटेक और साइबर सिक्योरिटी

यह भविष्य की अर्थव्यवस्था की नींव मानी जा रही है।

बड़ी चुनौतियाँ

इस बजट के सामने कुछ गंभीर चुनौतियाँ भी हैं:

  1. सीमित राजकोषीय संसाधन
  2. वैश्विक आर्थिक अस्थिरता
  3. निजी निवेश की सुस्त गति
  4. रोजगार सृजन की बढ़ती जरूरत
  5. महंगाई और उपभोक्ता मांग का दबाव

इन सभी के बीच संतुलन बनाना सरकार के लिए सबसे बड़ी नीति-परीक्षा होगी।

2026-27 का केंद्रीय बजट लोकलुभावन नहीं, रणनीतिक बजट बनने की दिशा में बढ़ रहा है। इसका फोकस बड़े वादों से अधिक लंबी अवधि की आर्थिक स्थिरता, संरचनात्मक सुधार और निवेश आधारित विकास मॉडल पर रहेगा। यह बजट देश को तात्कालिक राहत से अधिक दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती देने की कोशिश करेगा — जहां विकास, अनुशासन और सुधार तीनों का संतुलन ही सफलता की कुंजी बनेगा।

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