27 जनवरी 2026 को भारत और यूरोपीय संघ (European Union – EU) ने ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement – FTA) पर बातचीत पूरी होने की घोषणा की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे “Mother of All Deals” करार दिया, क्योंकि यह 2007 से चल रही लगभग 18–19 वर्षों की लंबी वार्ताओं का परिणाम है।
यह समझौता केवल व्यापारिक करार नहीं, बल्कि भारत के लिए वैश्विक आर्थिक नेतृत्व की दिशा में एक निर्णायक रणनीतिक कदम माना जा रहा है।
📜 भारत–EU FTA की पृष्ठभूमि (Background History)
- 🗓 बातचीत की शुरुआत: 2007
- ❌ कई बार वार्ता रुकी: कृषि, डेटा सुरक्षा, बौद्धिक संपदा अधिकार, कार्बन टैक्स जैसे मुद्दों पर मतभेद
- 🔄 2022 में दोबारा वार्ता शुरू
- ✅ 27 जनवरी 2026 को औपचारिक रूप से वार्ता पूर्ण
➡️ यह दुनिया की सबसे लंबी व्यापारिक वार्ताओं में से एक रही है।
🔥 समझौते की मुख्य विशेषताएं (Key Highlights 2026)
📉 1. टैरिफ में ऐतिहासिक कटौती
- 🇮🇳 भारत EU के 96.6% उत्पादों पर टैरिफ कम या समाप्त करेगा
- 🇪🇺 EU भारत से आने वाले 99.5% उत्पादों पर ड्यूटी हटाएगा
➡️ इससे दोनों बाजारों में मुक्त व्यापार प्रवाह (Free Flow of Trade) संभव होगा।
🛒 2. भारत में सस्ते होने वाले यूरोपीय उत्पाद
अब भारतीय बाजार में यूरोपीय उत्पाद पहले से काफी सस्ते होंगे:
- 🚗 यूरोपीय लग्ज़री कारें
- 🍷 वाइन: 150% से घटकर 20–30%
- 🥃 स्पिरिट्स: 40% तक टैक्स कटौती
- 🍺 बीयर: 50% तक
- 🍫 चॉकलेट: 0% टैरिफ
- 🍝 पास्ता: 0% टैरिफ
- ⚙ मशीनरी और हाई-टेक उपकरण
➡️ इससे भारत में प्रीमियम लाइफस्टाइल प्रोडक्ट्स आम उपभोक्ता की पहुंच में आएंगे।
📦 3. भारतीय निर्यात को मिलेगा ऐतिहासिक लाभ
EU बाजार में भारत के इन सेक्टर्स को ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिलेगा:
- 👕 टेक्सटाइल
- 👗 रेडीमेड गारमेंट्स
- 👞 चमड़ा व फुटवियर
- 💊 फार्मास्यूटिकल्स
- 🧵 हस्तशिल्प
- 🏭 MSME सेक्टर
➡️ इससे भारत के श्रम-प्रधान उद्योगों में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन होगा।
🌱 ग्रीन ट्रेड और क्लाइमेट कोऑपरेशन
इस समझौते में ग्रीन ट्रेड को भी प्राथमिकता दी गई है:
- 🌿 ग्रीन हाइड्रोजन टेक्नोलॉजी
- ⚡ रिन्यूएबल एनर्जी निवेश
- ♻️ सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग
- 🌍 कार्बन फुटप्रिंट कम करने के साझा लक्ष्य
➡️ यह डील ग्रीन इकॉनमी पार्टनरशिप की नींव रखती है।
🌍 वैश्विक आर्थिक प्रभाव (Global Economic Impact)
- 👥 कवर किया गया बाजार: लगभग 2 अरब लोग
- 🌐 वैश्विक GDP का हिस्सा: 25%
अनुमानित प्रभाव:
- 📈 2032 तक EU निर्यात दोगुना
- 🏭 भारत में नई इंडस्ट्रियल क्लस्टर्स
- 👷 लाखों नई नौकरियां
- 💼 MSME सेक्टर का वैश्वीकरण
- 🚢 लॉजिस्टिक्स और पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार
🧠 भारत के लिए रणनीतिक फायदे
- भारत बनेगा ग्लोबल सप्लाई चेन हब
- ‘मेक इन इंडिया’ को वैश्विक पहचान
- चीन पर वैश्विक निर्भरता में कमी
- भारत–EU रणनीतिक साझेदारी मजबूत
- भारत की डिप्लोमैटिक और इकोनॉमिक पावर में वृद्धि
🏛 आगे की प्रक्रिया (Implementation Process)
हालांकि बातचीत पूरी हो चुकी है, लेकिन समझौते के लागू होने से पहले ये चरण बाकी हैं:
- ⚖ Legal Scrubbing (कानूनी समीक्षा)
- 🇪🇺 यूरोपीय संसद की मंजूरी
- 📝 आधिकारिक हस्ताक्षर (Signing Ceremony)
⏳ संभावित समयसीमा:
👉 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत तक पूर्ण कार्यान्वयन संभव
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