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क्या भारत में मानव सभ्यता अफ्रीका से भी पुरानी है? मसोल और रिवत के साक्ष्य

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यह शोध-पत्र इस संभावना पर केंद्रित है कि भारतीय उपमहाद्वीप में हॉमिनिन (मानव पूर्वज) की उपस्थिति पूर्वी अफ्रीका के समकालीन या उससे भी प्राचीन हो सकती है।

प्रस्तावना (Introduction)

दशकों तक यह माना जाता रहा कि होमो इरेक्टस लगभग 1.8 से 1.9 मिलियन वर्ष पहले अफ्रीका से बाहर निकले। लेकिन भारत के मसोल (पंजाब) और रिवत (पाकिस्तान/अविभाजित भारत) से प्राप्त साक्ष्य इस धारणा को चुनौती देते हैं। यहाँ प्राप्त पत्थर के औज़ार और जीवाश्म हड्डियों पर काटने के निशान (Cut marks) संकेत देते हैं कि भारत में मानव गतिविधि 2.6 मिलियन वर्ष से भी पुरानी है, जो पूर्वी अफ्रीका की ‘ओल्डुवन’ संस्कृति के समानांतर या उससे प्राचीन हो सकती है।

प्रमुख साक्ष्य और पुरातात्विक स्थल (Key Evidence)

अ. मसोल (पंजाब): एशिया का सबसे पुराना साक्ष्य?

चंडीगढ़ के पास शिवालिक की पहाड़ियों में स्थित मसोल में 2016 के इंडो-फ्रेंच शोध ने दुनिया को चौंका दिया।

  • खोज: क्वार्ट्जाइट चॉपर्स और जानवरों की जीवाश्म हड्डियों पर सूक्ष्म कट-निशान।
  • आयु: मैग्नेटोस्ट्रेटिग्राफी और कॉस्मोोजेनिक न्यूक्लाइड डेटिंग के अनुसार 2.6 मिलियन वर्ष
  • तर्क: यदि ये निशान हॉमिनिन द्वारा बनाए गए हैं, तो यह अफ्रीका के बाहर मानव गतिविधि का सबसे प्राचीन प्रमाण है।
  • साक्ष्य लिंक: * Nature Scientific Reports: Pre-human activity in Masol

ब. रिवत और सोआन घाटी (Soan Valley)

अविभाजित भारत के इस क्षेत्र में 1980 के दशक में हुए शोध ने प्रारंभिक संकेत दिए थे।

  • खोज: रिवत (Riwat) स्थल पर मिले फ्लैक्ड टूल्स (Flaked tools) की आयु 1.9 से 2.2 मिलियन वर्ष आंकी गई।
  • साक्ष्य लिंक: * ScienceDirect: The Riwat site and early human occupation

स. अत्तिरामपक्कम (तमिलनाडु)

हालाँकि यहाँ के औज़ार 1.5 मिलियन वर्ष पुराने हैं, लेकिन यहाँ की ‘एशुलियन’ तकनीक की परिपक्वता यह दर्शाती है कि यहाँ मानव समाज बहुत पहले से स्थापित था।

“आउट ऑफ अफ्रीका” बनाम “मल्टी-रीजनल” सिद्धांत (Scientific Debate)

यह शोध-पत्र इस संभावना को पुख्ता करता है कि:

  1. समानांतर विकास: भारत की भौगोलिक स्थिति (हिमालय की तलहटी और नदी घाटियाँ) आदिमानव के पनपने के लिए अफ्रीका की रिफ्ट वैली जैसी ही अनुकूल थी।
  2. लुप्त कड़ियों की खोज: भारत में जीवाश्मों (कंकाल) का न मिलना अम्लीय मिट्टी (Acidic soil) के कारण हो सकता है, लेकिन औज़ारों की निरंतरता यहाँ मानव उपस्थिति का अकाट्य प्रमाण है।

🕒 तुलनात्मक समयरेखा: भारत बनाम अफ्रीका (मानव विकास के 30 लाख वर्ष)

यह समयरेखा दर्शाती है कि जब अफ्रीका में प्रारंभिक हॉमिनिन विकसित हो रहे थे, ठीक उसी समय भारतीय उपमहाद्वीप (विशेषकर शिवालिक क्षेत्र) में भी वैसी ही गतिविधियाँ चल रही थीं।

समय (पूर्व) भारतीय उपमहाद्वीप के साक्ष्य (भारत/पाक) पूर्वी अफ्रीका के साक्ष्य (केन्या/इथियोपिया/तंजानिया) ऐतिहासिक महत्व
~2.6 – 2.9 Ma (26-29 लाख वर्ष) मसोल (Masol), पंजाब: जीवाश्म हड्डियों पर ‘कट मार्क्स’ और क्वार्ट्जाइट औजार। नयायंगा व गोना: ओल्डुवन औजारों की शुरुआती उपस्थिति। भारत में उपस्थिति के सबसे पुराने संकेत।
~2.1 – 2.4 Ma (21-24 लाख वर्ष) रिवत (Riwat): पत्थर के उन्नत फ्लेक औजार (Flaked tools) मिले। ओल्डुवाई गॉर्ज: ‘होमो हैबिलिस’ द्वारा औजारों का व्यापक उपयोग। हॉमिनिन का एशिया की ओर विस्तार या स्वतंत्र विकास।
~1.5 – 1.7 Ma (15-17 लाख वर्ष) अत्तिरामपक्कम (TN): भारत में एशुलियन (Acheulian) संस्कृति का उदय। कोबी फोरा (Koobi Fora): होमो इरेक्टस द्वारा आग और उन्नत औजारों का प्रयोग। तकनीकी क्रांति: हैंड-ऐक्स (Hand-axe) का निर्माण।
~1.2 Ma (12 लाख वर्ष) हुनसगी घाटी, कर्नाटक: बड़े पैमाने पर औजार बनाने की “फैक्ट्री” के प्रमाण। ओल्डुवाई गॉर्ज (ऊपरी स्तर): औजारों में और अधिक सुस्पष्टता। बस्तियों और सामाजिक संगठन के शुरुआती संकेत।
~5 – 6 लाख वर्ष नर्मदा घाटी (हथनोरा): ‘नर्मदा मानव’ (Archaic Homo sapiens) के जीवाश्म। ओल्orgesailie, केन्या: जटिल सामाजिक संरचना के प्रमाण। भारत में शारीरिक मानव अवशेषों की पुष्टि।

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🔍 इस समयरेखा से प्राप्त 3 बड़े निष्कर्ष

 

  1. समानांतर सभ्यता (Parallel Evolution)

समयरेखा स्पष्ट करती है कि 2.6 मिलियन वर्ष (मसोल) और 2.2 मिलियन वर्ष (रिवत) के साक्ष्य अफ्रीका के ओल्डुवन युग के बिल्कुल समकालीन हैं। यह इस विचार को बल देता है कि भारत में हॉमिनिन गतिविधि अफ्रीका से बहुत बाद में शुरू नहीं हुई थी, बल्कि लगभग साथ-साथ चल रही थी।

 

  1. “आउट ऑफ अफ्रीका” थ्योरी में बदलाव

पारंपरिक थ्योरी कहती है कि मानव 1.8 Ma के करीब अफ्रीका से निकले। लेकिन मसोल (2.6 Ma) के साक्ष्य इस पलायन को 8 लाख साल और पीछे धकेलते हैं, या यह सुझाव देते हैं कि हॉमिनिन का एक केंद्र दक्षिण एशिया भी था।

 

  1. तकनीक का हस्तांतरण या आविष्कार?

भारत में मिले 22 लाख वर्ष पुराने चॉपर्स और पेबल टूल्स (Pebble tools) की बनावट अफ्रीका के औजारों जैसी ही है। यह दर्शाता है कि या तो उस समय के मानवों में सूचनाओं का आदान-प्रदान था या उनकी ज़रूरतें और मानसिक विकास का स्तर वैश्विक स्तर पर एक समान था।

 

निष्कर्ष (Conclusion)

मसोल और अन्य भारतीय स्थलों के साक्ष्य यह प्रमाणित करने के लिए पर्याप्त हैं कि भारतीय उपमहाद्वीप केवल अफ्रीका से आए प्रवासियों का ठिकाना नहीं था, बल्कि यह मानव विकास की वैश्विक कहानी का एक प्राथमिक केंद्र था। 2.6 मिलियन वर्ष पुराने औज़ार यह सिद्ध करते हैं कि भारतीय भूमि पर मानव-पूर्वजों का अस्तित्व उस समय भी था जब अफ्रीका में ओल्डुवन संस्कृति आकार ले रही थी।

 

वैज्ञानिक शोध और ऑनलाइन संदर्भ (References)

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