यरूशलम. पश्चिम एशिया (West Asia) में दशकों से गहराता तनाव आखिरकार एक पूर्ण सैन्य टकराव में बदल गया है। परमाणु वार्ता की विफलता और ईरान द्वारा यूरेनियम संवर्धन की सीमा पार करने के आरोपों के बीच, शनिवार (28 फरवरी 2026) को अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से ईरान के खिलाफ अब तक के सबसे बड़े सैन्य अभियान का आगाज कर दिया।
इस ऐतिहासिक सैन्य कार्रवाई को इजरायल ने ‘ऑपरेशन रोरिंग लायन’ (Operation Roaring Lion) और अमेरिका ने ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ (Operation Epic Fury) का नाम दिया है। इस हमले ने न केवल ईरान की सैन्य शक्ति को चुनौती दी है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर भी संकट के बादल मंडरा दिए हैं।
हमले का मुख्य केंद्र: तेहरान और रणनीतिक ठिकाने
प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, हमलों की शुरुआत इजरायली वायुसेना के स्टील्थ लड़ाकू विमानों द्वारा की गई, जिसके तुरंत बाद फारस की खाड़ी में तैनात अमेरिकी युद्धपोतों और बी-52 बमवर्षकों ने मोर्चा संभाला।
प्रमुख निशाने और क्षति:
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नेतृत्व परिसर: तेहरान स्थित सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई का आधिकारिक आवास और राष्ट्रपति भवन मुख्य निशाने पर रहे।
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सैन्य नेतृत्व का सफाया: अपुष्ट खबरों और शुरुआती खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के रक्षा मंत्री अमीर नासिरजादेह और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) के जमीनी बल के कमांडर मोहम्मद पाकपुर की इस हमले में मौत हो गई है।
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परमाणु और मिसाइल केंद्र: ईरान के भूमिगत मिसाइल साइलो (Silos) और परमाणु अनुसंधान केंद्रों को पंगु बनाने के लिए ‘बंकर बस्टर’ बमों का इस्तेमाल किया गया।
ईरान का पक्ष: हालांकि इजरायली मीडिया ने खामेनेई के मारे जाने या घायल होने की अटकलें लगाई थीं, लेकिन ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया (NBC News) से बात करते हुए इन दावों को खारिज किया और कहा कि “सर्वोच्च नेता सुरक्षित और जीवित हैं।”
ईरान की जवाबी कार्रवाई: पूरे क्षेत्र में मिसाइलों की बारिश
हमलों के कुछ ही घंटों बाद, ईरान ने अपनी ‘प्रतिशोध की नीति’ के तहत बड़े पैमाने पर जवाबी हमला शुरू किया। ईरान ने न केवल इजरायल को निशाना बनाया, बल्कि उन पड़ोसी देशों पर भी हमला किया जहाँ अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं।
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इजरायल पर हमला: सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलें यरूशलम और तेल अवीव की ओर दागी गईं। हालांकि, इजरायल के ‘एरो’ और ‘डेविड स्लिंग’ रक्षा तंत्र ने अधिकांश मिसाइलों को हवा में ही नष्ट करने का दावा किया है।
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खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकाने: कतर, यूएई (अबू धाबी और दुबई), सऊदी अरब और बहरीन में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें गिरीं। बहरीन में स्थित अमेरिकी पांचवें बेड़े (5th Fleet) के मुख्यालय के पास हुए धमाकों ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है।
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आंतरिक स्थिति: ईरान के 31 में से 20 से अधिक प्रांतों में युद्ध की स्थिति है और वहां ब्लैकआउट व संचार सेवाएं बाधित होने की खबरें हैं।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संकट: तेल और एयरस्पेस
इस युद्ध ने वैश्विक स्तर पर ‘इकोनॉमिक शॉक’ पैदा कर दिया है।
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कच्चे तेल में उछाल: होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), जहाँ से दुनिया का 20% तेल गुजरता है, अब युद्ध क्षेत्र बन गया है। कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने की आशंका है।
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एयरस्पेस ब्लॉक: ईरान, इराक और कई खाड़ी देशों ने अपने हवाई क्षेत्र बंद कर दिए हैं। भारत से यूरोप और अमेरिका जाने वाली उड़ानों को अब लंबे और महंगे रास्तों (सऊदी अरब के दक्षिणी हिस्से या मध्य एशिया) से होकर गुजरना पड़ रहा है।
भारत की चिंता: 50,000 नागरिकों की सुरक्षा
भारत सरकार इस स्थिति पर बेहद करीब से नजर रख रही है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने तत्काल प्रभाव से एक ‘हाई-लेवल कंट्रोल रूम’ स्थापित किया है।
भारतीयों की स्थिति:
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ईरान: लगभग 10,000 भारतीय (ज्यादातर छात्र और श्रमिक)।
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इजरायल: लगभग 40,000 भारतीय नागरिक (मुख्य रूप से केयरगिवर्स और आईटी पेशेवर)।
भारत सरकार की एडवाइजरी:
“भारतीय नागरिक वर्तमान में इन क्षेत्रों की अनावश्यक यात्रा से बचें। जो लोग पहले से वहां मौजूद हैं, वे स्थानीय प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करें और निकटतम भारतीय दूतावास में अपना पंजीकरण सुनिश्चित करें।”
क्या यह तीसरे विश्व युद्ध की आहट है?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष अगले 48 घंटों में नहीं थमा, तो इसमें लेबनान (हिजबुल्लाह), यमन (हुती) और सीरिया जैसे अन्य मोर्चे भी खुल सकते हैं। रूस और चीन की प्रतिक्रिया भी वैश्विक कूटनीति की दिशा तय करेगी। अमेरिका और इजरायल का तर्क है कि यह “आत्मरक्षा” और “परमाणु प्रसार को रोकने” के लिए उठाया गया कदम है, जबकि ईरान इसे “खुली संप्रभुता का उल्लंघन” बता रहा है।
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