कानपुर | शनिवार, 28 मार्च 2026
विश्व हिन्दू परिषद् (VHP) के अंतरराष्ट्रीय संगठन महामंत्री मिलिंद परांडे ने शनिवार को कानपुर प्रवास के दौरान देश की आंतरिक सुरक्षा और सामाजिक ताने-बाने को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। उन्होंने दो-टूक शब्दों में कहा कि “जनसंख्या असंतुलन” आज भारत के भविष्य के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है। यह केवल जनगणना का विषय नहीं है, बल्कि राष्ट्र की आंतरिक शांति और संसाधनों के बंटवारे पर प्रहार करने वाला एक ‘डेमोग्राफिक टाइम बम’ है।
जनसंख्या असंतुलन: आंकड़ों से परे एक कड़वा सच
चैत्र शुक्ल दशमी (विक्रम संवत 2083) के अवसर पर आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि यदि समय रहते एक प्रभावी ‘राष्ट्रीय जनसंख्या नीति’ पर विमर्श नहीं हुआ, तो आने वाली पीढ़ियों को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने संकेत दिया कि देश के कई हिस्सों में बदलती जनसांख्यिकी (Demography) वहां की सांस्कृतिक निरंतरता और आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर रही है।
“राष्ट्र की सुरक्षा केवल सीमाओं पर तैनात सैनिकों से ही सुनिश्चित नहीं होती, बल्कि समाज की आंतरिक चेतना और जनसंरचनात्मक संतुलन से भी होती है।” – मिलिंद परांडे
लव जिहाद और अवैध धर्मांतरण पर ‘जीरो टॉलरेंस’
लव जिहाद और धर्मांतरण जैसे ज्वलंत मुद्दों पर प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि यह महज कुछ घटनाएं नहीं, बल्कि हिंदू समाज की जड़ों पर प्रहार करने वाली एक गहरी प्रवृत्ति है।
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बेटियों की सुरक्षा: लव जिहाद के जरिए हिंदू बेटियों को लक्षित कर सामाजिक और धार्मिक विघटन का माहौल तैयार किया जा रहा है।
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धर्मांतरण का जाल: वंचित और भ्रमित वर्गों को प्रलोभन देकर उनकी सांस्कृतिक पहचान मिटाने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अब हिंदू समाज मौन नहीं रहेगा, बल्कि एक सजग और संगठित दृष्टिकोण के साथ इन षड्यंत्रों का जवाब देगा।
जाति और भाषा के भेदों से ऊपर उठने की अपील
परांडे ने हिंदू समाज से आह्वान किया कि वे जाति, क्षेत्र, भाषा और उपासना पद्धति जैसे स्थानीय मतभेदों को त्याग कर ‘एकात्म भाव’ से खड़े हों। उन्होंने कहा कि एक विभाजित समाज ही सबसे पहले बाहरी षड्यंत्रों का शिकार बनता है। विहिप का मानना है कि ‘हिंदू एकता’ ही जनसंख्या असंतुलन और सांस्कृतिक आक्रमणों के विरुद्ध सबसे बड़ी ढाल है।
रामोत्सव 2026: सांस्कृतिक पुनर्जागरण का मंत्र
वर्तमान में चल रहे रामोत्सव कार्यक्रमों को परांडे ने केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि हिंदू चेतना के पुनर्जागरण का माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन समरसता और राष्ट्रधर्म का संदेश देता है। रामोत्सव के माध्यम से विहिप प्रत्येक मोहल्ले और परिवार तक ‘सांस्कृतिक आत्मविश्वास’ पहुँचाने का कार्य कर रही है।
मुख्य बिंदु:
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जनसंख्या असंतुलन: केवल आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक अस्तित्व का प्रश्न।
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लव जिहाद: बेटियों को निशाना बनाकर पारिवारिक ढांचा तोड़ने का सुनियोजित षड्यंत्र।
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हिंदू एकता: जाति-पाति से ऊपर उठकर संगठित होने का आह्वान।
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रामोत्सव 2026: सांस्कृतिक पुनर्जागरण और हिंदू चेतना का महापर्व।
इन दिग्गजों की रही उपस्थिति
विहिप क्षेत्र संगठन मंत्री गजेन्द्र, विहिप प्रान्त अध्यक्ष राजीव महाना, विहिप प्रान्त मंत्री राजू पोरवाल, विहिप प्रान्त प्रचार प्रसार प्रमुख ओमेंद्र अवस्थी ।
निष्कर्ष:
विश्व हिंदू परिषद ने स्पष्ट कर दिया है कि आगामी समय में संगठन मंदिर मुक्ति अभियान, समान नागरिक संहिता (UCC) और जनसंख्या नियंत्रण जैसे विषयों पर जन-जागरण को और तेज करेगा। 2026 की जनगणना के मद्देनजर भी समाज को अपनी पहचान के प्रति सजग रहने का संदेश दिया गया है।
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