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बंगाल की खाड़ी से उठा चक्रवात अर्णब: आंध्र प्रदेश के तट से टकराया, तबाही और राहत कार्य की पूरी रिपोर्ट

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
9 Min Read

अमरावती।

बंगाल की खाड़ी में बना अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफान ‘अर्णब‘ (Cyclone Arnab) आखिरकार बुधवार सुबह तटीय आंध्र प्रदेश से टकरा गया। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, लैंडफॉल की यह संवेदनशील प्रक्रिया करीब छह घंटे तक चली। सुबह लगभग 8:00 बजे चक्रवात का केंद्र पूरी तरह से जमीन के ऊपर आ चुका था। जमीन से टकराने और घर्षण के कारण चक्रवात अर्णब कमजोर होकर ‘गंभीर चक्रवाती तूफान’ में तब्दील हो गया।

लैंडफॉल के दौरान तटीय क्षेत्रों में 125 से 135 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज गति से हवाएं चलीं, जो बीच-बीच में 150 किलोमीटर प्रति घंटे के खतरनाक झोंकों तक पहुंच गईं। तेज चक्रवाती हवाओं के साथ हुई मूसलाधार बारिश ने आंध्र प्रदेश के कई जिलों में भारी तबाही मचाई है और आम जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है।

 

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नरसापुर के पास हुआ लैंडफॉल: इन जिलों में झेला भारी प्रकोप

IMD की रिपोर्ट के मुताबिक, चक्रवात अर्णब ने आंध्र प्रदेश और केंद्र शासित प्रदेश यानम के तटीय रेखा को नरसापुर के समीप (यानम के दक्षिण-पश्चिम में) पार किया। लैंडफॉल के दौरान और उसके बाद पश्चिम गोदावरी, कोनसीमा, काकीनाडा, कृष्णा और पूर्वी गोदावरी जिलों में लगातार कई घंटों तक तेज आंधी तूफान और मूसलाधार बारिश का सिलसिला जारी रहा।

तूफान के कारण तटीय जिलों में रिकॉर्ड बारिश दर्ज की गई है:

  • विशाखापत्तनम–वॉल्टेयर: 216.9 मिमी
  • कलिंगपट्टनम: 147.5 मिमी
  • तुनी: 123.3 मिमी
  • काकीनाडा: 118.4 मिमी
  • मछलीपट्टनम: 115.2 मिमी

 

1.8 लाख लोगों का सुरक्षित रेस्क्यू: प्रशासन मुस्तैद

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चक्रवात अर्णब के खतरे को देखते हुए आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए व्यापक बचाव अभियान चलाया। आंध्र प्रदेश और ओडिशा के निचले व संवेदनशील इलाकों से 1.8 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित निकालकर राहत शिविरों में पहुंचाया गया है। केवल आंध्र प्रदेश में ही 84,000 से अधिक लोगों को सैकड़ों बनाए गए आश्रय स्थलों में स्थानांतरित किया गया।

राहत और बचाव कार्यों के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की दर्जनों टीमों को मुस्तैद रखा गया है। निचले और संभावित बाढ़ वाले क्षेत्रों पर विशेष नजर रखी जा रही है।

 

सड़कों पर गिरे पेड़ और खंभे, कई जिलों में बिजली गुल

तूफान की भीषण गति के कारण कई तटीय जिलों में सैकड़ों विशालकाय पेड़ और बिजली के खंभे उखड़ गए। मुख्य राजमार्गों और संपर्क मार्गों पर पेड़ गिरने से यातायात पूरी तरह से ठप हो गया है, वहीं कई शहरों और ग्रामीण इलाकों में बिजली आपूर्ति पूरी तरह बाधित हो गई है।

अनेक स्थानों पर कच्चे मकानों को नुकसान पहुंचा है और जलभराव के कारण बाढ़ की स्थिति बन गई है। राहत दल और स्थानीय प्रशासन बुलडोजर व कटर की मदद से सड़कों से मलबे को हटाने और बिजली व्यवस्था बहाल करने में जुटे हुए हैं।

 

रेल और हवाई यातायात बुरी तरह प्रभावित

चक्रवाती तूफान का सीधा असर दक्षिण-पूर्व परिवहन सेवाओं पर पड़ा है:

  • रेल सेवा: सुरक्षा के दृष्टिगत 100 से अधिक ट्रेनों को या तो रद्द कर दिया गया है या उनके समय में बदलाव (पुनर्निर्धारण) किया गया है।
  • हवाई सेवा: आंध्र प्रदेश के प्रमुख तटीय हवाई अड्डों पर उड़ानों का परिचालन और लैंडिंग प्रभावित हुई है।

प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे किसी भी यात्रा पर निकलने से पहले भारतीय रेलवे और नागरिक उड्डयन विभाग की ताजा एडवाइजरी की जांच अवश्य कर लें।

 

मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने मांगी केंद्रीय मदद

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने स्थिति की समीक्षा करते हुए केंद्र सरकार से चक्रवात से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए एक अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम जल्द भेजने का अनुरोध किया है। प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार, कृषि फसलों, कच्चे घरों, सड़कों, संचार तंत्र और बिजली के बुनियादी ढांचे को भारी क्षति पहुंची है।

राज्य सरकार ने नागरिकों की त्वरित सहायता के लिए 1070 और 112 आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं।

हालांकि आधिकारिक तौर पर शुरुआती घंटों में किसी बड़े जान-माल के नुकसान की पुष्टि नहीं हुई थी, लेकिन स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार कुछ मौतों की खबरें सामने आ रही हैं। प्रशासन का कहना है कि बचाव अभियान पूरा होने के बाद ही जनहानि का सही और सटीक आंकड़ा सामने आ सकेगा।

 

लैंडफॉल के बाद भी खतरा टला नहीं: IMD का अलर्ट

मौसम विभाग ने साफ किया है कि लैंडफॉल पूरा होने के बाद भी चक्रवात का खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। अर्णब उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हुए धीरे-धीरे और कमजोर पड़ेगा। इसके बावजूद इसके असर से आंध्र प्रदेश, ओडिशा और पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों में अगले 24 से 48 घंटों तक तेज हवाओं के साथ भारी बारिश और स्थानीय स्तर पर बाढ़ की स्थिति बनी रह सकती है।

 

तूफान के दौरान और बाद में सुरक्षा के लिए जरूरी प्रशासनिक सलाह

  1. घरों के अंदर रहें: जब तक हवाएं पूरी तरह शांत न हों और प्रशासन हरी झंडी न दे, घर से बाहर न निकलें।
  2. बिजली के बुनियादी ढांचे से दूर रहें: गिरे हुए बिजली के तारों, खंभों और ट्रांसफार्मर के पास न जाएं और न ही उन्हें छुएं।
  3. कमजोर ढांचों और पेड़ों से दूरी बनाएं: बड़े और पुराने पेड़ों या होर्डिंग्स के नीचे खड़े होने से बचें।
  4. जलभराव वाले रास्तों पर गाड़ी न चलाएं: जलमग्न सड़कों और पुलों को पार करने की कोशिश न करें।
  5. मछुआरे समुद्र में न जाएं: समुद्र में ऊंची लहरें उठने की आशंका के चलते मछुआरे तटीय सीमा से दूर रहें।
  6. आधिकारिक अपडेट पर भरोसा करें: केवल मौसम विभाग (IMD) और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी अलर्ट का ही पालन करें।

 

Frequently Asked Questions (FAQs)

Q1: चक्रवात अर्णब ने किस स्थान पर लैंडफॉल किया?

उत्तर: चक्रवात अर्णब ने आंध्र प्रदेश और यानम के तट को नरसापुर के पास (यानम के दक्षिण-पश्चिम में) पार किया।

Q2: लैंडफॉल के दौरान चक्रवात की रफ्तार कितनी थी?

उत्तर: लैंडफॉल के दौरान लगातार हवा की रफ्तार 125 से 135 किमी/घंटा थी, जो झोंकों में 150 किमी/घंटा तक पहुंच गई थी।

Q3: आपदा से निपटने के लिए क्या आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं?

उत्तर: आंध्र प्रदेश सरकार ने नागरिकों की आपातकालीन सहायता के लिए 1070 और 112 हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं।

Q4: चक्रवात से कौन–कौन से जिले सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं?

उत्तर: काकीनाडा, कोनसीमा, पूर्वी गोदावरी, पश्चिम गोदावरी, एलुरु, विशाखापत्तनम और कृष्णा जिले चक्रवात अर्णब से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं।

 

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह लेख मौसम विभाग (IMD) और स्थानीय प्रशासनिक रिपोर्टों के आधार पर तैयार किया गया है। आपदा की स्थिति में पल–पल बदलते अपडेट्स और सुरक्षा निर्देशों के लिए कृपया स्थानीय राज्य सरकार और मौसम विभाग के आधिकारिक स्रोतों का ही अनुसरण करें।

 

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।