काठमांडू । शनिवार, 29 अगस्त 2026
नेपाल में भोटेकोशी और त्रिशूली नदी घाटी में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के कारण हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। नेपाल पुलिस और राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, मृतकों की संख्या 538 तक पहुंच गई है, जबकि 977 से अधिक लोग अब भी लापता हैं। आपदा के बाद मलबे और पानी के जमाव से बनी नई अस्थायी झीलों में जलस्तर बढ़ने के कारण निचले इलाकों और त्रिशूली नदी घाटी में एक बार फिर तबाही की आशंका गहरा गई है।
त्रिशूली हाइड्रोपावर परियोजना की सुरंग से 350 लोग सुरक्षित निकाले गए
आपदा के बीच रासुवा जिले में स्थित अपर त्रिशूली हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट (Upper Trishuli Hydropower Project) की सुरंग सैकड़ों मजदूरों के लिए जीवनरक्षक साबित हुई। बाढ़ और चट्टानों के गिरने के समय करीब 350 मजदूरों और स्थानीय कर्मचारियों ने इस सुरंग में शरण ली थी।
नेपाली सेना और सुरक्षा बलों ने अत्यंत जोखिम भरे इलाके में हेलीकॉप्टर और विशेष उपकरणों की मदद से बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर सभी 350 लोगों को सुरंग से सुरक्षित बाहर निकाल लिया है।
63 भारतीय नागरिक सुरक्षित, भारत ने भेजी तीसरी रेस्क्यू टीम
बचाव अभियान के दौरान सुरक्षित निकाले गए लोगों में 63 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं, जो मुख्य रूप से जलविद्युत परियोजना में कार्यरत थे।
भारत सरकार ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों की सहायता और तलाश के लिए तीसरी रेस्क्यू टीम भी रवाना कर दी है। हालांकि, अभी भी 315 से अधिक भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पाया है, जिसके चलते भारत में उनके परिजनों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। विदेश मंत्रालय और काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास राहत कार्यों का निरंतर समन्वय कर रहे हैं।
93,000 से अधिक लोग प्रभावित, रेड क्रॉस ने जताया गहरा दुख
नेपाल के केंद्रीय और उत्तरी जिलों में इस जल-प्रलय से 93,000 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। सैकड़ों घर, पुल, सड़कें और बुनियादी ढांचा पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं। बेघर हुए हजारों लोग विभिन्न राहत शिविरों में शरण लेने को मजबूर हैं।
अंतर्राष्ट्रीय रेड क्रॉस (ICRC) ने प्रभावित समुदायों की मानसिक और मानवीय स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि लोगों का “Trauma Enormous” (अत्यधिक गहरा मानसिक आघात) है। राहत एजेंसियां दुर्गम क्षेत्रों में भोजन, स्वच्छ पेयजल, दवाइयां और तिरपाल पहुंचाने के लिए युद्ध स्तर पर जुटी हुई हैं।
नई झील ओवरफ्लो होने से दोबारा बाढ़ का बड़ा खतरा
तिब्बत-नेपाल सीमा पर मलबे और हिमस्खलन के कारण नदियों के प्राकृतिक प्रवाह के रुकने से कई अस्थायी बैरियर झीलें (Barrier Lakes) बन गई हैं। NDRRMA के अनुसार, इन झीलों में अचानक जलस्तर बढ़ने या उनके ओवरफ्लो होने से त्रिशूली और भोटेकोशी के निचले इलाकों में दोबारा फ्लैश फ्लड (अचानक बाढ़) आने की तीव्र आशंका है।
प्रशासन ने संवेदनशील तटीय क्षेत्रों में हाई अलर्ट जारी किया है और खोज एवं बचाव अभियानों में लगी टीमों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की ताकीद दी है।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
Q1: नेपाल में आई हालिया बाढ़ में मृतकों और लापता लोगों की संख्या कितनी है?
Ans: इस विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन में अब तक 538 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और 977 से अधिक लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
Q2: त्रिशूली हाइड्रोपावर परियोजना की सुरंग से कितने लोगों को निकाला गया?
Ans: रासुवा जिले की अपर त्रिशूली हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट टनल से नेपाली सेना ने लगभग 350 लोगों को सुरक्षित रेस्क्यू किया है।
Q3: इस आपदा में फंसे भारतीय नागरिकों के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
Ans: रेस्क्यू में 63 भारतीयों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। भारत ने फंसे अन्य नागरिकों तक पहुंचने के लिए अपनी तीसरी रेस्क्यू टीम भी नेपाल भेजी है।
Q4: नेपाल में दोबारा बाढ़ का खतरा क्यों मंडरा रहा है?
Ans: बाढ़ के बाद बने मलबे के कारण त्रिशूली और भोटेकोशी नदी क्षेत्रों में नई बैरियर झीलें बन गई हैं। इनके ओवरफ्लो होने या टूटने की आशंका से दोबारा बाढ़ का अलर्ट जारी किया गया है।
Disclaimer
यह समाचार रिपोर्ट उपलब्ध प्राथमिक जानकारियों, नेपाल आपदा प्रबंधन (NDRRMA) और आधिकारिक राहत एजेंसियों द्वारा जारी आंकड़ों पर आधारित है। स्थिति और आंकड़ों में समय के अनुसार बदलाव संभव है।
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