काठमांडू | रविवार, 30 अगस्त 2026
नेपाल में बीते 26 अगस्त 2026 को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड (Flash Flood) और हिमालयी ग्लेशियर टूटने (Glacier Collapse) के बाद से स्थिति अत्यंत गंभीर बनी हुई है। मलबे के साथ आई भयानक बाढ़ ने मध्य नेपाल के रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग जिलों सहित पूरी घाटी में व्यापक तबाही मचाई है। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, इस आपदा में अब तक 734 लोगों की मृत्यु की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 2,498 लोग अभी भी लापता या संपर्क से बाहर हैं।
भोटेकोशी नदी में दोबारा बढ़ा जलस्तर, नए सिरे से अलर्ट जारी
रविवार को भोटेकोशी और त्रिशूली नदी घाटी में बारिश के बाद जलस्तर दोबारा बढ़ने से तटीय इलाकों में नए खतरे की आशंका गहरा गई है। प्रशासन ने नदी किनारे बसे निवासियों और बचाव दलों को उच्च सतर्कता (High Alert) बरतने की सख्त सलाह दी है।
लगातार हो रही बारिश, नदियों द्वारा बदले गए मार्ग और अत्यधिक अस्थिर पहाड़ी ढलानों के कारण राहत अभियान में काफी बाधाएं आ रही हैं। निचले मैदानी क्षेत्रों और भारत के सीमावर्ती राज्यों (बिहार और उत्तर प्रदेश) में गंडक नदी प्रणाली के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
भूस्खलन से अस्थायी बांध (Landslide Dams) बनने का जोखिम
पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रहे नए भूस्खलन और मलबे के जमाव से नदियों का प्रवाह बाधित होकर ‘अस्थायी मलबे के बांध’ बनने की आशंका जताई जा रही है। यदि ये अस्थायी अवरोध पानी का दबाव न झेल पाने के कारण अचानक टूटते हैं, तो निचले इलाकों में विनाशकारी ‘सेकेंडरी फ्लैश फ्लड’ आ सकती है। भूवैज्ञानिक और आपदा विशेषज्ञ उपग्रह तस्वीरों तथा ड्रोन की मदद से इन संवेदनशील स्थानों पर नजर बनाए हुए हैं।
हाइड्रोपावर सुरंगों में फंसे लोगों के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन तेज
आपदा का सबसे जटिल और चुनौतीपूर्ण पहलू जलविद्युत (Hydropower) परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे दर्जनों श्रमिकों और इंजीनियरों को सुरक्षित निकालना है। बाढ़ का मलबा और गाद सुरंगों के मुहाने तक भर जाने के कारण ऑक्सीजन सप्लाई और भारी मशीनों की मदद से रास्ता बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
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अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञ सहयोग: सुरंगों के विशेष रेस्क्यू ऑपरेशन में भारत, चीन और दक्षिण कोरिया के विशेषज्ञ तकनीकी उपकरणों और बचाव दल के साथ नेपाल सुरक्षा बलों का सहयोग कर रहे हैं।
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सुरक्षा बलों की तैनाती: नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस के हजारों जवानों सहित दर्जनों हेलीकॉप्टरों को राहत, खोज व आपूर्ति कार्यों में लगाया गया है।
8,186 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला गया
विकट परिस्थितियों के बावजूद अब तक 8,186 से अधिक लोगों को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थानों व राहत शिविरों तक पहुंचाया जा चुका है। हालांकि, भारतीय तीर्थयात्रियों (कैलाश मानसरोवर मार्ग पर) और विदेशी पर्यटकों सहित सैकड़ों लोग अभी भी लापता हैं, जिनकी खोज नदी के किनारों, मलबे के नीचे और अस्पतालों में लगातार जारी है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: नेपाल में 26 अगस्त 2026 को आई बाढ़ का मुख्य कारण क्या था?
उत्तर: वैज्ञानिक और उपग्रह विश्लेषण (USGS) के अनुसार, नेपाल-तिब्बत सीमा पर करीब 5,200 मीटर की ऊंचाई पर एक बड़े ग्लेशियर के ढहने (Glacial Collapse) और चट्टानी मलबे के अचानक ल्हेंदे खोला/भोटेकोशी नदी में गिरने से यह भीषण फ्लैश फ्लड उत्पन्न हुई।
Q2: क्या इस आपदा का असर भारत के सीमावर्ती इलाकों पर भी पड़ा है?
उत्तर: हां, भोटेकोशी और त्रिशूली नदियां आगे चलकर गंडक नदी का रूप लेती हैं। बाढ़ के मद्देनजर उत्तर प्रदेश और बिहार के सीमावर्ती जिलों में प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है।
Q3: राहत और बचाव कार्य में कौन-कौन से देश सहयोग कर रहे हैं?
उत्तर: नेपाल सुरक्षा बलों के अलावा भारत, चीन और दक्षिण कोरिया की विशेष रेस्क्यू टीम, सुरंग विशेषज्ञ और तकनीकी दल राहत अभियान में सहयोग दे रहे हैं।
अस्वीकरण (Disclaimer)
यह समाचार लेख नेपाल आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) और अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों द्वारा 30 अगस्त 2026 तक जारी आधिकारिक जानकारी एवं डेटा के आधार पर तैयार किया गया है। स्थिति परिवर्तनशील होने के कारण आंकड़ों में बदलाव संभव है।
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