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नई दिल्ली. भारत की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित दूसरी भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने आतंकवाद के खिलाफ बेहद कड़ा और स्पष्ट रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ (शून्य सहनशीलता) को अब केवल नीति नहीं, बल्कि एक अटल और समझौता-रहित वैश्विक मानक बनाया जाना चाहिए।
1. जीरो टॉलरेंस: कोई समझौता नहीं
विदेश मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आतंकवाद के प्रति शून्य सहनशीलता एक सार्वभौमिक नियम होना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एक स्वर में यह संदेश देना होगा कि आतंकवाद के लिए दुनिया में कहीं भी कोई स्थान नहीं है।
2. किसी भी रूप में औचित्य अस्वीकार्य
जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद चाहे किसी भी विचारधारा, कारण या राजनीतिक तर्क के नाम पर किया जाए, उसके लिए कोई नैतिक या कानूनी औचित्य नहीं हो सकता। उन्होंने यह भी जोड़ा कि आतंकवाद के प्रति चयनात्मक रवैया या चुप्पी वैश्विक सुरक्षा के लिए घातक है।
3. आत्मरक्षा का संप्रभु अधिकार
उन्होंने दोहराया कि जिन देशों को आतंकवाद का सामना करना पड़ता है, उन्हें अपनी रक्षा करने का पूर्ण संप्रभु अधिकार है। ऐसे देश अपनी सुरक्षा और नागरिकों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने के लिए स्वतंत्र हैं।
4. सीमा-पार आतंकवाद पूरी तरह अस्वीकार्य
जयशंकर ने विशेष रूप से सीमा-पार आतंकवाद की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभुता और कूटनीति के बुनियादी सिद्धांतों का खुला उल्लंघन है।
भारत-अरब बैठक का व्यापक संदर्भ
यह बैठक करीब एक दशक के अंतराल के बाद आयोजित हुई, जिसमें अरब जगत के कई देशों के विदेश मंत्रियों ने भाग लिया। बैठक में आतंकवाद के अलावा पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति, क्षेत्रीय संघर्ष, वैश्विक भू-राजनीतिक बदलाव, ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
जयशंकर ने कहा कि मौजूदा दौर वैश्विक व्यवस्था में परिवर्तन का समय है और ऐसे में भारत व अरब देशों के बीच रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने की जरूरत है।
भारत-अरब साझेदारी और भविष्य की दिशा
बैठक के दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि भारत और अरब देशों के संबंध केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि सुरक्षा, व्यापार, ऊर्जा, निवेश, तकनीक और सांस्कृतिक सहयोग तक विस्तृत हैं। आतंकवाद के खिलाफ साझा रणनीति को इस साझेदारी का एक अहम स्तंभ बताया गया।
नई दिल्ली में आयोजित दूसरी भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक में दिया गया यह बयान भारत की उस स्पष्ट नीति को दर्शाता है, जिसमें आतंकवाद के खिलाफ कोई नरमी नहीं है। ‘जीरो टॉलरेंस’ को वैश्विक मानक बनाने की अपील भारत को आतंकवाद-रोधी वैश्विक प्रयासों में एक मजबूत और निर्णायक आवाज के रूप में स्थापित करती है।
Matribhumisamachar


