मुंबई | सोमवार, 31 अगस्त 2026
वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) की पहली तिमाही और शुरुआती महीनों में केंद्र सरकार के वित्तीय प्रबंधन को लेकर सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीनों (अप्रैल से जुलाई 2026) के दौरान देश का राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) ₹4.55 लाख करोड़ दर्ज किया गया है। यह आंकड़ा पूरे वित्त वर्ष के लिए तय किए गए ₹16.96 लाख करोड़ के बजट अनुमान (Budget Estimate) का मात्र 26.8% है।
केंद्र सरकार ने इस वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 4.3% तक सीमित रखने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। शुरुआती चार महीनों के आंकड़े दर्शाते हैं कि सरकार वर्तमान में अपने निर्धारित वित्तीय मार्ग पर मजबूती से आगे बढ़ रही है।
पिछले वित्त वर्ष की तुलना में बेहतर प्रदर्शन
यदि इसकी तुलना पिछले साल की समान अवधि से की जाए, तो चालू वित्त वर्ष में स्थिति काफी बेहतर नजर आती है। अप्रैल-जुलाई 2025 (FY26) में राजकोषीय घाटा करीब ₹4.70 लाख करोड़ था, जो उस समय के वार्षिक बजट लक्ष्य का 29.9% पहुंच गया था।
इस प्रकार, इस वर्ष शुरुआती चार महीनों के भीतर सरकार ने अपने घाटे में लगभग ₹15,000 करोड़ की कमी दर्ज की है। यह कमी बेहतर कर वसूली, कुशल व्यय प्रबंधन और गैर-कर राजस्व में हुई बढ़ोतरी के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है।
आय और खर्च का लेखा-जोखा: कहाँ से आया और कहाँ गया पैसा?
सरकार के वित्तीय प्रदर्शन को समझने के लिए प्राप्तियों (Receipts) और व्यय (Expenditure) के आंकड़ों का विश्लेषण अत्यंत आवश्यक है:
1. कुल प्राप्तियां (Total Receipts)
अप्रैल-जुलाई 2026 के दौरान सरकार को कुल ₹13.07 लाख करोड़ की प्राप्ति हुई, जो पूरे FY27 बजट अनुमान का 35.8% है।
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शुद्ध कर राजस्व (Net Tax Revenue): लगभग ₹8.45 लाख करोड़ दर्ज किया गया।
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गैर-कर राजस्व (Non-Tax Revenue): ₹4.23 लाख करोड़ रहा।
2. कुल खर्च (Total Expenditure)
इस अवधि में सरकार का कुल व्यय ₹17.62 लाख करोड़ रहा, जो कि बजट में तय अनुमान का 32.9% है।
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पूंजीगत खर्च (Capital Expenditure): इस दौरान कैपेक्स (Capex) लगभग ₹4.51 लाख करोड़ रहा। पूंजीगत खर्च में यह गति सरकार की बुनियादी ढांचा (Infrastructure), सड़कें, रेलवे और दीर्घकालिक परिसंपत्तियों के निर्माण पर केंद्रित नीतियों को दर्शाती है।
RBI के रिकॉर्ड डिविडेंड ने दी सरकारी खजाने को मजबूती
चालू वित्त वर्ष के शुरुआती महीनों में राजकोषीय घाटे को नियंत्रण में रखने में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की अहम भूमिका रही है।
भारतीय रिजर्व बैंक ने सरकार को ₹2.87 लाख करोड़ का रिकॉर्ड डिविडेंड (लाभांश) हस्तांतरित किया है। यह राशि पिछले साल मिले ₹2.69 लाख करोड़ के डिविडेंड से काफी अधिक है। इस विशाल गैर-कर आय ने सरकारी खजाने की लिक्विडिटी स्थिति को काफी हद तक मजबूत किया और शुरुआती महीनों में बाजार से अतिरिक्त कर्ज लेने की जरूरत को कम किया।
आर्थिक विश्लेषकों की राय और भविष्य की राह
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अप्रैल से जुलाई का यह आंकड़ा सरकार के लिए राहत की बात है। हालांकि, वित्त वर्ष के अगले आठ महीने अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे।
आने वाले त्यौहारी सीजन में सरकारी खर्चों की रफ्तार, सब्सिडी का बोझ, ग्रामीण मांग में सुधार और प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कर संग्रह (GST Collection) की दिशा यह तय करेगी कि क्या भारत FY27 के अंत तक अपने 4.3% GDP घाटे के लक्ष्य को आसानी से हासिल कर पाएगा या नहीं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Q1. राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) क्या होता है?
Ans: राजकोषीय घाटा सरकार की कुल आय (उधार को छोड़कर) और कुल खर्च के बीच का अंतर होता है। यह यह दर्शाता है कि सरकार को अपने खर्चों को पूरा करने के लिए कितनी धनराशि बाजार से उधार लेनी पड़ रही है।
Q2. FY27 के लिए सरकार ने राजकोषीय घाटे का क्या लक्ष्य रखा है?
Ans: केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 4.3% (लगभग ₹16.96 लाख करोड़) तक सीमित रखने का लक्ष्य तय किया है।
Q3. अप्रैल-जुलाई 2026 में राजकोषीय घाटा कितना रहा है?
Ans: इस अवधि के दौरान राजकोषीय घाटा ₹4.55 लाख करोड़ दर्ज किया गया है, जो कि सालाना लक्ष्य का 26.8% है।
Q4. गैर-कर राजस्व (Non-Tax Revenue) में अचानक बढ़ोतरी का मुख्य कारण क्या है?
Ans: गैर-कर राजस्व में बड़ी वृद्धि का मुख्य कारण भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा सरकार को दिया गया ₹2.87 लाख करोड़ का रिकॉर्ड लाभांश (Dividend) है।
अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख केवल सूचनात्मक और शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए तैयार किया गया है। इसमें प्रस्तुत आंकड़े आधिकारिक बजटीय रिपोर्ट्स और प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के हालिया डेटा पर आधारित हैं। वित्तीय निवेश या निर्णय लेने से पहले किसी प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।
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