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अयोध्या राम मंदिर दान व्यवस्था: 15 करोड़ श्रद्धालुओं का भरोसा और ₹500 करोड़ के चढ़ावे की पूरी सच्चाई

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अयोध्या राम मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं द्वारा उपयोग किए जाने वाले कंप्यूटरीकृत दान काउंटर और पारदर्शी दानपात्र की सुरक्षा व्यवस्था।

अयोध्या । मंगलवार, 9 जून 2026

अयोध्या में प्रभु श्री रामलला की भव्य प्राण-प्रतिष्ठा के बाद से ही राम नगरी में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ रहा है। देश-विदेश से आने वाले भक्त न केवल रामलला के दर्शन कर रहे हैं, बल्कि मंदिर के विकास और सेवा कार्यों के लिए दिल खोलकर दान भी दे रहे हैं। ताजा आंकड़ों के अनुसार, अब तक 15 करोड़ से अधिक श्रद्धालु अयोध्या पहुंच चुके हैं और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को 500 करोड़ रुपये से अधिक का कुल दान प्राप्त हो चुका है।

हाल ही में राम मंदिर के चढ़ावे और दानपात्रों को लेकर कुछ राजनीतिक बयानबाजियां और विवाद भी सामने आए हैं, जिसके बाद ट्रस्ट ने पूरी व्यवस्था को लेकर पारदर्शिता स्पष्ट की है। आइए जानते हैं कि राम मंदिर में आने वाले करोड़ों रुपये के चढ़ावे का हिसाब-किताब कैसे रखा जाता है और इसमें सुरक्षा के क्या इंतजाम हैं।

राम मंदिर में दान और चढ़ावे के मुख्य आंकड़े (एक नज़र में)

ट्रस्ट द्वारा साझा की गई जानकारियों और वित्तीय समीक्षा के आधार पर रामलला को मिले दान का गणित कुछ इस प्रकार है:

  • कुल श्रद्धालु संख्या: 15 करोड़ से अधिक (प्राण-प्रतिष्ठा से अब तक)

  • कुल प्राप्त दान राशि: ₹500 करोड़ से अधिक

  • प्रति श्रद्धालु औसत दान: लगभग ₹33 से अधिक

  • दैनिक औसत चढ़ावा: ₹8 लाख से ₹10 लाख प्रतिदिन

इसमें से लगभग 150 करोड़ रुपये सीधे दानपात्रों (हुंडी) के जरिए नकद प्राप्त हुए हैं, जबकि शेष 350 करोड़ रुपये ऑनलाइन माध्यमों (UPI, नेट बैंकिंग) और मंदिर परिसर में बने काउंटरों से मिले हैं।

दान प्रबंधन की त्रि-स्तरीय पारदर्शी व्यवस्था

राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और अन्य अधिकारियों के अनुसार, मंदिर में आने वाले एक-एक रुपये का पूरा हिसाब सुरक्षित रखा जाता है। इसके लिए तीन मुख्य स्तरों पर काम होता है:

1. आधुनिक तकनीक और सीसीटीवी की निगरानी

राम मंदिर परिसर में कुल 6 बड़े मुख्य दानपात्र और दर्शन मार्ग सहित अन्य मंदिरों में करीब 4 दर्जन दानपात्र लगाए गए हैं। इसके अलावा 4 से 10 कंप्यूटरीकृत काउंटर बनाए गए हैं जहाँ नकद दान देकर तुरंत रसीद ली जा सकती है। दानपात्रों से रकम निकालने से लेकर उसकी गिनती होने तक की पूरी प्रक्रिया वॉयस रिकॉर्डिंग से लैस सीसीटीवी (CCTV) कैमरों की सीधी निगरानी में होती है।

2. बैंक कर्मचारियों और विशेषज्ञों द्वारा गिनती

चढ़ावे की गिनती का काम बेहद संवेदनशील है। इसके लिए भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के लगभग 15 कर्मचारी और ट्रस्ट के 25 अधिकारी व कर्मी मिलकर दो शिफ्टों में नोटों की गिनती करते हैं। प्रतिदिन की गिनती के बाद राशि को उसी दिन या अगले दिन बैंक के मुख्य खाते में जमा कर दिया जाता है। यदि कोई राशि शेष बचती है, तो उसे सीलबंद बैग में सुरक्षित रूम (Strong Room) में रखा जाता है।

3. चार्टर्ड एकाउंटेंट (CA) द्वारा छमाही ऑडिट

पारदर्शिता को और मजबूत करने के लिए ट्रस्ट द्वारा वर्ष में दो बार (प्रत्येक छमाही) पूरे आय-व्यय का इंटरनल और एक्सटर्नल ऑडिट कराया जाता है। इसके लिए चार्टर्ड एकाउंटेंट की विशेष टीम नियुक्त है, जो पाई-पाई का हिसाब ट्रस्ट की मुख्य बैठक में पदाधिकारियों के सामने प्रस्तुत करती है।

महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण

हाल के दिनों में विपक्षी नेताओं द्वारा राम मंदिर के दानपात्र से राशि गायब होने के कथित आरोपों के बाद आम जनता में असमंजस की स्थिति बनी थी। हालाँकि, हालिया आधिकारिक वित्तीय रिपोर्ट (वर्ष 2025-26) ने यह साफ कर दिया है कि:

  1. कोई अनियमितता नहीं: ट्रस्ट के भारतीय स्टेट बैंक (SBI) खाते में वर्तमान में लगभग 1,940 करोड़ रुपये सुरक्षित जमा हैं (जिसमें विभिन्न बैंकों से मिला ब्याज भी शामिल है)।

  2. सटीक मिलान: सीसीटीवी फुटेज और डेली बैंक रसीदों का मिलान रोजाना किया जाता है, जिससे किसी भी स्तर पर हेराफेरी की गुंजाइश खत्म हो जाती है। ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि अफवाहों के विपरीत दान की व्यवस्था पूरी तरह सुरक्षित है और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत आंतरिक टीम द्वारा सख्त कार्रवाई की जाती है।

दान राशि का कहाँ होगा उपयोग?

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुसार, भक्तों द्वारा समर्पित इस राशि का उपयोग मुख्य रूप से राम मंदिर के सुंदरीकरण, परिसर की देखरेख, श्रद्धालुओं के लिए जरूरी सुविधाओं के विस्तार, भव्य सेवा कार्यों (जैसे मुफ़्त भोजन/अन्नक्षेत्र) और ट्रस्ट की भविष्य की जनकल्याणकारी योजनाओं को संचालित करने में किया जा रहा है।

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