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उत्तर प्रदेश में फिर लौटेगा मानसून: 18 जुलाई से लखनऊ समेत कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, उमस भरी गर्मी से मिलेगी राहत

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
6 Min Read

लखनऊ । गुरुवार, 16 जुलाई 2026

उत्तर प्रदेश के निवासियों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है। पिछले कुछ दिनों से सूबे में मानसून की रफ्तार धीमी पड़ने की वजह से लोग उमस और भीषण गर्मी से बेहाल थे। दिनभर की तेज धूप और हवा में अत्यधिक नमी (आर्द्रता) के कारण चिपचिपी गर्मी ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। लेकिन अब इस स्थिति से जल्द ही निजात मिलने वाली है।

भारतीय मौसम विभाग (IMD) के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, उत्तर प्रदेश में मानसून एक बार फिर पूरी ताकत के साथ सक्रिय होने जा रहा है। 18 जुलाई से राज्य के अधिकांश हिस्सों में बारिश की गतिविधियों में तेजी आने की पूरी संभावना जताई गई है।

क्यों बदला मौसम का मिजाज?

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में एक नया मौसमीय तंत्र (Weather System) विकसित हुआ है। इसके साथ ही मानसूनी ट्रफ (Monsoon Trough) भी तेजी से सक्रिय हो रही है। इन दोनों प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव के कारण पूर्वी, मध्य और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के वायुमंडल में बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। यही वजह है कि अगले दो दिनों के भीतर यूपी का मौसम पूरी तरह करवट ले लेगा और गरज-चमक के साथ झमाझम बारिश का दौर शुरू हो जाएगा।

इन जिलों में मौसम विभाग ने जताया अनुमान

IMD की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के लगभग सभी प्रमुख क्षेत्रों में मध्यम से भारी वर्षा हो सकती है। विशेष रूप से निम्नलिखित जिलों और उनके आस-पास के इलाकों में बादलों की आवाजाही और बारिश की गतिविधियां सबसे ज्यादा देखी जाएंगी:

  • मध्य और पूर्वी यूपी: लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर और अयोध्या।

  • पश्चिमी और उत्तरी यूपी: बरेली, झांसी, आगरा और मेरठ।

मौसम विभाग ने आगाह किया है कि बारिश के साथ-साथ कुछ स्थानों पर तेज हवाएं चल सकती हैं और आकाशीय बिजली गिरने (Thunderstorm with Lightning) की भी गंभीर आशंका है।

तापमान में आएगी गिरावट, किसानों के चेहरे खिले

इस मानसूनी बारिश की शुरुआत के साथ ही उत्तर प्रदेश के अधिकतम तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की भारी गिरावट दर्ज की जा सकती है। तापमान कम होने से पिछले कई दिनों से पड़ रही उमस भरी गर्मी पूरी तरह खत्म हो जाएगी और मौसम सुहावना हो जाएगा।

यह बदलाव आम जनता के साथ-साथ राज्य के अन्नदाताओं (किसानों) के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं है। कृषि विशेषज्ञों और मौसम विभाग का कहना है कि यह बारिश खरीफ की फसलों, विशेषकर धान की खेती के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगी। खेतों को प्रचुर मात्रा में प्राकृतिक नमी मिलने से फसलों की ग्रोथ अच्छी होगी और पानी की किल्लत दूर होगी।

प्रशासन ने जारी की गाइडलाइन: बरतें सावधानी

संभावित भारी बारिश और बिजली गिरने की आशंका को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग ने आम लोगों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है:

  1. खुले स्थानों से बचें: गरज-चमक या बिजली कड़कने के दौरान खुले मैदानों, ऊंचे पेड़ों और बिजली के खंभों या ट्रांसफार्मर के पास बिल्कुल न खड़े हों।

  2. जलभराव से दूरी: भारी बारिश के कारण जिन इलाकों में जलभराव (Waterlogging) हो जाता है, वहां अनावश्यक आवागमन करने से बचें।

  3. अपडेट रहें: मौसम विभाग द्वारा समय-समय पर जारी की जाने वाली तात्कालिक चेतावनियों (Nowcasts) पर नजर बनाए रखें।

विशेषज्ञों का मानना है कि 18 जुलाई से शुरू हो रहा यह नया स्पेल जुलाई के दूसरे पखवाड़े (Second Half of July) में उत्तर प्रदेश को सामान्य से बेहतर बारिश की ओर ले जाएगा, जिससे मानसून का कोटा समय पर पूरा होने की उम्मीद है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. उत्तर प्रदेश में मानसून दोबारा कब से सक्रिय हो रहा है?

मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम के कारण यूपी में 18 जुलाई से मानसून के दोबारा सक्रिय होने और बारिश बढ़ने की संभावना है।

Q2. इस बारिश से तापमान में कितनी गिरावट आ सकती है?

बारिश का दौर शुरू होने के बाद उत्तर प्रदेश के अधिकतम तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की कमी आ सकती है, जिससे उमस से राहत मिलेगी।

Q3. मौसम विभाग ने किन जिलों के लिए अलर्ट जारी किया है?

विशेष रूप से लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, अयोध्या, बरेली, झांसी, आगरा और मेरठ सहित कई जिलों में मध्यम से भारी बारिश का पूर्वानुमान है।

Q4. गरज-चमक और बिजली कड़कने के दौरान क्या सावधानियां रखनी चाहिए?

खराब मौसम के दौरान खुले मैदानों, पेड़ों के नीचे या बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचें और सुरक्षित पक्के मकानों के अंदर रहें।

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह लेख मौसम विभाग (IMD) द्वारा जारी किए गए वर्तमान पूर्वानुमानों और उपलब्ध समाचार माध्यमों पर आधारित है। मौसम की स्थितियां वायुमंडलीय बदलावों के कारण तेजी से बदल सकती हैं। किसी भी यात्रा या कृषि संबंधी बड़े निर्णय से पहले स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की लाइव चेतावनियों की जांच अवश्य कर लें।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।