मुंबई | सोमवार, 10 अगस्त 2026
भारतीय सर्राफा बाजार में हफ्ते के पहले दिन यानी सोमवार को सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। कीमती धातुओं के बाजार में जारी इस हलचल के बीच निवेशकों की नजर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार के संकेतों पर टिकी हुई है। जहां सोना ₹1.52 लाख प्रति 10 ग्राम के उच्च स्तर के आसपास बना हुआ है, वहीं चांदी ₹2.33 लाख प्रति किलोग्राम के पार पहुंच कर निवेशकों के लिए चर्चा का प्रमुख केंद्र बनी हुई है।
1. चांदी की रिकॉर्ड तेजी ने क्यों बढ़ाई निवेशकों की दिलचस्पी?
पिछले एक साल के दौरान चांदी के प्रदर्शन ने सभी को चौंकाया है। चांदी सिर्फ एक पारंपरिक कीमती धातु (Precious Metal) नहीं है, बल्कि यह एक महत्वपूर्ण औद्योगिक धातु भी है।
-
औद्योगिक मांग (Industrial Demand): सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और सेमीकंडक्टर निर्माण में चांदी का व्यापक इस्तेमाल होता है। वैश्विक स्तर पर ग्रीन एनर्जी की ओर बढ़ते कदम के कारण इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।
-
आपूर्ति में कमी (Supply Constraints): खदानों से आपूर्ति सीमित रहने के कारण बाजार में चांदी की मांग और पूर्ति के बीच असंतुलन बना हुआ है।
-
सोने की मजबूती: जब सोने के दाम बढ़ते हैं, तो निवेशक अपेक्षाकृत सुलभ विकल्प के तौर पर चांदी की ओर रुख करते हैं।
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि औद्योगिक गतिविधियां इसी तरह मजबूत रहीं, तो चांदी में तेजी का सिलसिला आगे भी जारी रह सकता है।
2. सोने की चाल पर किन अंतरराष्ट्रीय कारकों का है असर?
सोने को लंबे समय से आर्थिक और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के समय में सबसे ‘सुरक्षित निवेश’ (Safe Haven Asset) माना जाता है। वर्तमान में सोने के दामों पर निम्नलिखित कारकों का प्रभाव देखा जा रहा है:
-
वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और अनिश्चितता के चलते निवेशक सुरक्षित संपत्ति के रूप में सोने की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
-
केंद्रीय बैंकों की खरीदारी: दुनिया भर के केंद्रीय बैंक लगातार अपने स्वर्ण भंडार (Gold Reserve) को मजबूत कर रहे हैं।
-
ब्याज दरें और अमेरिकी डॉलर: अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीतियों और डॉलर इंडेक्स में उतार-चढ़ाव से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के भाव प्रभावित हो रहे हैं।
-
घरेलू कारक: भारत में सोने की कीमत पर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर (Rupee-Dollar Rate), आयात शुल्क (Import Duty), जीएसटी (GST) और त्योहारों/शादियों के सीजन में उठने वाली मांग का सीधा असर पड़ता है।
3. आगे क्या करेंगे निवेशक? मुनाफावसूली का भी रखें ध्यान
सोना और चांदी दोनों में हालिया तेजी के बाद विश्लेषकों ने निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। केवल एक-दो दिनों की तेजी देखकर निर्णय लेना जोखिम भरा हो सकता है।
-
प्रोफिट बुकिंग (Profit Booking) की संभावना: चांदी में आई तेज उछाल के बाद अल्पावधि (Short-term) में मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है, जिससे कीमतों में अचानक गिरावट की गुंजाइश बनी रहती है।
-
रणनीति: विशेषज्ञों के अनुसार, पोर्टफोलियो का बड़ा हिस्सा सोने में और एक संतुलित हिस्सा चांदी में रखना समझदारी माना जाता है, ताकि उतार-चढ़ाव से सुरक्षा मिल सके।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
Q1. क्या अभी सोने और चांदी में निवेश करना सही समय है?
उत्तर: सोने-चांदी की कीमतें इस समय ऐतिहासिक रूप से उच्च स्तरों पर हैं। यदि आप दीर्घकालिक (Long-term) निवेशक हैं, तो ‘बाय ऑन डिप्स’ (कीमतों में हल्की गिरावट आने पर खरीदारी) की रणनीति अपना सकते हैं।
Q2. चांदी में सोने की तुलना में अधिक उतार-चढ़ाव क्यों होता है?
उत्तर: चांदी में निवेश मांग के साथ-साथ भारी औद्योगिक मांग (Solar Panel, Electronics) भी शामिल होती है। इसलिए औद्योगिक चक्रों में बदलाव के कारण चांदी के दामों में तेजी और मंदी दोनों ही ज्यादा तेज गति से होती हैं।
Q3. सोने या चांदी के आभूषण खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
उत्तर: आभूषण खरीदते समय स्थानीय सर्राफा बाजार का ताजा भाव, बीआईएस हॉलमार्क (Purity Check), मेकिंग चार्ज (Making Charges), और 3% GST की रसीद अलग से जांच लेना बेहद आवश्यक है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह लेख केवल सूचनात्मक और शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए तैयार किया गया है। सर्राफा बाजार की कीमतें तेजी से बदलती हैं। कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार (Financial Advisor) से परामर्श अवश्य लें और अपनी जोखिम लेने की क्षमता का सही आकलन करें।
Matribhumisamachar


