
मुंबई | सोमवार, 31 अगस्त 2026
आयकर विभाग (Income Tax Department) द्वारा Assessment Year (AY) 2026-27 (Financial Year 2025-26) के लिए नॉन-ऑडिट टैक्सपेयर्स हेतु इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 तय की गई है।
यदि आप छोटे कारोबारी, फ्रीलांसर या प्रोफेशनल हैं और आपके खातों के लिए टैक्स ऑडिट अनिवार्य नहीं है, तो आज की समय-सीमा चूकने पर आपको जुर्माना और अन्य वित्तीय नुकसान झेलना पड़ सकता है।
31 अगस्त 2026 को किन लोगों के लिए ITR भरना अनिवार्य है?
यह डेडलाइन विशेष रूप से उन करदाताओं के लिए लागू होती है जिनकी आय बिजनेस या प्रोफेशन से होती है और जो टैक्स ऑडिट के दायरे में नहीं आते:
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छोटे कारोबारी (Small Businesses): ऐसे व्यक्ति, फर्म या संस्थाएं जिनके खाते का ऑडिट अनिवार्य नियमों (धारा 44AB) के तहत नहीं होता।
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फ्रीलांसर्स और कंसल्टेंट्स (Freelancers & Consultants): डिजिटल, आईटी, कंटेंट या अन्य क्षेत्रों में स्वतंत्र रूप से काम करने वाले करदाता।
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प्रोफेशनल्स (Doctors, Lawyers, Architects): ऐसे पेशेवर जिनकी वार्षिक आय या प्राप्तियां ऑडिट सीमा से कम हैं और वे Section 44ADA या सामान्य आय के तहत रिटर्न दाखिल करते हैं।
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ITR-3 और ITR-4 दाखिल करने वाले करदाता: Presumptive Taxation (धारा 44AD/44ADA) या नियमित बिजनेस अकाउंट का उपयोग करने वाले करदाता।
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नॉन-ऑडिट ट्रस्ट और अन्य टैक्सपेयर्स: ऐसे ट्रस्ट, संस्थाएं या HUF जिनके खाते ऑडिट के अधीन नहीं हैं।
किन लोगों के लिए आज आख़िरी तारीख नहीं है?
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वेतनभोगी (Salaried Individuals) और पेंशनभोगी: सामान्य करदाताओं (ITR-1 और ITR-2) के लिए AY 2026-27 की सामान्य समय-सीमा 31 जुलाई 2026 थी, जो समाप्त हो चुकी है।
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टैक्स ऑडिट वाले टैक्सपेयर्स (Tax Audit Cases): जिन कंपनियों, कारोबारियों या फर्मों के खातों का Tax Audit अनिवार्य है, उनके लिए टैक्स ऑडिट रिपोर्ट जमा करने की अंतिम तिथि 30 सितंबर 2026 और ITR दाखिल करने की तिथि 31 अक्टूबर 2026 है।
AY 2026-27 के लिए ITR डेडलाइन चार्ट
| टैक्सपेयर की श्रेणी | लागू ITR फॉर्म | टैक्स ऑडिट? | अंतिम तिथि |
| Salaried / Single Source | ITR-1, ITR-2 | नहीं | 31 जुलाई 2026 |
| Non-Audit Business & Professionals | ITR-3, ITR-4 | नहीं | 31 अगस्त 2026 (आज) |
| Tax Audit Required Cases | ITR-3, ITR-5, ITR-6 | हाँ | 31 अक्टूबर 2026 |
| Transfer Pricing Cases (Sec 92E) | ITR-3, ITR-5, ITR-6 | हाँ | 30 नवंबर 2026 |
आज ITR न भरने पर क्या होगा नुकसान?
31 अगस्त 2026 तक रिटर्न दाखिल न करने पर करदाताओं को निम्नलिखित कानूनी व वित्तीय परिणामों का सामना करना पड़ सकता है:
1. Late Fee (धारा 234F के तहत)
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यदि आपकी कुल शुद्ध आय ₹5 लाख से अधिक है, तो ₹5,000 का विलंब शुल्क देना होगा।
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यदि कुल शुद्ध आय ₹5 लाख तक है, तो विलंब शुल्क ₹1,000 होगा।
2. कर पर ब्याज (Section 234A)
यदि आपका कोई बकाया टैक्स बचता है, तो 31 अगस्त के बाद से रिटर्न भरने की तारीख तक प्रति माह 1% की दर से ब्याज वसूला जाएगा।
3. Old Tax Regime का विकल्प समाप्त
बिजनेस या प्रोफेशन की आय वाले करदाताओं को Form 10-IEA भरकर पुरानी कर व्यवस्था (Old Tax Regime) चुनने की छूट केवल मूल नियत तिथि (31 अगस्त) तक मिलती है। देरी होने पर वे अपने आप डिफ़ॉल्ट New Tax Regime में चले जाएंगे और कटौती (Deductions) का लाभ नहीं ले पाएंगे।
4. घाटे को कैरी फॉरवर्ड करने का नुकसान (Loss Carry Forward)
व्यापारिक घाटे (Business Loss) या कैपिटल लॉस को अगले वर्षों में सेट-ऑफ (Set-off) करने के लिए 31 अगस्त तक रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य है।
Belated Return का विकल्प: यदि आप 31 अगस्त की डेडलाइन चूक जाते हैं, तो आप 31 दिसंबर 2026 तक पेनाल्टी और ब्याज के साथ अपनी Belated Return (धारा 139(4)) दाखिल कर सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1: क्या 31 अगस्त के बाद ITR दाखिल किया जा सकता है?
उत्तर: हाँ, 31 अगस्त के बाद आप 31 दिसंबर 2026 तक धारा 139(4) के तहत Belated Return दाखिल कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए आपको धारा 234F के तहत लेट फीस और धारा 234A के तहत ब्याज देना होगा।
प्रश्न 2: क्या 31 अगस्त की डेडलाइन वेतनभोगी (Salaried) कर्मचारियों के लिए भी है?
उत्तर: नहीं, वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए नियत तिथि 31 जुलाई 2026 थी। यदि उन्होंने तब तक रिटर्न नहीं भरा है, तो वे भी 31 दिसंबर 2026 तक लेट फीस के साथ बिलेटेड रिटर्न भर सकते हैं।
प्रश्न 3: Form 10-IEA क्या है और यह क्यों जरूरी है?
उत्तर: यदि बिजनेस या प्रोफेशनल इनकम वाला कोई करदाता नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) के बजाय पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime) चुनना चाहता है, तो उसे 31 अगस्त तक Form 10-IEA ऑनलाइन फाइल करना अनिवार्य होता है।
अस्वीकरण (Disclaimer)
यह लेख केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है। आयकर नियमों, सीमाओं और धाराओं में समय-समय पर बदलाव संभव हैं। अपना ITR दाखिल करने या कर नियोजन (Tax Planning) से पहले किसी योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) या टैक्स सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।
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