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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेरिस में BAPS स्वामीनारायण मंदिर का उद्घाटन किया: भारत-फ्रांस सांस्कृतिक संबंधों का नया अध्याय

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
2 Min Read
नई दिल्ली । 
6 सितंबर 2026 को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस की राजधानी पेरिस में नवनिर्मित BAPS स्वामीनारायण हिंदू मंदिर के लोकार्पण समारोह को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित किया। उन्होंने इस पावन अवसर पर मंदिर को भारत और फ्रांस के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों का एक नया प्रतीक करार दिया।

मुख्य बिंदु और समाचार विवरण

  • ‘Made in India, Built in France’: प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह मंदिर स्थापत्य कला और सहयोग का एक अनोखा उदाहरण है। इसमें इस्तेमाल किए गए पत्थरों को भारत के कुशल कारीगरों द्वारा तराशा गया और फ्रांस में आधुनिक सिविल इंजीनियरिंग के साथ स्थापित किया गया है।
  • सामरिक और सांस्कृतिक साझेदारी: यह आयोजन 2026 में मनाए जा रहे ‘भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष’ (India-France Year of Innovation) के समानांतर है। AI, रक्षा, अंतरिक्ष, और जलवायु कार्रवाई जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों का आपसी तालमेल लगातार नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहा है।
  • वसुधैव कुटुंबकम की भावना: PM मोदी ने कहा कि यह मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि पूरे यूरोप में भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक परंपराओं और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के वैश्विक मूल्यों का प्रकाश फैलाएगा।
  • समाजिक और मानवीय सेवा: BAPS संस्था के सेवा कार्यों की सराहना करते हुए उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह केंद्र आध्यात्मिक ध्यान के साथ-साथ समाज सेवा और मानवीय कार्यों का भी मुख्य केंद्र बनेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1: पेरिस में BAPS स्वामीनारायण मंदिर का उद्घाटन कब हुआ?
उत्तर: मंदिर का उद्घाटन समारोह 6 सितंबर 2026 को संपन्न हुआ।
Q2: प्रधानमंत्री मोदी ने मंदिर निर्माण को किस मंत्र से परिभाषित किया?
उत्तर: प्रधानमंत्री ने इसे भारतीय शिल्प कला और फ्रांसीसी इंजीनियरिंग के संगम के रूप में ‘Made in India, Built in France’ बताया।

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह लेख उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट्स और आधिकारिक बयानों के आधार पर केवल सूचनात्मक और शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए तैयार किया गया है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।