नई दिल्ली ।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ ने पर्यावरण और वायु गुणवत्ता नियंत्रण के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है। Swachh Vayu Sarvekshan 2026 की राष्ट्रीय रैंकिंग में लखनऊ ने 10 लाख से अधिक आबादी (Million-Plus) वाले शहरों की श्रेणी में देश में पहला स्थान प्राप्त किया है।
इस सर्वेक्षण में लखनऊ को कुल 200 में से 198 अंक मिले। यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि 2025 के सर्वेक्षण में लखनऊ 15वें स्थान पर था। महज एक साल के भीतर 15वें स्थान से सीधे शीर्ष (Rank 1) पर पहुंचना शहर के नगर निगम, प्रशासन और नागरिकों के सामूहिक प्रयासों का शानदार परिणाम है।
शीर्ष शहरों की सूची (10 लाख से अधिक आबादी)
इस सर्वेक्षण में देश के प्रमुख औद्योगिक और बड़े महानगरों के बीच कड़ा मुकाबला था। शीर्ष शहरों के अंक इस प्रकार रहे:
| शहर | स्थान (Rank) | कुल प्राप्त अंक |
| लखनऊ | 1 (पहला) | 198 अंक |
| इंदौर | 2 (दूसरा) | 197 अंक |
| जबलपुर | 3 (तीसरा) | 195 अंक |
| भोपाल | 4 (संयुक्त) | 192 अंक |
| आगरा | 4 (संयुक्त) | 192 अंक |
लखनऊ की इस बड़ी छलांग के 4 मुख्य कारण
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में केवल वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) ही नहीं देखा जाता, बल्कि प्रदूषण रोकने के लिए किए गए प्रशासनिक और जमीनी कार्यों का मूल्यांकन होता है। लखनऊ को पहला स्थान दिलाने में निम्नलिखित रणनीतियों ने अहम भूमिका निभाई:
- सड़क की धूल पर नियंत्रण (Road Dust Control): सड़कों की यांत्रिक सफाई (Mechanical Sweeping) और पानी के नियमित छिड़काव से उड़ने वाली धूल पर प्रभावी अंकुश लगाया गया।
- ठोस कचरा एवं निर्माण अपशिष्ट प्रबंधन: ‘Solid Waste Management’ और ‘Construction & Demolition (C&D) Waste’ के निस्तारण के लिए वैज्ञानिक तरीके अपनाए गए।
- वाहन उत्सर्जन में कमी: इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) और सीएनजी बसों के उपयोग को बढ़ावा देकर सड़कों पर चलने वाले वाहनों के धुएं को नियंत्रित किया गया।
- हरित क्षेत्र का विस्तार: शहर के विभिन्न हिस्सों में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण कर ग्रीन कवर (Green Cover) को बढ़ाया गया।
अन्य आबादी श्रेणियों के विजेता
राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के अंतर्गत देश भर के 130 शहरों का मूल्यांकन विभिन्न श्रेणियों में किया गया:
- 3 से 10 लाख आबादी वाली श्रेणी: ओडिसा के राउरकेला ने पहला स्थान प्राप्त किया।
- 3 लाख से कम आबादी वाली श्रेणी: ओडिसा के कलिंगानगर ने शीर्ष स्थान हासिल किया।
सर्वेक्षण की कार्यप्रणाली: यह केवल AQI की रैंकिंग नहीं है
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि स्वच्छ वायु सर्वेक्षण का मतलब यह नहीं है कि लखनऊ की हवा साल के 365 दिन देश में सबसे ज्यादा साफ रहती है।
यह रैंकिंग इस बात का मूल्यांकन करती है कि किसी शहर ने Clean Air Action Plan के तहत वायु प्रदूषण कम करने के लिए कितना प्रभावी ढांचा तैयार किया है और उस पर कितना काम किया है। इसमें जन-जागरूकता, औद्योगिक उत्सर्जन पर नियंत्रण और कचरा प्रबंधन जैसे मानक शामिल होते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. Swachh Vayu Sarvekshan 2026 में लखनऊ को कौन सा स्थान मिला?
उत्तर: लखनऊ को 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में 198 अंकों के साथ पहला स्थान (Rank 1) मिला।
Q2. 2025 में लखनऊ की रैंकिंग क्या थी?
उत्तर: 2025 के सर्वेक्षण में लखनऊ 15वें स्थान पर था, जहां से उसने 2026 में जबरदस्त सुधार करते हुए पहला स्थान हासिल किया।
Q3. स्वच्छ वायु सर्वेक्षण का मूल्यांकन किस आधार पर होता है?
उत्तर: इसका मूल्यांकन रोड डस्ट नियंत्रण, ठोस कचरा प्रबंधन, वाहनों और उद्योगों से होने वाले उत्सर्जन पर नियंत्रण, हरित क्षेत्र बढ़ाने और Clean Air Action Plan के क्रियान्वयन जैसे विभिन्न मानकों पर होता है।
Q4. 3 से 10 लाख आबादी श्रेणी में किस शहर ने पहला स्थान प्राप्त किया?
उत्तर: 3 से 10 लाख आबादी की श्रेणी में राउरकेला ने पहला स्थान प्राप्त किया।
अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 के जारी आंकड़ों और आधिकारिक रिपोर्टों पर आधारित एक सूचनात्मक प्रस्तुति है। वायु गुणवत्ता की दैनिक स्थिति मौसम और स्थानीय कारणों के आधार पर भिन्न हो सकती है।

