बुधवार, सितंबर 09 2026 | 09:28:16 PM

‘सर तन से जुदा’ का नारा आस्था नहीं, कानून को चुनौती: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज की मौलाना तौकीर रजा की जमानत याचिका

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
4 Min Read
प्रयागराज । 
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सितंबर 2025 में हुई बरेली हिंसा के मामले में इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल (IMC) के प्रमुख मौलाना तौकीर रजा खान की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव की एकल पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि हिंसा और सशस्त्र विद्रोह भड़काने वाले नारों को सामान्य धार्मिक नारों की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।

धार्मिक अभिव्यक्ति और हिंसक उकसावे में अंतर

अदालत ने अपने आदेश में रेखांकित किया कि ‘गुस्ताख-ए-नबी की एक ही सजा, सर तन से जुदा’ जैसा नारा सीधे तौर पर कानून के शासन, भारत की संप्रभुता और अखंडता को चुनौती देता है।
हाईकोर्ट ने कहा कि इस तरह के नारों की तुलना ‘अल्लाहु अकबर’, ‘जय श्री राम’, ‘हर हर महादेव’ या ‘जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल’ जैसे धार्मिक नारों से नहीं की जा सकती। पारंपरिक धार्मिक नारे ईश्वर या गुरु के प्रति श्रद्धा और सम्मान व्यक्त करते हैं, जबकि ‘सर तन से जुदा’ जैसे नारे लोगों को हिंसा और कानून को अपने हाथ में लेने के लिए उकसाते हैं।

क्या था सितंबर 2025 की बरेली हिंसा का मामला?

अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह घटना सितंबर 2025 की है जब प्रशासन द्वारा अनुमति न दिए जाने और धारा 163 (BNSS) लागू होने के बावजूद भीड़ इस्लामिया इंटर कॉलेज मैदान की ओर बढ़ी।
  • हिंसा और पथराव: जब पुलिस बल ने प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया, तो भीड़ उग्र हो गई। पथराव, पेट्रोल बम फेंकने और गोलीबारी की घटनाएं हुईं।
  • नुकसान: इस हिंसा में कई पुलिसकर्मी घायल हुए और सार्वजनिक संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचा।

तौकीर रजा का पक्ष और कोर्ट का रुख

तौकीर रजा के वकीलों ने तर्क दिया कि हिंसा के समय वह मौके पर मौजूद नहीं थे और उन्हें केवल राजनीतिक द्वेष के कारण फंसाया जा रहा है।
हालांकि, अदालत ने पाया कि भले ही तौकीर रजा घटना स्थल पर सीधे उपस्थित न रहे हों, लेकिन उन्होंने ही बिना प्रशासनिक अनुमति के लोगों को एकत्रित होने का आह्वान किया था। इसके अतिरिक्त, घटना के बाद उनके दिए गए भाषणों और आचरण को देखते हुए हाईकोर्ट ने इस चरण पर उन्हें जमानत देने से साफ इनकार कर दिया।

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

प्रश्न 1: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मौलाना तौकीर रजा की जमानत याचिका क्यों खारिज की?
उत्तर: कोर्ट ने माना कि तौकीर रजा ने बिना अनुमति भीड़ जुटाई और हिंसा के बाद भड़काऊ आचरण दिखाया। इसके अलावा, मामले से जुड़े हिंसक नारे देश की संप्रभुता और कानून व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा हैं।
प्रश्न 2: कोर्ट ने ‘सर तन से जुदा’ नारे के बारे में क्या कहा?
उत्तर: अदालत ने कहा कि यह नारा धार्मिक अभिव्यक्ति नहीं है, बल्कि यह कानून के अधिकार को चुनौती देता है और लोगों को हिंसा व सशस्त्र विद्रोह के लिए उकसाता है।
Disclaimer: यह लेख पूरी तरह से इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा दिए गए फैसले और मामले से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सूचनात्मक जानकारी प्रदान करना है।

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।