सहारनपुर |
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित 315 वर्ग मीटर में बनी मस्जिद के ध्वस्तीकरण और बेदखली के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है। न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने मस्जिद प्रबंधन पर लगाए गए ₹6.41 करोड़ के भारी-भरकम हर्जाने की वसूली पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है।
अदालत ने इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन को तीन सप्ताह के भीतर अपना जवाब (काउंटर एफिडेविट) दाखिल करने का निर्देश दिया है। याचिकाकर्ता को इसके बाद एक सप्ताह का समय प्रत्युत्तर दाखिल करने के लिए मिलेगा। मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर 2026 को तय की गई है।
क्या है पूरा मामला? (Background of the Dispute)
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में लगभग 315 वर्ग मीटर जमीन (खसरा नं. 539) पर स्थित मस्जिद को लेकर प्रशासन और मस्जिद प्रबंधन के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। प्रशासन का कहना है कि यह भूमि कलेक्ट्रेट कचहरी/रेस्ट हाउस की सरकारी संपत्ति है जिस पर बिना अनुमति निर्माण किया गया था।
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16 जुलाई 2026 (सिटी मजिस्ट्रेट का आदेश): यूपी लोक परिसर (अप्राधिकृत अधिभोगियों की बेदखली) अधिनियम के तहत सिटी मजिस्ट्रेट ने मस्जिद को खाली करने का आदेश दिया और अवैध कब्जे के एवज में ₹6,41,65,500 का जुर्माना लगाया।
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2 सितंबर 2026 (जिला जज की अदालत से झटका): मस्जिद प्रबंधन ने इस आदेश को जिला न्यायाधीश के समक्ष चुनौती दी, लेकिन 2 सितंबर को उनकी अपील खारिज कर दी गई।
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5 सितंबर 2026 (ध्वस्तीकरण की कार्रवाई): अपील खारिज होने के तीन दिन बाद भारी पुलिस बल और बुलडोजर की मदद से कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को ध्वस्त कर दिया गया।
हाईकोर्ट में दोनों पक्षों की दलीलें
मस्जिद के मुतवल्ली मोहम्मद तनवीर अहमद ने संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत याचिका दाखिल कर सिटी मजिस्ट्रेट और जिला जज के आदेशों को रद्द करने की मांग की।
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याचिकाकर्ता का पक्ष:
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याचिकाकर्ता के वरिष्ठ अधिवक्ता आशीष कुमार सिंह ने तर्क दिया कि बेदखली का आदेश जमीन के वास्तविक स्वामित्व (Title) का निर्धारण किए बिना जारी किया गया।
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यह संपत्ति लगभग 100 वर्षों से अधिक पुरानी है और सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड में पंजीकृत वक्फ संपत्ति है। पुराने सरकारी अभिलेखों में याकूब खान और वाहिद खान का नाम दर्ज था, जिन्होंने इसे वक्फ के रूप में समर्पित किया था।
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प्रशासन ने कानूनी अपील खारिज होने के महज 3 दिनों के भीतर हड़बड़ी में ध्वस्तीकरण कर दिया।
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राज्य सरकार का पक्ष:
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राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता (AAG) मनीष गोयल ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि सरकारी दस्तावेजों में यह जमीन ‘कलेक्ट्रेट कचहरी’ के नाम दर्ज है।
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याचिकाकर्ता के दावे परस्पर विरोधी हैं—एक ओर वे इसे जमींदार की निजी संपत्ति बता रहे हैं तो दूसरी ओर वक्फ संपत्ति, लेकिन किसी भी वक्फ डीड (Waqf Deed) का सबूत पेश नहीं किया गया।
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जिनके नाम अभिलेखों में बताए जा रहे हैं, उन्होंने कभी कोर्ट में अपने स्वामित्व का दावा नहीं किया।
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हाईकोर्ट के आदेश का तात्कालिक प्रभाव
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ध्वस्तीकरण पर रोक नहीं: अदालत ने फिलहाल ध्वस्त किए जा चुके ढांचे को लेकर कोई अंतिम आदेश जारी नहीं किया है, क्योंकि मामला अब कानूनी जांच के अधीन है।
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वित्तीय राहत: मस्जिद प्रबंधन को ₹6.41 करोड़ के वसूली नोटिस पर स्टे मिलने से बड़ी राहत मिली है।
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विधिक समीक्षा: 12 अक्टूबर 2026 को होने वाली अगली सुनवाई में यह तय होगा कि क्या प्रशासन द्वारा अपनाई गई बेदखली प्रक्रिया कानूनी रूप से वैध थी या नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सहारनपुर मस्जिद मामले में क्या राहत दी है?
उत्तर: हाईकोर्ट ने सिटी मजिस्ट्रेट द्वारा मस्जिद प्रबंधन पर लगाए गए ₹6.41 करोड़ के जुर्माने की वसूली पर interim stay (अंतरिम रोक) लगा दी है।
प्रश्न 2: सहारनपुर कलेक्ट्रेट की मस्जिद को कब ध्वस्त किया गया था?
उत्तर: जिला जज द्वारा अपील खारिज किए जाने के बाद 5 सितंबर 2026 को प्रशासन द्वारा मस्जिद को ध्वस्त किया गया था।
प्रश्न 3: इस मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
उत्तर: न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ इस मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर 2026 को करेगी।
अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख केवल सूचनात्मक और शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए नवीनतम समाचार रिपोर्टों और इलाहाबाद हाईकोर्ट की कार्यवाही के आधार पर तैयार किया गया है। यह किसी भी प्रकार की कानूनी सलाह का स्थान नहीं लेता है।
