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सितंबर के अंतिम दिन गिरा भारतीय शेयर बाजार: FII बिकवाली और क्रूड ऑयल के दबाव में सेंसेक्स-निफ्टी टूटे

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
6 Min Read

मुंबई |

भारतीय शेयर बाजार में सितंबर महीने के अंतिम कारोबारी दिन जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में बढ़त दर्ज करने के बाद ऊपरी स्तरों पर बिकवाली का भारी दबाव हावी हो गया। कारोबार समाप्त होने पर सेंसेक्स मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 में अपेक्षाकृत अधिक कमजोरी दर्ज की गई।

 

सेंसेक्स और निफ्टी की क्लोजिंग स्थिति

कारोबार के अंत में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का 30 शेयरों वाला प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 48.78 अंक (0.07%) गिरकर 72,480.29 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 सूचकांक 95.75 अंक (0.42%) फिसलकर 22,620.45 के स्तर पर लाल निशान में बंद हुआ।

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पूरे सितंबर महीने के दौरान भारतीय शेयर बाजार पर लगातार बिकवाली का दबाव बना रहा। महीने भर के आंकड़ों पर नजर डालें तो Nifty 50 में लगभग 6.1 प्रतिशत और Sensex में करीब 5.8 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। डेरिवेटिव्स की सितंबर सीरीज की समाप्ति पर भी ट्रेडर्स और निवेशकों में भारी सतर्कता देखी गई।

 

बाजार पर दबाव बनाने वाले 4 मुख्य वैश्विक व घरेलू कारक

 

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली:

सितंबर में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजारों से भारी पूंजी बाहर निकाली। FIIs की इस लगातार बिकवाली ने घरेलू बाजार की धारणा (market sentiment) को काफी कमजोर किया है।

कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमतों में मजबूती:

अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की ऊंची कीमतें भारत जैसे तेल-आयातक देश के लिए चिंता का विषय हैं। कच्चे तेल में तेजी से भारत का व्यापार घाटा (trade deficit) बढ़ता है, जिससे भारतीय रुपये पर दबाव आता है और महंगाई बढ़ने का जोखिम पैदा होता है।

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अमेरिकी Treasury Yields में उछाल:

अमेरिका में बॉन्ड यील्ड के ऊंचे स्तर पर पहुंचने से वैश्विक पूंजी सुरक्षित और आकर्षक अमेरिकी संपत्तियों की तरफ आकर्षित हो रही है। इसके चलते भारत समेत सभी उभरते बाजारों (emerging markets) से FII आउटफ्लो तेज हुआ है।

वैश्विक भू–राजनीतिक तनाव:

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण निवेशक जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बना रहे हैं।

30 सितंबर के टॉप गेनर्स और लूसर्स शेयर

30 सितंबर के सत्र के दौरान बैंकिंग और आईटी क्षेत्र के चुनिंदा दिग्गजों ने बाजार को संभालने की कोशिश की, जबकि फार्मा, ऑटो और कंज्यूमर फाइनेंस सेक्टर में बिकवाली हावी रही।

बढ़त बनाने वाले शेयर (Gainers)

  • Kotak Mahindra Bank
  • ICICI Bank
  • Axis Bank
  • IndiGo (InterGlobe Aviation)
  • TCS (Tata Consultancy Services)

दबाव में रहने वाले शेयर (Losers)

  • Eternal
  • Sun Pharma
  • Adani Ports
  • Titan Company
  • Bajaj Finance

अक्टूबर महीने के लिए आउटलुक और तकनीकी स्तर (Technical Levels)

बाजार विश्लेषकों का मानना है कि अक्टूबर में शेयर बाजार की दिशा तय करने में घरेलू कंपनियों के दूसरी तिमाही (Q2) के वित्तीय नतीजे, कच्चे तेल की चाल, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति के संकेत और FIIs का रुख सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

  • निफ्टी के लिए सपोर्ट ज़ोन: तकनीकी रूप से निफ्टी 50 के लिए 22,350 – 22,400 का स्तर एक महत्वपूर्ण सपोर्ट माना जा रहा है।
  • निफ्टी के लिए रेजिस्टेंस ज़ोन: तेजी की स्थिति में 23,400 का स्तर एक मजबूत प्रतिरोध (Resistance Zone) के रूप में काम कर सकता है।

संबंधित समाचार एवं विस्तृत कवरेज (Relevant Market Links)

भारतीय अर्थव्यवस्था, एफआईआई ट्रेंड्स और कमोडिटी मार्केट से जुड़ी विस्तृत अंग्रेजी रिपोर्ट्स के लिए Matribhumi Samachar के इन लेखों को पढ़ें:

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: सितंबर 2026 के आखिरी दिन सेंसेक्स और निफ्टी कितने अंक गिरकर बंद हुए?

उत्तर: 30 सितंबर को सेंसेक्स 48.78 अंक गिरकर 72,480.29 पर और निफ्टी 50 सूचकांक 95.75 अंक फिसलकर 22,620.45 के स्तर पर बंद हुआ।

प्रश्न 2: सितंबर महीने में शेयर बाजार में गिरावट के मुख्य कारण क्या थे?

उत्तर: विदेशी निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितता इसके मुख्य कारण रहे।

प्रश्न 3: अक्टूबर 2026 में निफ्टी के लिए कौन से तकनीकी स्तर महत्वपूर्ण हैं?

उत्तर: विश्लेषकों के अनुसार निफ्टी के लिए 22,350–22,400 का क्षेत्र एक मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है, जबकि 23,400 का स्तर महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस जोन है।

 

डिस्क्लेमर (Disclaimer)

शेयर बाजार, फ्यूचर्स एवं ऑप्शंस में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। इस आलेख में दिए गए आंकड़े और तकनीकी स्तर केवल सूचनात्मक और शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए हैं। किसी भी शेयर या फंड में निवेश करने से पहले अपने प्रमाणित वित्तीय सलाहकार (SEBI Registered Financial Advisor) से परामर्श अवश्य लें।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।