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राहुल गांधी के ‘शिव तांडव’ वाले बयान पर भड़का VHP, सार्वजनिक माफी और स्पष्टीकरण की मांग

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
4 Min Read

नई दिल्ली।

लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी द्वारा भगवान शिव से जुड़ी टिप्पणी पर राजनीतिक और धार्मिक हलकों में विवाद गहराता जा रहा है। विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने इस टिप्पणी को करोड़ों सनातन धर्मावलंबियों की धार्मिक भावनाओं का अनादर बताते हुए राहुल गांधी से तुरंत सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है।

 

क्या है पूरा मामला?

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12 अक्टूबर 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष के प्रदर्शन और सुप्रीम कोर्ट मार्च के दौरान राहुल गांधी ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए अपने राजनीतिक आंदोलन की कार्यशैली की तुलना भगवान शिव के तांडव और ‘शिव की बारात’ से की थी।

राहुल गांधी ने कहा था:

“यह एक प्रकार का तांडव है, भगवान शिव का नृत्य। इसके लिए किसी पूर्व निर्धारित योजना की आवश्यकता नहीं होती। इसमें कोई भी शामिल हो सकता है, जैसे शिव जी की बारात में हर कोई शामिल होता है।“

 

विश्व हिंदू परिषद (VHP) की कड़ी आपत्ति

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राहुल गांधी के इस वक्तव्य पर प्रतिक्रिया देते हुए विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा कि भगवान शिव का तांडव और ‘शिव की बारात’ सनातन धर्म के अत्यंत पवित्र और श्रद्धा से भरे प्रतीक हैं।

VHP के मुख्य ऐतराज बिंदु:

  • धार्मिक प्रतीकों का राजनीतिकरण: आस्था से जुड़े प्रतीकों की तुलना किसी राजनीतिक विरोध-प्रदर्शन या आंदोलन से करना सर्वथा अनुचित है।
  • जनभावनाओं को ठेस: राजनीतिक लाभ या उपमाओं के लिए पवित्र धार्मिक संदर्भों का इस्तेमाल करने से सनातन समाज की भावनाएं आहत हुई हैं।
  • सार्वजनिक माफी की मांग: विहिप ने राहुल गांधी से मांग की है कि वे इस टिप्पणी पर तुरंत अपना रुख स्पष्ट करें और देश के हिंदू समाज से बिना शर्त माफी मांगें।

 

न्यायपालिका और चुनाव आयोग पर सियासी घमासान

इस विवाद के साथ ही विपक्ष के सुप्रीम कोर्ट तक मार्च को लेकर भी आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं:

  • VHP का आरोप: विहिप ने विपक्ष द्वारा सर्वोच्च न्यायालय की तरफ किए गए मार्च को न्यायपालिका और संवैधानिक संस्थाओं पर अनुचित दबाव बनाने का प्रयास करार दिया।
  • विपक्ष का पक्ष: वहीं विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह मार्च लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा, चुनावी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और संविधान को बचाने का एक निष्पक्ष माध्यम है।

 

संबंधित रिपोर्ट और अन्य समाचार देखें:

 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1: राहुल गांधी ने भगवान शिव के तांडव को लेकर क्या कहा था?

A: 12 अक्टूबर को चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष के प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी ने आंदोलन को ‘भगवान शिव का तांडव’ और ‘शिव जी की बारात’ से जोड़ते हुए कहा था कि यह आंदोलन किसी तय योजना के बिना स्वतःस्फूर्त तरीके से चल रहा है।

Q2: विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने इस बयान पर क्या मांग की है?

A: VHP ने आरोप लगाया है कि राजनीतिक प्रदर्शन की तुलना शिव तांडव से करने से हिंदू समाज की भावनाएं आहत हुई हैं, इसलिए राहुल गांधी को इस पर स्पष्टीकरण देना चाहिए और सार्वजनिक माफी मांगनी चाहिए।

 

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह लेख हालिया राजनीतिक और सामाजिक घटनाक्रमों तथा संबंधित संगठनों द्वारा जारी आधिकारिक बयानों के आधार पर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य केवल निष्पक्ष समाचार और सूचना प्रदान करना है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।