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जौहर ट्रस्ट वित्तीय अनियमितता मामला: आजम खान के करीबी सालिम से ED की 8 घंटे पूछताछ, सीए दीपक गोयल को समन

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
5 Min Read

लखनऊ|

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री मोहम्मद आजम खान की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। जौहर ट्रस्ट और मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय में हुई कथित वित्तीय अनियमितताओं एवं मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी जांच के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी कार्रवाई और तेज कर दी है। इसी कड़ी में जांच एजेंसी ने आजम खान के करीबी ठेकेदार सालिम को समन भेजकर लखनऊ स्थित कार्यालय में लगभग 8 घंटे तक आमने-सामने बिठाकर कड़ी पूछताछ की।

जांच के दौरान ईडी का पूरा फोकस ट्रस्ट को मिले अज्ञात व संदिग्ध डोनेशन, विभिन्न कंपनियों से ट्रांसफर हुए पैसे के स्रोत और उनके असल इस्तेमाल पर रहा।

 

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चंदे के स्रोत और लेन–देन पर ईडी का शिकंजा

सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान सालिम से ट्रस्ट के बैंक खातों में आए पैसों और उससे जुड़े निर्माण कार्यों के ब्योरे मांगे गए। ईडी यह समझने का प्रयास कर रही है कि जौहर विश्वविद्यालय के निर्माण में जो सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च हुए, उनका वास्तविक स्रोत क्या था और क्या फर्जी कंपनियों या शेल संस्थाओं के जरिए धनराशि को डायवर्ट किया गया।

सालिम से कई संदिग्ध लेन-देन के दस्तावेजों को सामने रखकर सवाल-जवाब किए गए। पूछताछ के दौरान सालिम ने कुछ प्रमुख वित्तीय फैसलों और खातों से जुड़ी जानकारियों के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) दीपक गोयल का नाम लिया, जिसके बाद जांच एजेंसी ने अब सीए को भी अपने राडार पर ले लिया है।

 

अन्य सहयोगियों पर कार्रवाई: सीए दीपक गोयल को 24 अक्टूबर का समन

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मामले की कड़ियां जोड़ते हुए ईडी अब अन्य संबंधित लोगों को लगातार समन जारी कर रही है:

  1. अनवर हुसैन: आजम खान से जुड़े करीबी अनवर हुसैन को भी पूछताछ के लिए तलब किया गया है।
  2. सीए दीपक गोयल: चार्टर्ड अकाउंटेंट दीपक गोयल को वित्तीय रिकॉर्ड्स और बैलेंस शीट के साथ 24 अक्टूबर 2026 को ईडी अधिकारियों के सामने पेश होने के लिए समन भेजा गया है।
  3. अन्य अधिकारी व जनप्रतिनिधि: इससे पहले ईडी जौहर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जहीरुद्दीन और रामपुर के सपा विधायक नसीर अहमद खान से भी घंटों पूछताछ कर चुकी है।

 

जेल में आजम खान से भी हो चुकी है साढ़े सात घंटे पूछताछ

उल्लेखनीय है कि इस केस में ईडी की टीम 13 अक्टूबर 2026 को रामपुर जेल पहुंची थी, जहां बंद सपा नेता आजम खान से करीब साढ़े सात घंटे तक सघन पूछताछ की गई थी। उस दौरान आजम खान से ट्रस्ट के लिए गए प्रशासनिक फैसलों, सरकारी विभागों के बजट से हुए निर्माण और संदिग्ध दानदाताओं (Donors) के नामों की सत्यता पर सवाल किए गए थे।

 

आगे की कार्रवाई और संभावित संपत्ति जब्ती

ईडी की टीम फिलहाल जुटाये गए दस्तावेजों, बैंक खातों के ब्योरों और सालिम व अन्य गवाहों द्वारा दिए गए बयानों का क्रॉस-वेरीफिकेशन (मिलान) कर रही है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वित्तीय लेन-देन में गबन और अवैध स्रोतों की पुष्टि होती है, तो आने वाले दिनों में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत संपत्तियों की कुर्की या नई गिरफ्तारियां देखने को मिल सकती हैं।

 

Frequently Asked Questions (FAQ)

Q1: जौहर ट्रस्ट मामले में ईडी (ED) क्या जांच कर रही है?Ans: ईडी जौहर ट्रस्ट और मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय को मिले चंदे के स्रोत, विभिन्न कंपनियों से हुए वित्तीय लेन-देन, मनी लॉन्ड्रिंग और निर्माण कार्य में हुए खर्चों की कानूनी जांच कर रही है।

Q2: सालिम से ईडी ने कितने घंटे पूछताछ की?Ans: आजम खान के करीबी सालिम से ईडी ने वित्तीय दस्तावेजों और चंदे के संदर्भ में लगभग 8 घंटे तक पूछताछ की।

Q3: चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) दीपक गोयल को कब पेश होने के लिए कहा गया है?Ans: सीए दीपक गोयल को 24 अक्टूबर 2026 को ईडी के समक्ष पेश होने का समन जारी किया गया है।

 

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह समाचार लेख मीडिया रिपोर्टों और उपलब्ध प्राथमिक जानकारियों पर आधारित है। मामले की जांच निष्पक्ष रूप से जांच एजेंसियों द्वारा की जा रही है और अंतिम कानूनी निष्कर्ष अदालती प्रक्रिया के अधीन है।

 

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।