कानपुर।
उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा सरकारी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों की स्थिति सुधारने के लिए चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ के बीच एक बार फिर प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। कानपुर नगर में सहायक बेसिक शिक्षा अधिकारी (ABSA / BEO) कार्यालय से महज 50 मीटर की दूरी पर स्थित एक परिषदीय विद्यालय में बच्चे मूलभूत सुविधाओं के अभाव में पढ़ने को मजबूर हैं।
इस घटना ने न केवल शिक्षा विभाग के दावों पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी उजागर किया है कि जिम्मेदार अधिकारियों की नाक के नीचे किस तरह विभागीय योजनाओं का दम निकल रहा है।
अधिकारी की चौखट पर सुविधाएं गायब: आखिर कौन जिम्मेदार?
स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों का कहना है कि जब ABSA कार्यालय से इतनी कम दूरी पर स्थित स्कूल की यह हालत है, तो दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों के स्कूलों की स्थिति का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
बेसिक शिक्षा विभाग की नीतियों के अनुसार, ब्लॉक स्तर के शिक्षा अधिकारियों का प्राथमिक दायित्व अपने क्षेत्र के विद्यालयों का नियमित निरीक्षण करना है। ऐसे में सवाल उठता है:
- क्या ABSA और विभागीय निरीक्षकों ने कभी इस विद्यालय का भौतिक सत्यापन नहीं किया?
- यदि निरीक्षण हुआ, तो विद्यालय में पेयजल, शौचालय और बैठने की व्यवस्था जैसी बुनियादी कमियों को रिपोर्ट में दर्ज क्यों नहीं किया गया?
‘ऑपरेशन कायाकल्प’ और कानपुर में जमीनी हकीकत
उत्तर प्रदेश सरकार ने परिषदीय विद्यालयों में 19 बुनियादी सुविधाओं (जैसे स्वच्छ पेयजल, बाल-मैत्रीपूर्ण शौचालय, बिजली कनेक्शन, फर्नीचर, टाइलिंग, हैंडवॉश सिस्टम) को अनिवार्य रूप से लागू करने के उद्देश्य से ऑपरेशन कायाकल्प शुरू किया था।
हाल ही में कानपुर में बेसिक शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठकों के दौरान 23 मुख्य बिंदुओं पर चर्चा की गई थी, जिनमें पीएम पोषण, पुस्तकालय, खेल सामग्री और प्रयोगशालाओं की स्थिति शामिल थी। इसके अलावा जिले में बच्चों के लिए बेंच और डेस्क (फर्निशिंग) न होने से टाट-पट्टी पर पढ़ाई करने की शिकायतों पर बीएसए (BSA) कार्यालय द्वारा रिपोर्ट भी तलब की गई थी।
हालांकि, धरातल पर इन समीक्षा बैठकों का प्रभाव धीमा दिख रहा है।
बच्चों के अधिकार और अभिभावकों की मांगें
शिक्षा का अधिकार कानून (RTE) के तहत प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित, स्वच्छ और सम्मानजनक वातावरण में शिक्षा प्राप्त करने का वैधानिक अधिकार है। पेयजल, क्रियाशील शौचालय और साफ परिसर कोई अतिरिक्त सुविधाएं नहीं, बल्कि किसी भी विद्यालय की प्राथमिक आवश्यकताएं हैं।
स्थानीय अभिभावकों और नागरिकों की प्रमुख मांगें:
- त्वरित भौतिक जांच: शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचकर विद्यालय का निरीक्षण करें।
- जवाबदेही तय हो:ABS/BEO और संबंधित मॉनिटरिंग टीम से स्पष्टीकरण मांगा जाए कि इतनी नजदीकी के बावजूद कमियां अनदेखी क्यों रहीं।
- तत्काल संसाधन आवंटन: शुद्ध पेयजल, कार्यशील शौचालय और फर्नीचर की तत्काल व्यवस्था की जाए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
ABSA या BEO का क्या कार्य होता है?
ABSA (सहायक बेसिक शिक्षा अधिकारी) या BEO (खंड शिक्षा अधिकारी) ब्लॉक स्तर पर प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों के प्रशासनिक संचालन, शिक्षकों की उपस्थिति, और सुविधाओं की मॉनिटरिंग के लिए जिम्मेदार होते हैं।
ऑपरेशन कायाकल्प (Operation Kayakalp) क्या है?
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा शुरू की गई यह योजना परिषदीय (सरकारी) स्कूलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और 19 मूलभूत सुविधाएं (जैसे बिजली, पेयजल, शौचालय, स्मार्ट क्लास आदि) उपलब्ध कराने के उद्देश्य से चलाई जा रही है।
कानपुर के सरकारी स्कूलों में फर्नीचर की क्या स्थिति है?
कानपुर के कई परिषदीय विद्यालयों में फर्नीचर की कमी के कारण बच्चे आज भी टाट-पट्टी या जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। हाल ही में बीएसए कार्यालय ने इस संबंध में रिपोर्ट भी मांगी है।
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अस्वीकरण (Disclaimer):
यह समाचार रिपोर्ट प्राप्त स्थानीय शिकायतों, विभागीय समीक्षाओं और जनहित से जुड़े मुद्दों पर आधारित है। इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष की छवि को धूमिल करना नहीं, बल्कि सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था में सुधार और प्रशासनिक पारदर्शिता को बढ़ावा देना है।

