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सरदार पटेल जयंती पर निकलेगी विशाल एकता यात्रा, कुर्मी परिवार समागम करेगा राष्ट्रीय एकता का आह्वान

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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कानपुर, 24 अक्टूबर। लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती के अवसर पर कानपुर में कुर्मी परिवार समागम राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भाव का संदेश देगा। संगठन की ओर से जयंती को राष्ट्रीय एकता पर्व के रूप में मनाने की तैयारियाँ की जा रही हैं। इस अवसर पर विशाल एकता यात्रा, माल्यार्पण, पुष्पांजलि, संगोष्ठी और सम्मान समारोह का आयोजन किया जाएगा।

कार्यक्रम के प्रति लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए संगठन के कार्यकारिणी सदस्यों ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में जनसंपर्क अभियान चलाया। आशीष सचान, अरविंद सिंह सचान, एडवोकेट राजेन्द्र प्रसाद वर्मा, बृजेन्द्र स्वरूप सचान, योगेन्द्र सचान, अनुकम सिंह, गौरव कटियार, बी.डी. सचान, नागेश सचान, आनंद कटियार और किशोर कटियार सहित अन्य सदस्यों ने दामोदर नगर, जरौली, करही, बर्रा-8, विश्व बैंक, बर्रा-2 और तात्याटोपे नगर समेत कई इलाकों का भ्रमण किया। इस दौरान स्वजातीय बंधुओं को समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रण पत्र वितरित किए गए।

बर्रा बाईपास से पटेल चौक तक निकलेगी एकता यात्रा

कानपुर उद्योग व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष आशीष सचान और सरदार सेना के जिलाध्यक्ष अरविंद सचान ने बताया कि 31 अक्टूबर, शनिवार को सुबह 8:30 बजे बर्रा बाईपास से पटेल चौक (सचान चौराहा) तक विशाल एकता यात्रा निकाली जाएगी। यात्रा के माध्यम से सरदार पटेल के विचारों, राष्ट्रीय एकता के प्रति उनके योगदान और सामाजिक एकजुटता के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने का प्रयास किया जाएगा।

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यात्रा के बाद पटेल प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित की जाएगी। इसके उपरांत संगोष्ठी और सम्मान समारोह आयोजित होगा, जिसमें शहर के प्रबुद्ध एवं गणमान्य नागरिकों के साथ जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति प्रस्तावित है।

सामाजिक सहभागिता पर रहेगा जोर

कुर्मी परिवार समागम का कहना है कि सरदार पटेल की जयंती केवल स्मरण का अवसर नहीं, बल्कि एकता, संगठन और सामाजिक उत्तरदायित्व के मूल्यों को आगे बढ़ाने का भी अवसर है। संगठन शहर के विभिन्न मोहल्लों में रहने वाले अपने हजारों साथियों की सहभागिता के साथ सरदार पटेल को श्रद्धांजलि अर्पित करेगा।

आयोजकों ने समाज के लोगों से कार्यक्रम में शामिल होकर राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भाव के संदेश को मजबूत करने की अपील की है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।