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कानपुर में राष्ट्र सेविका समिति का भव्य पथ संचलन: अनुशासन, एकता और नारी शक्ति का दिखा अद्भुत संगम

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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कानपुर।

कानपुर नगर में विजयादशमीोत्सव (दशहरा) के शुभ अवसर पर राष्ट्र सेविका समिति की बहनों द्वारा भव्य एवं अनुशासित पथ संचलन का आयोजन किया गया। यह आयोजन शहर के दो प्रमुख स्थानों—विकास नगर स्थित बजाज विद्यालय पार्क एवं किदवई नगर स्थित बालाजी शिवधाम पार्क से सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

पूर्ण गणवेश (यूनिफॉर्म) में कदम से कदम मिलाकर चलती सेविकाओं ने समाज को नारी शक्ति, राष्ट्रभक्ति, अनुशासन और संगठन की अभूतपूर्व प्रेरणा दी।

 

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वैदिक मंत्रोच्चार एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ शुभारंभ

कार्यक्रम का शुभारंभ निर्धारित शास्त्रीय विधि-विधान के साथ हुआ। आयोजन की मुख्य अतिथि डॉ. स्वामी साक्षी चेतना जी ने दीप प्रज्ज्वलित कर तथा भारत माता के चित्र पर पुष्पार्चन अर्पित कर संचलन का औपचारिक उद्घाटन किया।

विकास नगर के बजाज विद्यालय पार्क तथा किदवई नगर के बालाजी शिवधाम पार्क दोनों ही स्थानों पर सेविकाओं के गगनभेदी जयकारों और देश भक्ति के नारों से संपूर्ण वातावरण गुंजायमान हो उठा। किदवई नगर का संचलन बालाजी शिवधाम पार्क से शुरू होकर क्षेत्र के विभिन्न प्रमुख मार्गों से होता हुआ पुनः पार्क परिसर में पहुंचकर समाप्त हुआ।

 

पुष्पवर्षा कर नागरिकों ने किया सेविकाओं का स्वागत

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पथ संचलन के दौरान अनुशासित पंक्तियों में चलती सेविकाओं की एकजुटता, आत्मविश्वास और निष्ठा को देखकर मार्ग में उपस्थित नागरिक अभिभूत हो उठे। जगह-जगह स्थानीय निवासियों, सामाजिक संगठनों और व्यापारियों द्वारा सेविकाओं पर पुष्पवर्षा कर उनका भव्य स्वागत किया गया।

 

आयोजन में प्रमुख पदाधिकारियों की उपस्थिति

कार्यक्रम में कानपुर के चारों जिलों की कार्यवाहिकाओं, सह कार्यवाहिकाओं, बौद्धिक प्रमुखों एवं संपर्क प्रमुखों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। मुख्य रूप से निम्नलिखित पदाधिकारी उपस्थित रहीं:

  • शशि (प्रांत कार्यवाहिका)
  • डॉ. विनीता पांडेय (विभाग कार्यवाहिका)
  • पूनम द्विवेदी (विभाग कार्यवाहिका)
  • सरिता (सह कार्यवाहिका, कानपुर दक्षिण जिला)

कार्यक्रम के अंत में कानपुर दक्षिण जिला की सह कार्यवाहिका सरिता दीदी ने सभी अतिथियों, नागरिकों तथा सेविका बहनों का आभार व्यक्त किया। संपूर्ण कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के सामूहिक सस्वर गायन के साथ हुआ।

राष्ट्र सेविका समिति: स्थापना और उद्देश्य

राष्ट्र सेविका समिति भारत की प्रमुख सांस्कृतिक एवं सामाजिक महिला संस्थाओं में से एक है।

स्थापना वर्ष     : 1936 (विजयादशमी के दिन)

संस्थापिका        : वंदनीया लक्ष्मीबाई केलकर (‘मौसीजी’)

मुख्य उद्देश्य     : महिलाओं में राष्ट्रभक्ति, अनुशासन, आत्मविश्वास, सेवाभाव एवं नेतृत्व क्षमता का विकास करना।

 

महत्वपूर्ण लिंक्स (Matribhumi Samachar)

विस्तृत विवरण के लिए हमारी आधिकारिक वेबसाइट पर विजिट करें:

 

Frequently Asked Questions (FAQs)

Q1. कानपुर में राष्ट्र सेविका समिति का पथ संचलन किन स्थानों पर आयोजित हुआ?

उत्तर: यह आयोजन मुख्य रूप से विकास नगर (ब्लॉक) स्थित बजाज विद्यालय पार्क और किदवई नगर के ब्लॉक स्थित बालाजी शिवधाम पार्क में आयोजित हुआ।

Q2. राष्ट्र सेविका समिति की स्थापना कब और किसने की थी?

उत्तर: राष्ट्र सेविका समिति की स्थापना वर्ष 1936 में विजयादशमी के पावन पर्व पर वंदनीया लक्ष्मीबाई केलकर (मौसीजी) द्वारा की गई थी।

Q3. कार्यक्रम की मुख्य अतिथि कौन थीं?

उत्तर: कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉ. स्वामी साक्षी चेतना जी थीं, जिन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

Q4. राष्ट्र सेविका समिति का मुख्य उद्देश्य क्या है?

उत्तर: संगठन का मुख्य उद्देश्य भारतीय महिलाओं एवं युवतियों में राष्ट्रभक्ति, स्वावलंबन, अनुशासन, सेवा भावना और नेतृत्व क्षमता को विकसित करना है।

 

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह समाचार रिपोर्ट उपलब्ध जानकारी और स्थानीय समाचार विवरणों के आधार पर मातृभूमि समाचार (Matribhumi Samachar) के पाठकों के लिए तैयार की गई है। इसका उद्देश्य केवल सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों की जानकारी देना है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।