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माँ को सोना उपहार में देने से लेकर दिल के करीब रहने वाली खरीदारी तक, सोनी सब के कलाकारों ने साझा किए अपने धनतेरस के खास किस्से

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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मुंबई, नवंबर, 2026: धनतेरस वह अवसर है, जब परिवार समृद्धि के स्वागत के लिए एक साथ आते हैं, परंपराओं का जश्न मनाते हैं और ऐसी खरीदारी करते हैं, जो उनके दिल के बेहद करीब होती है। जहाँ सोना और चांदी खरीदना शुभ माना जाता है, वहीं यह पर्व उपलब्धियों का जश्न मनाने, अपने प्रियजनों के प्रति आभार व्यक्त करने और छोटी-छोटी खुशियों में आनंद खोजने का भी अवसर है। इस धनतेरस पर सोनी सब के कलाकार दीक्षा जोशी, जितेन लालवानी, करुणा पांडे और गुल्की जोशी खरीदारी की अपनी सबसे यादगार कहानियाँ साझा कर रहे हैं, अपने माता-पिता को कुछ खास लौटाने की खुशी के बारे में बता रहे हैं और यह भी साझा कर रहे हैं कि यह त्यौहार उनके लिए इतना विशेष क्यों है।

हस्तिनापुर के वीर में द्रोणाचार्य की भूमिका निभा रहे जितेन लालवानी ने कहा, “हमारे लिए धनतेरस हमेशा महँगी चीजें खरीदने के बजाय पारिवारिक परंपराओं का पर्व रहा है। कानपुर में बड़े होते हुए हम आमतौर पर कटोरियाँ, थालियाँ, चम्मच और गिलास जैसे चाँदी के बर्तन खरीदा करते थे। जब मेरी माँ मुंबई आ गईं, तो मैंने इस परंपरा को आगे बढ़ाने का फैसला किया और उन्हें चाँदी के बर्तन उपहार में दिए, क्योंकि मुझे पता था कि वह अपने लिए सोना खरीदने के बजाय इन्हें ज्यादा पसंद करती हैं। उनकी पसंदीदा परंपरा को आगे बढ़ाना और उन्हें उसी तरीके से खुश करना मेरे लिए बहुत खास था। मेरे लिए धनतेरस परिवार, परंपराओं और हर खरीदारी के पीछे की भावना का नाम है। यह इस बात पर नहीं निर्भर करता कि कोई चीज कितनी महँगी है, बल्कि उस प्यार और भावनाओं पर निर्भर करता है जो उससे जुड़ी होती हैं।”

पुष्पा इम्पॉसिबल में दीप्ति की भूमिका निभा रहीं दीक्षा जोशी ने कहा, “मेरी सबसे खास यादों में से एक वह है, जब मैंने कमाना शुरू करने के बाद धनतेरस पर अपनी माँ के लिए सोना खरीदा था। वह पल मेरे लिए बेहद खास था, क्योंकि पहली बार मैं अपनी कमाई से उनके लिए कुछ अर्थपूर्ण खरीद पा रही थी। बचपन से हम अपने माता-पिता को हमारे लिए इतना कुछ करते हुए देखते हैं और फिर जब हमें भी उन्हें कुछ लौटाने का अवसर मिलता है, चाहे वह छोटा ही क्यों न हो, तो वह एहसास बहुत प्यारा होता है। वह खरीदारी सिर्फ सोना खरीदने भर की बात नहीं थी, बल्कि अपनी माँ को यह महसूस कराना था कि वे कितनी प्रिय और सम्मानित हैं। यह एक ऐसी याद है, जिसे मैं हमेशा अपने दिल के करीब रखूँगी। मेरा मानना है कि जब कोई उपहार प्यार से दिया जाता है, तो वह और भी खास बन जाता है।”

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पुष्पा इम्पॉसिबल में पुष्पा की भूमिका निभा रहीं करुणा पांडे ने कहा, “मेरी सबसे पसंदीदा खरीदारी में से एक भगवान श्रीकृष्ण की चाँदी की मूर्ति है, जिसे मैंने अपने लिए खरीदा था। आज भी यह मेरी सबसे अनमोल चीजों में से एक है और जब भी मैं इसे देखती हूँ, मुझे बहुत खुशी मिलती है। कई बार हम अचानक कुछ खरीद लेते हैं, लेकिन कुछ खरीदारी ऐसी होती हैं, जो अपने खास मायने की वजह से सालों तक हमारे दिल के करीब बनी रहती हैं। यह मूर्ति मेरे लिए ऐसी ही एक खरीदारी है। मुझे लगता है कि धनतेरस ऐसा खूबसूरत अवसर है, जब आप अपने घर में ऐसी कोई भी चीज ला सकते हैं, जो आपको खुशी दे, चाहे वह सोना हो, चाँदी हो या फिर कोई ऐसी वस्तु, जिसका आपके लिए व्यक्तिगत महत्व हो। मेरे लिए किसी वस्तु के साथ जुड़ा भावनात्मक रिश्ता ही उसे वास्तव में अनमोल बनाता है।”

यादें में डॉ. सृष्टि की भूमिका निभा रहीं गुल्की जोशी ने कहा, “मुझे सोना खरीदना बहुत पसंद है, क्योंकि मेरे लिए यह सिर्फ एक खूबसूरत चीज नहीं है, बल्कि भविष्य के लिए एक बेहतरीन निवेश भी है। धनतेरस को खास बनाने वाली बात यह है कि यह समझदारी से निवेश करने और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं का पालन करने, दोनों को एक साथ जोड़ता है। मुझे लगता है कि इस तरह के शुभ अवसर पर सोना खरीदने में एक अलग ही खुशी होती है, क्योंकि इसमें वित्तीय और भावनात्मक, दोनों तरह का महत्व होता है। मेरे लिए यह एक ऐसी परंपरा है, जिसे आगे बढ़ाते रहना चाहिए, क्योंकि इससे हम त्योहार का जश्न मनाने के साथ-साथ एक सोच-समझकर किया गया निवेश भी कर पाते हैं।”

देखिए हस्तिनापुर के वीर, पुष्पा इम्पॉसिबल और यादें, सिर्फ सोनी सब पर।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।