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रिजर्व बैंक को महंगाई दर और कम होने की उम्मीद, मौद्रिक नीति की समीक्षा जारी

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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मुंबई. रिजर्व बैंक ऑफ इंडि‍या की तरफ से शुक्रवार को कहा गया क‍ि भारत दुनिया की वृद्धि का इंजन बनने को तैयार है. केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि के अनुमान को 6.5 प्रतिशत पर कायम रखा. आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा पेश करते हुए कहा कि मजबूत मांग के चलते घरेलू अर्थव्यवस्था जुझारू क्षमता दिखा रही है. उन्होंने कहा 2023-24 में आर्थिक वृद्धि दर (Economic Growth Rate) 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है.

इससे पहले अगस्त की मौद्रिक नीति समीक्षा में भी वृद्धि दर के 6.5 प्रतिशत पर रहने का अनुमान जताया गया था. आरबीआई (RBI) की तरफ से मौद्रिक नीति समिति (MPC) को लगातार चौथी बार प्रमुख नीतिगत दर रेपो रेट को 6.5 प्रतिशत पर कायम रखने का फैसला किया है. महंगाई दर के तय लेवल से ऊपर चलने पर केंद्रीय बैंक के गवर्नर ने कहा क‍ि एमपीसी महंगाई दर को लेकर जरूरत के अनुसार कदम उठाएगी. उन्‍होंने उम्‍मीद जताई क‍ि सितंबर महीने आने वाले आंकड़ों में महंगाई दर कुछ नरम रहेगी.

अगस्‍त में भी महंगाई दर में ग‍िरावट
अगस्‍त में भी महंगाई दर पर आम आदमी को राहत म‍िली थी. अगस्‍त की महंगाई दर ग‍िरकर 6.83 प्रत‍िशत पर आ गई. जुलाई में यह 15 महीने के हाई लेवल 7.44 प्रत‍िशत पर थी. इससे पहले आरबीआई ने मौद्र‍िक नीत‍ि समीक्षा के आंकड़े जारी करते हुए रेपो रेट में क‍िसी तरह की बढ़ोतरी नहीं करने का ऐलान क‍िया. इससे लोन की ईएमआई में क‍िसी प्रकार का बदलाव नहीं होगा. चालू वित्त वर्ष के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) बेस्‍ड महंगाई के अनुमान को 5.4 प्रतिशत पर कायम रखा गया है.

साभार : जी न्यूज़

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।